Building Collapse: 'मलबे से आ रही थीं चीखें, अभी भी फंसे होंगे 100 लोग', चश्मदीदों ने बताया खौफनाक मंजर का सच
Delhi Building Collapse Witness: दिल्ली का सैदुलाजाब इलाका शनिवार (30 मई) की रात दहल उठा। साकेत मेट्रो स्टेशन के पास स्थित एक चार मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इस हादसे ने न सिर्फ पूरे इलाके में दहशत फैला दी, बल्कि एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां भी छीन लीं। इस दर्दनाक हादसे में 26 साल के एक युवक की जान चली गई, जबकि 8 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मलबे के नीचे अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है, जिसके चलते राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। चश्मदीदों ने अब खौफनाक मंजर बताया है।
हादसे के वक्त जो लोग घटना स्थल के पास मौजूद थे, वे उस मंजर के खौफ से बाहर नहीं निकल पाए हैं। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, शनिवार रात अचानक एक जोरदार धमाके जैसी आवाज हुई और देखते ही देखते पूरी इमारत जमींदोज हो गई। चारों तरफ सिर्फ चीख-पुकार थी: एक स्थानीय निवासी ने बताया कि इमारत गिरते ही चारों तरफ धूल का एक बहुत बड़ा गुबार छा गया था। धूल थोड़ी कम हुई तो सिर्फ मलबे के नीचे से लोगों के रोने और चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं।

इस हादसे की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि गिरती हुई इमारत के मलबे की चपेट में आने से बगल वाले मकान का एक हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया।स जिस बिल्डिंग में यह हादसा हुआ, वह सैदुलाजाब के वेस्टर्न मार्ग पर थी। इस इमारत में कोचिंग इंस्टीट्यूट, कैफे, ऑफिस और छात्रों के रहने के लिए पेइंग गेस्ट (PG) के साथ-साथ एक मेस भी चल रही थी। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त तीसरी मंजिल पर निर्माण कार्य चल रहा था, जो इस हादसे की एक बड़ी वजह हो सकता है।
अपनों की तलाश में भटकते लोग और प्रशासन पर फूटा गुस्सा
घटना के बाद से ही मौके पर अफरा-तफरी और डर का माहौल है। कई लोग रात से ही मलबे के पास इस उम्मीद में खड़े हैं कि उनके दोस्तों या रिश्तेदारों की कोई खबर मिल सके। इस बीच, अपनों को खोने के डर से परेशान परिजनों का गुस्सा दिल्ली पुलिस और प्रशासन पर भी फूट रहा है।
एक बेबस महिला, जो मलबे में दबी अपनी मां की तलाश में तड़प रही थी, उसने रोते हुए प्रशासनिक ढिलाई पर सवाल उठाए। महिला का कहना था, "हम पुलिस वालों से लगातार पूछ रहे हैं कि हमारी मां कहां हैं, लेकिन उनके पास कोई जवाब नहीं है। पुलिस से बेहतर तो यहां के स्थानीय लोग काम कर रहे हैं, जिन्होंने अपनी जान पर खेलकर तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस ने तो सिर्फ दो लोगों को बचाया है। जब नेता आते हैं, तभी काम तेजी से होता है। इस बिल्डिंग में खतरे के बीच कंस्ट्रक्शन हो रहा था, हमने शिकायत भी की थी, लेकिन किसी ने नहीं सुना। अब मुझे मेरी मां से भी मिलने नहीं दिया जा रहा है।"
इसी तरह 23 साल के छात्र गौरव कुमार ने बताया कि उसका दोस्त इसी मेस में खाना खाने जाता था। रात 8 बजे से ही उसका फोन लगातार जा रहा है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा। गौरव को डर है कि कहीं उसका दोस्त भी इस मलबे के नीचे न दबा हो।
100 से 150 लोगों के दबे होने की आशंका? जानिए क्या है हकीकत
यह इलाका छात्रों और कामकाजी लोगों का बड़ा हब है, इसलिए यहां चौबीसों घंटे चहल-पहल रहती है। स्थानीय लोगों के दावों ने इस हादसे की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। स्थानीय निवासी रवींद्र सिंह के अनुसार, इस 4 से 5 साल पुरानी नई बिल्डिंग में कई कॉर्पोरेट ऑफिस और कोचिंग सेंटर चल रहे थे। शनिवार की शाम होने की वजह से मुमकिन है कि इमारत के अंदर 100 से 150 लोग मौजूद रहे हों। हालांकि, प्रशासन ने अभी तक इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन स्थानीय लोग बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका जता रहे हैं।
आधी रात को चला मेगा रेस्क्यू ऑपरेशन: अब तक क्या हुआ?
हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली के तमाम राहत दल तुरंत मौके पर पहुंच गए। पूरी रात चले इस सर्च ऑपरेशन में कई एजेंसियों ने मिलकर काम किया।
संयुक्त रेस्क्यू टीम: नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF), दिल्ली फायर सर्विसेज (DFS), दिल्ली पुलिस, दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA), एमसीडी (MCD) और कैट्स एम्बुलेंस की टीमें रात भर मलबा हटाने में जुटी रहीं।
9 लोगों को निकाला बाहर: रविवार तड़के करीब 3:45 बजे तक मलबे से 9 लोगों को बाहर निकाला जा चुका था।
एक की मौत, 8 घायल: बचाए गए लोगों में से 8 को तुरंत एम्स (AIIMS) ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। वहीं, रवि नाम के एक 26 वर्षीय युवक को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
दिल्ली के मुख्यमंत्री का बयान: क्या बोले जिम्मेदार अधिकारी?
इस दर्दनाक हादसे पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गहरा दुख जताया है और साफ किया है कि सरकार इस स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों की मदद के लिए और मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। सभी संबंधित विभाग आपस में तालमेल बिठाकर काम कर रहे हैं और हमारी सबसे पहली प्राथमिकता हर एक नागरिक की जान बचाना है।
दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस का कहना है कि जब तक मलबे के नीचे से आखिरी शख्स को ढूंढ नहीं लिया जाता, तब तक यह सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा। हालांकि, बिल्डिंग गिरने के असली कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल पाएगा।














Click it and Unblock the Notifications