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Khamenei Death Reason: अपनों की गद्दारी, CIA-मोसाद का जाल, रक्षा विशेषज्ञों से जानिए कैसे खामेनेई का हुआ अंत

Khamenei Death Reason: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की एक सटीक हमले में मौत की खबर ने पूरी दुनिया को सन्न कर दिया है। CENTCOM के जारी किए गए वीडियो और डिफेंस एक्सपर्ट्स की मानें तो, CIA और मोसाद ने मिलकर एक ऐसा 'सर्जिकल स्ट्राइक' किया जिसने न सिर्फ खामेनेई, बल्कि उनके सबसे खास सिपहसालारों अली शमखानी और मोहम्मद पाकपूर का भी नामो-निशान मिटा दिया।

30 शक्तिशाली बंकर-बस्टर बमों ने उस गुप्त ठिकाने को कब्रिस्तान में बदल दिया जिसे ईरान सबसे सुरक्षित मानता था। अब तेहरान ने इस शहादत की तुलना इमाम हुसैन से करते हुए अमेरिका से 'भयानक बदला' लेने की कसम खाई है। 'तरकश' की इस स्पेशल रिपोर्ट में रक्षा विशेषज्ञों से समझिए, कैसे तकनीक और अपनों की गद्दारी ने शिया जगत के इस कद्दावर नेता का अंत कर दिया।

Khamenei Death Reason

अपनों की गद्दारी: CIA और मोसाद का 'इंसानी जाल'

रक्षा विशेषज्ञ ग्रुप कैप्टन यू.के. देवनाथ (रिटायर्ड) का मानना है कि इतने बड़े ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए सिर्फ सैटेलाइट काफी नहीं थे, इसके लिए 'ह्यूमन इंटेलिजेंस' यानी जमीनी जासूसों की जरूरत थी। ईरान के भीतर एक ऐसा तबका तैयार हो चुका है जो खामेनेई की कट्टरपंथी नीतियों और पाबंदियों से तंग आ चुका है। इनमें खास तौर पर वे लोग शामिल हैं जो यूरोप या अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों में पढ़-लिखकर वापस लौटे हैं और वहां की आजादी को देख चुके हैं। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इनमें से कई लोग CIA और मोसाद के 'पेरोल' पर काम करते हैं। इन जासूसों ने न केवल खामेनेई के पल-पल के मूवमेंट की जानकारी दी, बल्कि उस गुप्त मीटिंग की सही टाइमिंग भी लीक की, जिससे अमेरिका को हमला करने का सटीक मौका मिल गया।

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Iran Israel conflict: मोबाइल और सैटेलाइट से पकड़ी गई लोकेशन

अमेरिका और इजराइल ने इस ऑपरेशन में अपनी तकनीकी ताकत का प्रदर्शन किया है। खाड़ी के कई देशों में अमेरिका ने ऐसे विशाल टावर लगाए हैं जो ईरान के भीतर होने वाली हर डिजिटल हलचल पर नजर रखते हैं। इन टावरों के जरिए मोबाइल फोन और सैटेलाइट फोन के सिग्नल्स को बीच में ही 'इंटरसेप्ट' (पकड़ना) किया जाता है। रक्षा विशेषज्ञ ग्रुप कैप्टन यू.के. देवनाथ (रिटायर्ड) बताते हैं कि अमेरिकी इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस ने मोबाइल फोन की बारीकियों, जैसे 'साइड लोब' और 'रियर लोब' सिग्नल्स के जरिए फोन के भीतर घुसकर लोकेशन का पता लगाया। इस तकनीक की मदद से उन्हें यह पता चल गया कि खामेनेई ठीक किस इमारत के किस कमरे में मीटिंग कर रहे थे। इसी डिजिटल जासूसी ने 30 बंकर बस्टर बमों को उनके सही टारगेट तक पहुंचाया।

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Middle East War Hindi: जब मलबे के ढेर में तब्दील हो गया सुरक्षित किला

रक्षा विशेषज्ञ अक्षय चोपड़ा के अनुसार, अयातुल्ला खामेनेई जैसे कद्दावर नेता को निशाना बनाना कोई मामूली काम नहीं था। उनकी सुरक्षा इतनी अभेद्य थी कि उसे भेदने के लिए सालों की प्लानिंग की गई थी। हमला इतना भीषण था कि अमेरिका ने सिर्फ उस कमरे को ही नहीं उड़ाया, बल्कि पूरे कैंपस पर 30 से ज्यादा 'बंकर बस्टर' बम बरसाए। ये बम जमीन की गहराई में जाकर धमाका करते हैं, जिससे कंक्रीट के मोटे बंकर भी कागज की तरह बिखर जाते हैं। इस हमले में खामेनेई का नामो-निशान तो मिट ही गया, साथ ही उनके साथ मौजूद करीब 40 बड़े ईरानी नेता और उनके परिवार के लोग भी मारे गए। पूरे परिसर का मलबे में तब्दील होना यह दिखाता है कि अमेरिका और इजराइल किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहते थे।

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Israel Iran War news Hindi: शहादत का दर्जा और 'बदले' की आग

खामेनेई की मौत के बाद ईरान में गुस्से और शोक की लहर है। ईरानी सरकार ने इस घटना को एक बड़ा धार्मिक मोड़ दे दिया है। उन्होंने खामेनेई की मौत की तुलना 'कर्बला' में इमाम हुसैन की शहादत से की है, ताकि आम जनता की भावनाओं को अमेरिका के खिलाफ भड़काया जा सके। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह इस 'खून का बदला' जरूर लेगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अब खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और इजराइल के शहरों पर बड़े मिसाइल हमले कर सकता है। धर्म और अस्मिता से जुड़ने की वजह से यह मामला अब सिर्फ दो देशों की जंग नहीं रहा, बल्कि एक बड़े क्षेत्रीय महायुद्ध (World War) की आहट दे रहा है, जो पूरे मध्य-पूर्व को जला सकता है।

खुफिया तालमेल: अमेरिका और इजराइल की सबसे बड़ी कामयाबी

यह ऑपरेशन दुनिया की दो सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसियों, CIA और मोसाद, के बेहतरीन तालमेल का नतीजा है। सालों तक चली निगरानी, पल-पल की जासूसी और फिर एक साथ मिलकर किया गया हमला यह दिखाता है कि ईरान का सुरक्षा घेरा अब पूरी तरह से टूट चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस हमले ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि अगर तकनीक और सटीक इंटेलिजेंस मिल जाएं, तो दुनिया का कोई भी कोना सुरक्षित नहीं है। अमेरिका और इजराइल ने इस मिशन को जिस तरह से गुप्त रखा और फिर अंजाम दिया, उसने ईरान की मिलिट्री इंटेलिजेंस की पोल खोल दी है। इस कामयाबी ने ईरान के दबदबे को खत्म कर उसे रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है।

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