Crown Princess Victoria: कौन हैं क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया? PM Modi को दिया खास तोहफा, चर्चा में क्यों आईं?
Crown Princess Victoria: हाल ही में प्रधानमंत्री Narendra Modi की स्वीडन यात्रा दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गई। इस दौरान स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस Victoria, Crown Princess of Sweden ने एक भव्य समारोह में पीएम मोदी को स्वीडन का सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार (कमांडर ग्रैंड क्रॉस)' से नवाजा। इस सम्मान के साथ नरेंद्र मोदी यह अवॉर्ड पाने वाले पहले एशियाई नेता बन गए हैं। इसे भारत और स्वीडन के रिश्तों के लिए एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
क्या है 'रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार'?
Royal Order of the Polar Star स्वीडन के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित राज्य सम्मानों में से एक है। इसकी शुरुआत साल 1818 में हुई थी। करीब दो सदियों पुराना यह सम्मान उन विदेशी राष्ट्राध्यक्षों, प्रधानमंत्रियों और बड़े नेताओं को दिया जाता है जिन्होंने स्वीडन के साथ मजबूत रिश्ते बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष योगदान देने का काम किया हो। स्वीडन में इस अवॉर्ड को बेहद सम्मानजनक माना जाता है और इसे पाने वाले नेताओं की संख्या भी काफी सीमित रही है।
कौन हैं क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया?
Victoria, Crown Princess of Sweden स्वीडन के राजा Carl XVI Gustaf की सबसे बड़ी बेटी हैं और फिलहाल स्वीडिश सिंहासन की आधिकारिक उत्तराधिकारी हैं। 48 साल की विक्टोरिया धीरे-धीरे भविष्य की राष्ट्राध्यक्ष की भूमिका के लिए खुद को तैयार कर रही हैं। अगर वह भविष्य में सिंहासन संभालती हैं, तो वह स्वीडन के इतिहास की केवल चौथी शासक रानी बनेंगी। यही वजह है कि यूरोप की राजनीति और राजघरानों में उनकी काफी अहमियत मानी जाती है।

जन्म के बाद भी क्यों छिन गई थी उत्तराधिकारी की जगह?
दिलचस्प बात यह है कि 1977 में जन्म लेने के बावजूद विक्टोरिया शुरुआत में सिंहासन की उत्तराधिकारी नहीं थीं। दरअसल, 1979 में उनके छोटे भाई Prince Carl Philip का जन्म हुआ। उस समय स्वीडन में पुराने नियम लागू थे, जिनमें केवल पुरुष संतान को प्राथमिकता दी जाती थी। इसी वजह से विक्टोरिया को उत्तराधिकार की लाइन से हटा दिया गया था और उनके भाई को आगे कर दिया गया।
1980 में बदला संविधान और बदल गई किस्मत
साल 1980 में स्वीडन ने अपने संविधान में बड़ा बदलाव किया। देश ने एब्सोल्यूट प्रिमोजेनर यानी अब राजा की सबसे बड़ी संतान ही उत्तराधिकारी होगी, चाहे वह बेटा हो या बेटी। इस ऐतिहासिक बदलाव के बाद विक्टोरिया को आधिकारिक तौर पर क्राउन प्रिंसेस घोषित किया गया और उन्हें भविष्य की रानी का दर्जा मिला। यह फैसला यूरोप में महिला अधिकारों और राजशाही सुधारों के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना गया।
क्यों कहा जाता है 'गॉडमदर ऑफ यूरोप'?
अपनी शाही जिम्मेदारियों के अलावा विक्टोरिया एक बेहद खास निक नेम 'गॉडमदर ऑफ यूरोप' से भी जानी जाती हैं। यूरोप के शाही परिवारों में वह सबसे लोकप्रिय गॉडपेरेंट्स में से एक मानी जाती हैं। यूरोप की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, गॉडपेरेंट बच्चों के आध्यात्मिक संरक्षक और मार्गदर्शक माने जाते हैं। विक्टोरिया के यूरोप के लगभग हर बड़े शाही परिवार में गॉडचाइल्ड मौजूद हैं।
तीन भावी राजा-रानियों की भी हैं गॉडमदर
सबसे खास बात यह है कि विक्टोरिया के गॉडचाइल्ड्स में यूरोप के तीन भावी राजा और रानियां भी शामिल हैं। यही वजह है कि उन्हें केवल स्वीडन की भावी रानी नहीं, बल्कि पूरे यूरोप के शाही परिवारों को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण हस्ती माना जाता है। उनकी यह भूमिका उन्हें मॉडर्न यरोपियन एरिस्टोक्रेसी के बीच एक मजबूत और एकजुट करने वाले चेहरे के रूप में स्थापित करती है।
भारत-स्वीडन रिश्तों के लिए क्यों अहम है यह सम्मान?
विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी को मिला यह सम्मान केवल एक औपचारिक अवॉर्ड नहीं है।यह भारत और स्वीडन के बीच बढ़ते रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक भी है।दोनों देश टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी, डिफेंस, इनोवेशन और व्यापार जैसे क्षेत्रों में लगातार सहयोग बढ़ा रहे हैं। ऐसे में पीएम मोदी को मिला यह सम्मान आने वाले समय में दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।
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