Rajasthan: कब होंगे डेढ़ साल से अटके पंचायत चुनाव? हाईकोर्ट ने सरकार और चुनाव आयोग को घेरा
Rajasthan में पंचायत और निकाय चुनाव लगातार टलने को लेकर अब हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपना लिया है। सोमवार को हुई अहम सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग से तीखे सवाल पूछे। कोर्ट ने साफ कहा कि चुनाव कराने के लिए सरकार को पहले ही काफी समय दिया जा चुका है, फिर भी अब तक प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
अदालत ने यह भी माना कि लंबे समय तक चुनाव नहीं होना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सही स्थिति नहीं है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। अब सभी की नजर अदालत के अगले आदेश पर टिकी है, क्योंकि यह मामला प्रदेश की हजारों पंचायतों और निकायों से जुड़ा हुआ है।

सरकार ने मांगा अतिरिक्त समय
राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग की ओर से हाईकोर्ट में आवेदन देकर पंचायत और निकाय चुनाव कराने के लिए और समय मांगा गया। सरकार की तरफ से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि निकाय चुनावों में वार्डों के आंतरिक परिसीमन को लेकर अलग-अलग अदालतों के फैसलों की वजह से प्रक्रिया प्रभावित हुई है। इसके अलावा ओबीसी आरक्षण से जुड़ी आयोग की रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है, इसलिए चुनाव कराना संभव नहीं हो पा रहा।
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कोर्ट ने पूछे कड़े सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि अगर समस्या मुख्य रूप से निकाय चुनावों में थी तो पंचायत चुनाव समय पर क्यों नहीं कराए गए। अदालत ने यह भी कहा कि ओबीसी आयोग की स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी कोर्ट के सामने नहीं रखी गई। बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर आयोग की स्थिति साफ होती तो अदालत उसकी भूमिका को लेकर भी निर्देश दे सकती थी।
गर्मी और बारिश की दलील पर टिप्पणी
सरकार की ओर से चुनाव टालने के पीछे मौसम का हवाला भी दिया गया। महाधिवक्ता ने कहा कि जून में राजस्थान में भीषण गर्मी और हीटवेव रहती है, जबकि जुलाई में बारिश शुरू हो जाती है। ऐसे मौसम में चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इस पर हाईकोर्ट ने सरकार की दलील को ज्यादा महत्व नहीं दिया। अदालत ने कहा कि राजस्थान के लोग गर्मी से निपटना अच्छी तरह जानते हैं। वहीं बारिश का जिक्र आने पर कोर्ट ने हल्के अंदाज में कहा, "राजस्थान में बरसात?"
डेढ़ साल से नहीं हुए चुनाव
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने सरकार पर चुनाव टालने का आरोप लगाया। एडवोकेट पुनीत सिंघवी ने कहा कि सरकार की मंशा चुनाव कराने की नजर नहीं आ रही और इससे संवैधानिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि पंचायतों और निकायों में चुने हुए प्रतिनिधियों की जगह अधिकारी काम संभाल रहे हैं।
वहीं एडवोकेट प्रेमचंद देवंदा ने अदालत को बताया कि प्रदेश की हजारों पंचायतों का कार्यकाल खत्म हो चुका है और करीब डेढ़ साल से चुनाव नहीं कराए गए हैं।
पहले भी दे चुका है कोर्ट आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। अदालत ने 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने को भी कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने भी समय पर चुनाव कराने पर जोर दिया था, लेकिन इसके बावजूद सरकार और चुनाव आयोग ने अतिरिक्त समय मांगा है।
18 मई को होगी अगली सुनवाई
इसी मामले में पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज देवंदा की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ अवमानना याचिका भी दायर की गई है। इस याचिका पर 18 मई को सुनवाई होगी। सरकार ने अपने आवेदन में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट, ईवीएम, कर्मचारियों की कमी और अन्य संसाधनों का हवाला देते हुए चुनाव आगे बढ़ाने की मांग की है।
'वन स्टेट-वन इलेक्शन' का भी जिक्र
सरकार ने अदालत में यह भी कहा कि आने वाले महीनों में कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल खत्म होने वाला है। ऐसे में अगर बाद में चुनाव कराए जाते हैं तो "वन स्टेट-वन इलेक्शन" की व्यवस्था लागू करने में आसानी होगी।
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