US Sanctions on China: ट्रंप का चीन पर बड़ा प्रहार! ड्रैगन की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी पर बैन, बीजिंग में हड़कंप

US Sanctions on China: डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनते ही ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने के लिए चीन की दिग्गज कंपनी 'हेंगली पेट्रोकेमिकल' पर कड़ा दांव खेला है। अमेरिका का मानना है कि ईरान अपने तेल से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल मिडिल ईस्ट में अस्थिरता फैलाने और परमाणु हथियार बनाने में कर रहा है।

चूंकि चीन ईरान का सबसे बड़ा ग्राहक है, इसलिए ट्रंप प्रशासन ने सीधे चीन की सबसे बड़ी रिफाइनरी पर ही बैन लगा दिया। यह कदम न केवल ईरान को मिलने वाले फंड को रोकने के लिए है, बल्कि चीन को यह चेतावनी भी है कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों को हल्के में न ले।

US Sanctions on China

Iran Oil Export Ban: हेंगली रिफाइनरी पर ही एक्शन क्यों?

हेंगली पेट्रोकेमिकल चीन की एक बहुत बड़ी रिफाइनरी है, जो हर दिन लाखों बैरल तेल प्रोसेस करती है। अमेरिकी खुफिया विभाग के अनुसार, यह कंपनी 2023 से लगातार ईरान से कच्चा तेल खरीद रही है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अगर इस बड़ी रिफाइनरी पर ताला या पाबंदी लगा दी जाए, तो ईरान के तेल के लिए कोई बड़ा खरीदार नहीं बचेगा। इससे ईरान की कमाई का मुख्य रास्ता बंद हो जाएगा, जो सीधे तौर पर वहां की सरकार को कमजोर करेगा।

ईरान का 'शैडो फ्लीट' क्या है?

ईरान अपना तेल दुनिया भर में बेचने के लिए चोरी-छिपे जहाजों का एक नेटवर्क चलाता है, जिसे 'शैडो फ्लीट' या गुप्त बेड़ा कहा जाता है। ये जहाज अपनी पहचान छुपाकर और अंतरराष्ट्रीय नियमों को ताक पर रखकर तेल सप्लाई करते हैं। अमेरिका ने हेंगली के साथ-साथ इन 40 टैंकरों और शिपिंग कंपनियों पर भी बैन लगाया है। ट्रंप की रणनीति इन 'भूतिया जहाजों' को पकड़ने की है ताकि ईरान का तेल समुद्र से बाहर निकल ही न पाए और उसकी सप्लाई चेन टूट जाए।

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चीन की कड़ी प्रतिक्रिया और विरोध

चीन ने इस अमेरिकी कार्रवाई को अपनी संप्रभुता पर हमला बताया है। बीजिंग का कहना है कि वे किसी भी देश के एकतरफा प्रतिबंधों को नहीं मानते और ईरान के साथ उनका व्यापार पूरी तरह कानूनी है। चीन ने साफ कर दिया है कि वह अपने व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा। इस टकराव से चीन और अमेरिका के रिश्तों में कड़वाहट और बढ़ गई है, जिससे आने वाले समय में दोनों महाशक्तियों के बीच एक बड़ा ट्रेड वॉर या कूटनीतिक तनाव देखने को मिल सकता है।

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मिडिल ईस्ट में शांति और अमेरिकी रणनीति

अमेरिका के वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट के अनुसार, इन प्रतिबंधों का बड़ा मकसद मिडिल ईस्ट में शांति लाना है। अमेरिका का तर्क है कि ईरान को तेल से जो पैसा मिलता है, उसी से वह अपनी सेना और दूसरे विद्रोही गुटों की मदद करता है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि वित्तीय शिकंजा कसने से ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़ने पर मजबूर होगा। यह बैन सिर्फ एक रिफाइनरी पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक संदेश है कि ईरान के साथ व्यापार करना महंगा पड़ेगा।

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