Bengal में करारी हार के बाद TMC का दावा - SIR से चुनाव परिणाम प्रभावित हुए, सुप्रीम कोर्ट से क्‍या मिला जवाब?

West Bengal Election Result 2026: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम मामले में वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को लेकर बड़ा फैसला देते हुए नए आवेदन दाखिल करने की इजाज़त दे दी। यह अपील पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई लोगों की तरफ से की गई थी। मामला उस प्रक्रिया से जुड़ा है जिसमें वोटर लिस्‍ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का आरोप लगाया गया है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच इस पूरे SIR मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान टीएमसी के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी ने कोर्ट में कहा कि इस वोटर लिस्ट रिवीजन की प्रक्रिया ने पश्चिम बंगाल की कई विधानसभा सीटों के चुनाव नतीजों पर सीधा और काफी गहरा असर डाला है।

TMC

तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश हुए कल्याण बनर्जी ने शीर्ष अदालत को बताया कि राज्य की 31 विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर एसआईआर प्रक्रिया के दौरान हटाए गए नामों की संख्या से कम था। उन्होंने एक निर्वाचन क्षेत्र का उदाहरण दिया, जहां पार्टी उम्मीदवार मात्र 862 वोटों से हार गया, जबकि मतदाता सूची से 5,000 से अधिक नाम हटा दिए गए थे।

सुप्रीम कोट ने क्‍या दिया जवाब?

तृणमूल सांसद ने यह भी कहा कि राज्य में TMC और BJP के बीच लगभग 32 लाख का कुल वोट अंतर था, जबकि हटने के खिलाफ 35 लाख से अधिक अपीलें थीं। उन्होंने चिंता जताई कि इन अपीलों के निपटारे में वर्षों लग सकते हैं। इसके जवाब में पीठ ने कहा कि यदि जीत का अंतर हटाए गए वोटों से कम है, तो नए आवेदन दिए जा सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में क्‍या दी दलील?

पहले की सुनवाई में भी शीर्ष अदालत ने ऐसे मामलों की जांच करने का संकेत दिया था जहां जीत-हार का अंतर विवादित विलोपन से कम था। वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने पीठ को बताया कि वर्तमान गति से अपीलीय न्यायाधिकरणों को मतदाता सूचियों में जोड़ने और हटाने से संबंधित अपीलें निपटाने में लगभग चार साल लग सकते हैं।

SIR से जुड़े हर मुद्दे का अलग केस नहीं चलाया जा सकता

भारत के चुनाव आयोग ने इन दलीलों का विरोध किया, तर्क दिया कि ऐसे मामलों में कानूनी उपाय केवल चुनाव याचिकाओं के माध्यम से ही संभव है। आयोग के वकील ने बताया कि चुनाव संबंधी विवादों पर "कानून स्पष्ट है" और एसआईआर प्रक्रिया से उत्पन्न होने वाले हर मुद्दे पर अलग से मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

हालांकि, पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि अपीलों के निपटारे की व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है और ऐसे मामलों का समय पर निपटाना महत्वपूर्ण है।

सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से ठीक पहले किए गए एसआईआर अभ्यास को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटें जीतीं और तृणमूल कांग्रेस को 80 सीटें मिलीं। इन चुनावों में 90 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया था।

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