Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Arafi Iran New Leader: खत्म होगा कट्टरपंथ या खामेनेई से भी सख्त शासन? अराफी युग में ईरान का भविष्य कैसा

Alireza Arafi Iran New Leader: ईरान एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है जहां 1989 के बाद पहली बार सत्ता का शीर्ष शून्य हुआ है। अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत ने न केवल ईरान के भीतर बल्कि पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। इस बीच, अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी का 'अंतरिम नेतृत्व परिषद' के जरिए सत्ता में आना एक बड़े बदलाव का संकेत है। सवाल यह है कि क्या यह बदलाव केवल कागजी होगा या ईरान की सड़कों पर आजादी की नई किरण दिखाई देगी?

अराफी, जो खुद कट्टरपंथी मदरसों के ढांचे से निकले हैं, उनके सामने एक तरफ युद्ध की चुनौती है और दूसरी तरफ दशकों से दबी हुई जनता की आकांक्षाएं। क्या अराफी युग पुराने जख्मों को भरेगा या कट्टरवाद की बेड़ियां और मजबूत होंगी, यह समझना जरूरी है।

Alireza Arafi Iran New Leader

Alireza Arafi: व्यवस्था की रक्षा या नया बदलाव?

अलीरेजा अराफी (Iran interim Supreme Leader) को व्यवस्था का वफादार माना जाता है। अंतरिम परिषद में उनकी भूमिका का मुख्य उद्देश्य नए 'सुप्रीम लीडर' के चुने जाने तक सत्ता को बिखरने से बचाना है। चूंकि वे धार्मिक और प्रशासनिक ढांचे के गहरे जानकार हैं, इसलिए उम्मीद यही है कि वे फिलहाल पुरानी नीतियों को ही आगे बढ़ाएंगे। उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती ईरान की 'इस्लामिक क्रांति' के सिद्धांतों को इस संकट काल में जीवित रखना होगा, जो फिलहाल काफी मुश्किल नजर आता है।

ये भी पढे़ं: Khamenei Death: खामेनेई की मौत और चीन का 33 लाख करोड़ स्वाहा! ट्रंप के कैसे जिनपिंग को सड़क पर ला दिया?

कट्टरवाद का शिकंजा: क्या मिलेगी आजादी?

ईरान में हिजाब और सामाजिक पाबंदियों को लेकर जनता में भारी गुस्सा रहा है। अराफी एक सख्त 'ज्यूरिस्ट' (विधि विशेषज्ञ) हैं, जिनका पूरा जीवन धार्मिक कट्टरता के बीच बीता है। ऐसे में यह उम्मीद करना कि वे रातों-रात सामाजिक नियमों में ढील देंगे, थोड़ा मुश्किल लगता है। संक्रमण काल के दौरान सुरक्षा एजेंसियां और भी सतर्क और सख्त हो सकती हैं, जिससे आजादी की मांग करने वालों पर शिकंजा और भी ज्यादा कसने की आशंका है।

युद्ध और कूटनीति: अराफी की सबसे बड़ी परीक्षा

अमेरिका और इजराइल के सीधे हमलों के बाद ईरान रक्षात्मक मुद्रा में है। खामेनेई की मौत के बाद अराफी और अंतरिम परिषद को यह तय करना होगा कि वे बदले की आग में जलेंगे या देश को बचाने के लिए कूटनीति का सहारा लेंगे। यदि अराफी ने युद्ध का रास्ता चुना, तो कट्टरवाद और बढ़ेगा। लेकिन अगर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय दबाव में झुककर कोई समझौता किया, तो ईरान की कट्टरपंथी छवि में बड़ा बदलाव आ सकता है।

ये भी पढे़ं: पाकिस्तान में ये क्या हो रहा! खामेनेई की मौत के बाद गुस्साई भीड़ ने संयुक्त राष्ट्र ऑफिस फूंका, दूतावास भी जला

Iran Protests: जनता का आक्रोश और आंतरिक विद्रोह

खामेनेई के जाने के बाद ईरान की जनता यह देख रही है कि क्या सत्ता कमजोर हुई है। अगर प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरते हैं, तो अराफी के पास दो ही रास्ते होंगे: संवाद या दमन। अतीत को देखते हुए दमन की आशंका ज्यादा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय नजरें और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख अराफी के हाथ बांध सकता है। जनता के लिए यह समय अनिश्चितता और उम्मीद, दोनों का मिश्रण है।

ये भी पढे़ं: Ayatollah Alireza Arafi Iran: खामेनेई युग का अंत! कौन हैं अयातुल्लाह अराफी जो बने ईरान के अंतरिम सुप्रीम लीडर

Khamenei Death: पहले जैसा या कुछ नया?

ईरान अब 'अराफी युग' के जरिए एक पुल पार कर रहा है। यह काल तय करेगा कि अगला सुप्रीम लीडर कौन होगा। यदि अराफी इस दौरान अपनी पकड़ मजबूत करते हैं, तो ईरान का भविष्य पहले जैसा ही कट्टरपंथी रह सकता है। लेकिन अगर बाहरी हमलों और आंतरिक दबाव ने व्यवस्था को हिला दिया, तो शायद ईरान को वह आजादी मिल जाए जिसकी मांग लंबे समय से हो रही है। फिलहाल, सब कुछ भविष्य के गर्भ में है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+