Maldives Debt Repayment: मालदीव ने चुकाई भारत के कर्ज की दूसरी किश्त, राष्ट्रपति मुइज्जू ने दी जानकारी
Maldives Debt Repayment: मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने हाल ही में घोषणा की है कि उनकी सरकार ने भारत से लिए गए कर्ज की दूसरी किश्त चुका दी है। मुइज्जू ने बताया कि मालदीव ने $50 मिलियन (लगभग 425 करोड़ रुपये) का भुगतान किया है। यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और विदेशी कर्ज के बोझ को कम करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
मुइज्जू सरकार का लक्ष्य पिछली सरकार के समय से चले आ रहे बकाया वित्तीय बोझ को खत्म करना है, जिससे मालदीव की अंतरराष्ट्रीय साख मजबूत हो सके।

कर्ज का भुगतान और मौजूदा स्थिति
मालदीव सरकार ने भारत को $50 मिलियन के ट्रेजरी बिल का भुगतान कर दिया है। यह इस साल की दूसरी बड़ी किश्त है; इससे पहले जनवरी 2024 में भी इतनी ही राशि चुकाई गई थी। राष्ट्रपति मुइज्जू के अनुसार, अब केवल $50 मिलियन का एक और बिल बकाया है, जिसका भुगतान सितंबर महीने में किया जाना है। इन किश्तों को चुकाने से मालदीव पर कर्ज का दबाव कम होगा और देश की वित्तीय स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है।
क्या होते हैं ट्रेजरी बिल?
ट्रेजरी बिल एक तरह का अल्पकालिक कर्ज (Short-term loan) होता है। जब किसी देश की सरकार को अपना बजट चलाने या घाटा पूरा करने के लिए तुरंत पैसों की जरूरत होती है, तो वह ये बिल जारी करती है। भारत ने 2019 में मालदीव की मदद के लिए ये बिल खरीदे थे। इसे एक निश्चित समय सीमा के भीतर ब्याज सहित वापस करना होता है। मालदीव के मामले में, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने इन बिलों के जरिए मालदीव को आर्थिक मदद दी थी।
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पिछली सरकार पर आरोप
राष्ट्रपति मुइज्जू ने पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह की सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि पिछली सरकार ने कर्ज चुकाने के बजाय उसे बार-बार 'रोल ओवर' किया, यानी पुराने कर्ज को चुकाने के बजाय उसे आगे बढ़ाते रहे। मुइज्जू का दावा है कि उनकी सरकार ने इस सिलसिले को तोड़कर कर्ज को वास्तव में खत्म करना शुरू कर दिया है। मुइज्जू के मुताबिक, इस प्रक्रिया से देश को कुल $150 मिलियन के पुराने कर्ज से आजादी मिल जाएगी।
भारत और मालदीव के आर्थिक रिश्ते
भारत हमेशा से मालदीव का एक भरोसेमंद पड़ोसी और मददगार रहा है। 2019 में जब मालदीव गहरे आर्थिक संकट और बजट घाटे से जूझ रहा था, तब भारत ने उसे यह वित्तीय राहत प्रदान की थी। संकट के समय में भारत ने कई बार कर्ज चुकाने की समय सीमा भी बढ़ाई ताकि मालदीव की अर्थव्यवस्था पर एकदम से बोझ न पड़े। वर्तमान मुइज्जू सरकार अब इन्हीं पुराने दायित्वों को पूरा कर रही है ताकि दोनों देशों के बीच आर्थिक संतुलन बना रहे।












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