Pakistan में मचा भारी बवाल, हाफ़िज़ सईद के समर्थकों पर सुरक्षाबलों ने क्यों चलाई गोली?
Tehreek-e-Labbaik Muridke Clashes: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर कब्जे की नीयत से बढ़ रहे कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) के सैकड़ों समर्थकों ने देश में तबाही मचा दी है। यह पूरा बवाल तब शुरू हुआ जब गाज़ा के समर्थन में मार्च कर रहे इन प्रदर्शनकारियों को हाफ़िज़ सईद के गढ़ माने जाने वाले मुरीदके में सुरक्षाबलों ने रोका। मुरीदके के इस आतंकी मदरसे वाले इलाके में देखते ही देखते सड़कों पर भीषण संग्राम छिड़ गया।
पुलिस और रेंजर्स ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी-लाठीचार्ज हुआ, आँसू गैस के गोले दागे गए और कथित तौर पर गोलीबारी भी की गई। जवाब में, TLP समर्थकों ने भी पत्थरों से हमला किया और सरकारी वाहनों को तहस-नहस कर दिया।

हाफ़िज़ सईद के गढ़ में हिंसा
तहरीक-ए-लब्बैक (TLP) का यह हिंसक मार्च सिर्फ विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि सीधे तौर पर एक रणनीतिक चुनौती बन गया। इस टकराव का केंद्र मुरीदके है-एक ऐसा इलाका जिसे प्रतिबंधित आतंकवादी हाफ़िज़ सईद का मजबूत गढ़ माना जाता है, और जहाँ उसका कुख्यात आतंकी मदरसा भी है।
जैसे ही TLP का विशाल काफिला इस्लामाबाद की दिशा में आगे बढ़ने लगा, मुरीदके में पुलिस और रेंजर्स ने मोर्चा संभाल लिया और उन्हें आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। सूत्रों के अनुसार, यह अवरोधन (रोकना) होते ही हालात बेकाबू हो गए और भीषण हिंसा भड़क उठी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए, सुरक्षाबलों को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए 'ताकत का इस्तेमाल' करना पड़ा, जिसमें लाठीचार्ज और आँसू गैस शामिल थे। इस हिंसक झड़प में कई प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं, जो मुरीदके में तनाव के खतरनाक स्तर को दर्शाता है।
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TLP का 'धोखे' का आरोप और देशव्यापी ठप
तहरीक-ए-लब्बैक ने प्रशासन पर विश्वासघात का आरोप लगाया है। TLP नेताओं का कहना है कि उन्होंने गाज़ा के समर्थन में प्रदर्शन के लिए प्रशासन से अनुमति ली थी, लेकिन जब प्रदर्शनकारी फज्र की नमाज़ पढ़ने के लिए बैठे थे, तभी उन पर अचानक लाठीचार्ज शुरू कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने पाकिस्तान के कई शहरों, विशेष रूप से इस्लामाबाद और लाहौर को तीन दिन से ठप कर रखा है। प्रशासन ने कई शहरों में धारा-144 लागू कर दी है और राजधानी में इंटरनेट सेवाओं को बंद करने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि आगे हिंसा न फैले।
इमरान की सरकार पलटने वाला संगठन अब क्यों बना आंतरिक चुनौती?
TLP की स्थापना वर्ष 2015 में अमीर मौलाना खादिम हुसैन ने की थी, और यह कट्टरपंथी इस्लामिक पार्टी सुन्नी संप्रदाय के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। TLP पाकिस्तान की राजनीति में एक विध्वंसक शक्ति रही है। इस संगठन ने 2023 में इमरान खान की सरकार पलटने में अहम भूमिका निभाई थी और इसे अक्सर मौजूदा सत्तारूढ़ शहबाज़ शरीफ़ की पार्टी का करीबी माना जाता है। गाज़ा के समर्थन में किया गया यह मार्च अब पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता के लिए एक नई चुनौती बन गया है।
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