Palestine Elections 2026: क्या खत्म हो जाएगा हमास का वजूद? फिलीस्तीनी राष्ट्रपति के आदेश से हड़कंप
Palestine PNC Elections 2026: फिलीस्तीन की राजनीति में दशकों बाद एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने 1 नवंबर को फिलीस्तीनी नेशनल काउंसिल (PNC) के पहले प्रत्यक्ष चुनावों की घोषणा कर दुनिया को चौंका दिया है। एक ओर जहां डोनाल्ड ट्रंप गाजा पीस बोर्ड के जरिए मध्य पूर्व में नई बिसात बिछा रहे हैं।
वहीं अब्बास का यह कदम PLO को लोकतांत्रिक वैधता दिलाने की एक बड़ी कोशिश है। पहली बार जनता सीधे वोट डालकर अपने प्रतिनिधि चुनेगी, जो फिलीस्तीनी राजनीति के भविष्य और नेतृत्व की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

Gaza Peace Board: लोकतंत्र की ओर ऐतिहासिक कदम
इतिहास में पहली बार PNC के सदस्यों का चयन नियुक्ति के बजाय सीधे मतदान से होगा। यह निर्णय फिलीस्तीनी राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के उद्देश्य से लिया गया है। अब तक आपसी सहमति या नियुक्तियों के भरोसे चलने वाली इस संस्था को जनता के जनादेश से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। अब्बास का यह आदेश न केवल स्थानीय बल्कि वैश्विक स्तर पर रह रहे फिलीस्तीनियों को भी मतदान का अधिकार देकर उन्हें मुख्यधारा की राजनीति से जोड़ने का एक साहसी प्रयास है।
ये भी पढे़ं: Israel Iran: परमाणु मलबे के नीचे क्या छिपा रहा है ईरान? सैटेलाइट तस्वीरों से टेंशन में ट्रंप और नेतन्याहू
Donald Trump Gaza Policy: दुनियाभर के फिलीस्तीनियों की भागीदारी
PNC को दुनिया भर में फैले फिलीस्तीनी प्रवासियों की 'निर्वासित संसद' माना जाता है। अब्बास के नए आदेश के अनुसार, चुनाव केवल फिलीस्तीनी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि जहां भी संभव होगा, विदेशों में रह रहे नागरिकों को भी मतदान का अवसर दिया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया के कोने-कोने में बसे फिलीस्तीनी समुदाय को एक साझा राजनीतिक मंच पर लाना और उनकी आवाज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक मजबूत और समावेशी बनाना है।
ये भी पढे़ं: Israel Palestine: इजरायल पर फिलिस्तीनियों की मदद को लेकर क्या जिम्मेदारी? UN ने ICJ से मांगी राय
International Palestinian Community: नेतृत्व का संकट और PLO का पुनरुत्थान
महमूद अब्बास वर्तमान में फिलीस्तीनी अथॉरिटी और PLO दोनों की कमान संभाल रहे हैं। आलोचकों का मानना है कि लंबे समय से चुनाव न होने के कारण नेतृत्व की प्रासंगिकता पर सवाल उठ रहे थे। ऐसे में PNC चुनाव कराकर अब्बास अपनी राजनीतिक विरासत को सुरक्षित करने और PLO को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर रहे हैं। यह कदम संगठन को नई ऊर्जा देने और उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिलीस्तीन के एकमात्र वैध प्रतिनिधि के रूप में पुन: स्थापित करने की रणनीति है।
ये भी पढे़ं: Palestine on Hamas: फिलीस्तनी ने हमास को बताया कुत्ते का पिल्ला, कहा- गाजा हमारे हवाले कर दो
हमास की अनुपस्थिति और भविष्य की चुनौतियां
इस चुनाव की सबसे बड़ी चुनौती हमास और इस्लामिक जिहाद जैसे प्रमुख संगठनों की गैर-मौजूदगी है। चूंकि ये संगठन PLO का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए वे PNC चुनाव से भी बाहर रहेंगे। विश्लेषकों का मानना है कि इन गुटों के बिना चुनाव को पूर्ण लोकतांत्रिक वैधता मिलना कठिन होगा। फतह पार्टी का दबदबा बरकरार रहने की उम्मीद है, लेकिन हमास के प्रभाव को दरकिनार करना फिलीस्तीनी एकता और भविष्य की शांति वार्ताओं के लिए एक जटिल पहेली बनी रहेगी।












Click it and Unblock the Notifications