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Putin Political Career: पुतिन ने PM और प्रेसिडेंट की 'कुर्सी-कुर्सी' खेलकर 2036 तक सत्ता को कैसे किया 'लॉक'!

Putin Political Career: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर दिल्ली पहुंच चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं पालम टेक्निकल एयरपोर्ट पर पहुंचकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस महत्वपूर्ण राजनयिक मुलाकात के बीच, पुतिन के निजी जीवन और उनके असाधारण राजनीतिक करियर की खूब चर्चा हो रही है।

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का राजनीतिक करियर असाधारण दृढ़ता और सत्ता पर अटूट पकड़ की कहानी है। 1999 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से, पुतिन ने कभी भी सत्ता का शीर्ष पद नहीं छोड़ा। संवैधानिक सीमाओं के कारण वह एक बार चार साल के लिए प्रधानमंत्री बने, लेकिन तुरंत बाद वह फिर से राष्ट्रपति के रूप में लौट आए। उनकी यह यात्रा रूस की राजनीति में उनके अविवादित प्रभुत्व को दर्शाती है।

Putin Political Career
(AI Image)

1999: जब पुतिन पहली बार बने थे PM

व्लादिमीर पुतिन पहली बार अगस्त 1999 में रूस के प्रधानमंत्री (Putin PM Russia) बने थे। उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन द्वारा नियुक्त किया गया था। उनकी यह नियुक्ति उनके राजनीतिक करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ थी। इसके कुछ ही महीनों बाद, दिसंबर 1999 में, बोरिस येल्तसिन ने इस्तीफा दे दिया और पुतिन कार्यवाहक राष्ट्रपति बने।

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2000 में राष्ट्रपति पद पर पहली जीत

1999 के अंत में, तत्कालीन राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन के अचानक इस्तीफे के बाद, व्लादिमीर पुतिन कार्यवाहक राष्ट्रपति बने। इसके बाद, मार्च 2000 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में पुतिन ने भारी बहुमत से अपनी पहली जीत हासिल की। यह जीत उनके राजनीतिक करियर में एक निर्णायक क्षण था, जिसने उन्हें आधिकारिक तौर पर रूस के सर्वोच्च पद पर स्थापित कर दिया। इस चुनाव के बाद, उन्होंने देश में स्थिरता बहाल करने और केंद्रीकृत सत्ता को मजबूत करने के अपने एजेंडे पर काम शुरू किया, जिससे रूस की राजनीति का एक नया दौर शुरू हुआ। 2008 तक दो कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति रहे।

क्यों बने प्रधानमंत्री? संवैधानिक सीमा बनी वजह

लगातार दो कार्यकाल (2000-2008) पूरे करने के कारण, रूसी संविधान के अनुसार व्लादिमीर पुतिन लगातार तीसरी बार राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ सकते थे। इस संवैधानिक बाध्यता का सम्मान करते हुए, वह चार साल (2008-2012) के लिए प्रधानमंत्री बने। इस दौरान, उनके वफादार सहयोगी दमित्री मेदवेदेव ने राष्ट्रपति पद संभाला।

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2012 से अब तक राष्ट्रपति के पर पद काबिज

चार साल (2008-2012) तक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करने के बाद, संवैधानिक बाधा हटने पर व्लादिमीर पुतिन ने 2012 में एक बार फिर राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने भारी जीत हासिल की और तीसरी बार रूस के राष्ट्रपति बने। कार्यकाल की अवधि को चार साल से बढ़ाकर छह साल किए जाने के कारण, पुतिन तब से लेकर अब तक (2025 तक) लगातार राष्ट्रपति (Putin President Russia) के पद पर बने हुए हैं। उनकी यह वापसी रूस की राजनीति में उनकी अटूट पकड़ को दर्शाती है और उन्हें देश के सबसे शक्तिशाली और लंबे समय तक सेवा करने वाले नेताओं में से एक बनाती है।

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2036 तक राष्ट्रपति रह सकते हैं पुतिन

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जनमत संग्रह के जरिए संवैधानिक बदलाव किए हैं, जिससे वह 2036 तक राष्ट्रपति के पद पर बने रह सकते हैं। इन बदलावों के तहत, पुतिन को वर्तमान कार्यकाल (2024 में समाप्त) के बाद अन्य दो कार्यकाल तक चुनाव लड़ने की अनुमति मिल गई है। आलोचकों का मानना है कि इस कदम से पुतिन रूसी तानाशाह जोसेफ़ स्टालिन से भी ज़्यादा लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले नेता बन सकते हैं।

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