Iran America War: शांति वार्ता या बड़ा फर्जीवाड़ा? पाकिस्तान ने 'फेक न्यूज़' के जरिए दुनिया को बनाया बेवकूफ
Iran USA Peace Talks: ईरान और अमेरिका के बीच शांति कराने के पाकिस्तान के दावों पर अब सवाल उठने लगे हैं। पाकिस्तान खुद को एक बड़े 'मध्यस्थ' के रूप में पेश कर रहा था, लेकिन हकीकत में यह केवल एक कूटनीतिक दिखावा साबित हुआ।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने दुनिया को गुमराह करने के लिए झूठी खबरें फैलाईं कि दोनों देश बातचीत की मेज पर आ रहे हैं। इस पूरे मामले में पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग (ISPR) की भूमिका संदिग्ध रही, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम पैदा करने की कोशिश की।

पाकिस्तान का 'शांति दूत' वाला प्रोपेगेंडा
पाकिस्तान ने दुनिया को यह यकीन दिलाने की पूरी कोशिश की कि वह अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक समझौता कराने जा रहा है। इस्लामाबाद ने ऐसा माहौल बनाया जैसे कोई बहुत बड़ी मीटिंग होने वाली है। सरकार और सेना की ओर से पत्रकारों को ऐसे संदेश भेजे गए, जिससे लगे कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय राजनीति का बड़ा खिलाड़ी बन गया है। इस झूठे प्रचार के जाल में कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान भी फंस गए और गलत खबरें चलने लगीं।
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ईरान की दो-टूक और कड़ी शर्तें
सच्चाई यह थी कि ईरान के अधिकारी अमेरिका से मिलने के इच्छुक नहीं थे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस्लामाबाद जरूर आए, लेकिन उनका मकसद अपनी शिकायतें दर्ज कराना था, न कि शांति वार्ता करना। ईरान ने साफ कर दिया था कि जब तक अमेरिका उसकी समुद्री शिपिंग और व्यापार पर लगी पाबंदियां नहीं हटाता, तब तक कोई बातचीत संभव नहीं है। पाकिस्तान ने ईरान की इस नाराजगी को छुपाकर दुनिया से केवल झूठ बोला।
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ISPR और मीडिया के जरिए फर्जीवाड़ा
इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे पाकिस्तान की सैन्य मीडिया विंग ISPR का हाथ बताया जा रहा है। आरोप है कि ISPR ने ही पत्रकारों और न्यूज़ एजेंसियों को यह गलत सूचना दी कि अमेरिका की एक सुरक्षा टीम पहले से इस्लामाबाद में मौजूद है। यह सब इसलिए किया गया ताकि पाकिस्तान की गिरती हुई अंतरराष्ट्रीय साख को बचाया जा सके। झूठ इतनी सफाई से बोला गया कि इसे एक सोची-समझी कूटनीतिक साजिश माना जा रहा है।
पत्रकार रयान ग्रिम ने खोली पोल
प्रसिद्ध पत्रकार रयान ग्रिम ने सोशल मीडिया पर इस पूरी कहानी की पोल खोल दी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर पाकिस्तान ने दुनिया से इतना बड़ा झूठ क्यों बोला? ग्रिम ने खुलासा किया कि ईरान का वार्ता शुरू करने का कोई इरादा नहीं था। पाकिस्तानी सूत्रों ने जानबूझकर गलत जानकारी फैलाई ताकि दुनिया को लगे कि पाकिस्तान 'बहुत जरूरी' देश है। इस खुलासे के बाद अब पाकिस्तान के 'शांति दूत' बनने के दावे की पोल खुल चुकी है।












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