Operation Sindoor: 4 दिन में 40 बार अमेरिका को मुनीर ने किया कॉल, तब रुका ऑपरेशन सिंदूर, कैसे खुली पोल?

Operation Sindoor: पिछले साल मई के महीने में भारत द्वारा पाकिस्तान पर चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल पहले पाकिस्तान द्वारा यह दावा किया जाता रहा कि भारत ने अमेरिका को सीजफायर के कराने के लिए फोन किया था। लेकिन अब अमेरिका के Foreign Agents Registration Act यानी FARA के तहत दाखिल किए गए नए लॉबिंग दस्तावेजों ने एक बड़ा खुलासा हुआ है।
जिससे पता चलता है कि पाकिस्तान ने 6 मई से 9 मई 2025 के बीच वॉशिंगटन में राजनीतिक, रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई बड़े अमेरिकी अधिकारियों और संस्थानों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा था। खास बात यह है कि यही वही समय था जब भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था।

4 दिनों में करीब 60 बार अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क

बाहर आए दस्तावेज बताते हैं कि पाकिस्तान ने इस दौरान अमेरिकी सांसदों, कांग्रेस स्टाफ, ट्रेजरी विभाग के अधिकारियों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों, रक्षा अधिकारियों और पत्रकारों के साथ लगभग 60 अलग-अलग बातचीत और संपर्क किए। इन दस्तावेजों से यह साफ होता है कि भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच पाकिस्तान अमेरिका में बेहद सक्रिय डिप्लोमैटिक कैंपेन चला रहा था।

Operation Sindoor

असीम मुनीर ने क्या दावा किया?

यह खुलासा ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने हाल ही में दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने अमेरिका से मध्यस्थता और सीजफायर की मांग की थी। मुनीर ने यह बयान रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में मरका-ए-हक का एक साल पूरा होने पर दिया था। पाकिस्तान भारत के साथ हुई उस 4 दिनों की झड़प को मरका-ए-हक कहता है।

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अपनी पीठ थपथपाते रहे मुनीर

अपने भाषण में असीम मुनीर ने दावा किया कि उस जंग के दौरान पाकिस्तान की रणनीति भारत से बेहतर थी। मुनीर ने कहा कि "भारत ने अमेरिकी नेतृत्व के जरिए मध्यस्थता की इच्छा जताई थी, जिसे पाकिस्तान ने क्षेत्रीय शांति के हित में स्वीकार किया।" हालांकि भारत पहले ही साफ कर चुका है कि किसी भी तरह की तीसरी पार्टी मध्यस्थता शामिल नहीं थी।

ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद खुली पोल

मुनीर के ये बयान ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के लगभग एक साल बाद आए हैं। पिछले कई महीनों में पाकिस्तान की तरफ से लगातार भारत के खिलाफ बयानबाजी होती रही है। लेकिन अब FARA दस्तावेज सामने आने के बाद इस पूरे मामले को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

पहलगाम के बाद शुरू हुआ था ऑपरेशन सिंदूर

दस्तावेजों से पता चलता है कि भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले और पाकिस्तान और PoJK में आतंकी ढांचे पर एयरस्ट्राइक शुरू करने के बाद पाकिस्तान ने वॉशिंगटन में बड़े स्तर पर राजनीतिक संपर्क बढ़ाए थे। दूसरी ओर, 6 और 7 मई 2025 की रात भारत के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा था कि भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और PoJK में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक हमला किया।

भारत ने यह भी स्पष्ट किया था कि किसी भी पाकिस्तानी सैन्य ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया। सरकार ने ऑपरेशन को "Focused, Measured and Non-Escalatory" यानी सीमित और कंट्रोल्ड एक्शन बताया था।

पाकिस्तान मांगता रहा अमेरिका से भीख

FARA दस्तावेज बताते हैं कि पाकिस्तान की कई बातचीत और संपर्क उसके राजदूत के लिए अमेरिकी अधिकारियों से मीटिंग तय कराने से जुड़े थे। 7 और 8 मई तक दस्तावेजों में Regional Tension को लेकर चर्चा तेजी से बढ़ने लगी थी।

किन अमेरिकी नेताओं से हुआ संपर्क?

दस्तावेजों में अमेरिकी सैन्य दिग्गज Brian Mast, हाउस माइनॉरिटी लीडर Hakeem Jeffries से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और सीनेट मेजॉरिटी लीडर John Thune के कार्यालय से संपर्क का जिक्र किया गया है। इसके अलावा House Majority Leader Steve Scalise से जुड़े सलाहकारों तक पहुंच बनाने के प्रयास भी दर्ज किए गए हैं। ये बताता है कि पाकिस्तान किस हद तक अमेरिका में मदद की गुहार लगा रहा था।

9 मई को और बढ़ गई गतिविधियां

9 मई तक पाकिस्तान की गतिविधियां और ज्यादा तेज हो गईं। कई एंट्रीज में "Defense Attache Meeting Request" लिखा गया था। वॉशिंगटन स्थित पाकिस्तानी दूतावास के अनुसार उस समय पाकिस्तान के रक्षा अताशे Brigadier Irfan Ali थे। दस्तावेजों से यह भी साफ होता है कि पहलगाम हमले के बाद अमेरिका में भारत और पाकिस्तान की रणनीति पूरी तरह अलग थी। पाकिस्तान अमेरिका से मदद की भीख मांग रहा था जबकि भारत अपने तरीके से जंग को लड़ रहा था।

Khamenei Is Alive:
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CNN रिपोर्ट से भी मिलती है जानकारी

ये खुलासे CNN की पहले आई रिपोर्ट से भी मेल खाते हैं। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर पर कई दिनों से बातचीत चल रही थी। हालांकि जंग रोकने का फैसला दोनों देशों के DGMO यानी Director General of Military Operations के बीच हॉटलाइन बातचीत के बाद हुआ था।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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