पेट्रोल-डीजल और विमान ईंधन हो जाएंगे सस्ते, सरकार ने क्यों घटाया निर्यात शुल्क? आपके शहर में कितना होगा असर?
Export Duty on Petrol-Diesel Reduced: भारत सरकार ने पेट्रोलियम क्षेत्र से जुड़ा एक अहम फैसला लेते हुए पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कटौती कर दी है। नई दरें 1 जून 2026 से लागू होंगी और अगले 15 दिनों तक प्रभावी रहेंगी। सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में पिछले कुछ हफ्तों के मुकाबले स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित नजर आ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शुल्क में कमी से भारतीय रिफाइनरी कंपनियों को निर्यात के बेहतर अवसर मिल सकते हैं, जबकि सरकार घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता पर भी नजर बनाए रखेगी। केंद्र सरकार हर 15 दिन में पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाले निर्यात शुल्क की समीक्षा करती है और वैश्विक कीमतों के आधार पर नई दरें तय करती है। ताजा समीक्षा में सरकार ने निर्यात को कुछ राहत देने का फैसला लिया है।

1 जून से लागू होंगी नई दरें
सरकारी अधिसूचना के अनुसार पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला शुल्क घटाकर 1.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। डीजल पर यह शुल्क अब 13.5 रुपये प्रति लीटर होगा। वहीं विमान ईंधन यानी एटीएफ के निर्यात पर 9.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क लागू रहेगा।
नई दरें 1 जून से प्रभावी होंगी और अगले पखवाड़े तक लागू रहेंगी। इसके बाद सरकार बाजार की स्थिति का दोबारा आकलन करेगी।
आखिर क्यों घटाया गया निर्यात शुल्क?
सरकार का यह फैसला केवल अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे घरेलू जरूरतों और निर्यात कारोबार के बीच संतुलन बनाने की रणनीति भी है।
सरकार ने शुल्क में कटौती इसलिए की है ताकि देश में पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और साथ ही भारतीय रिफाइनरी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिलने वाले बेहतर अवसरों का लाभ उठा सकें। जब वैश्विक बाजार में ईंधन की मांग और कीमतें अनुकूल होती हैं, तब निर्यात से कंपनियों की कमाई बढ़ सकती है। सरकार चाहती है कि कंपनियां इस अवसर का फायदा उठाएं, लेकिन साथ ही घरेलू बाजार में ईंधन की कमी भी न होने पाए।
यही वजह है कि सरकार हर 15 दिन में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू जरूरतों की समीक्षा कर शुल्क में बदलाव करती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य निर्यात को पूरी तरह रोकना नहीं, बल्कि जरूरत के अनुसार नियंत्रित करना है।
मार्च में क्यों लगाई गई थी यह व्यवस्था?
पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) के रूप में शुल्क लगाने की व्यवस्था 27 मार्च 2026 से शुरू की गई थी।
उस समय पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई थी। तेल की आपूर्ति और कीमतों को लेकर चिंताएं सामने आ रही थीं। ऐसे हालात में सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाया था कि देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और कंपनियां जरूरत से ज्यादा निर्यात न करें।
पिछली समीक्षा में क्या हुआ था?
16 मई 2026 को हुई पिछली समीक्षा में सरकार ने पेट्रोल पर निर्यात शुल्क बढ़ाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया था। वहीं डीजल पर शुल्क 16.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 16 रुपये प्रति लीटर तय किया गया था। अब ताजा समीक्षा में तीनों उत्पादों पर शुल्क कम कर दिया गया है। पेट्रोल पर शुल्क आधा कर दिया गया है, जबकि डीजल और एटीएफ पर भी उल्लेखनीय राहत दी गई है।
किन शुल्कों के तहत वसूली होती है राशि?
पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाला यह शुल्क विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) व्यवस्था का हिस्सा है। हालांकि नए ढांचे में पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर केवल विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू रहेगा।
नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल पर 1.5 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 13.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 9.5 रुपये प्रति लीटर का SAED लगाया जाएगा।
क्या पेट्रोल-डीजल के दाम घटेंगे?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव केवल निर्यात किए जाने वाले ईंधन पर लागू है। देश के भीतर बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले मौजूदा उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस कारण आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर इस फैसले का तत्काल कोई असर पड़ने की संभावना नहीं है। घरेलू ईंधन कीमतें पहले की तरह ही बनी रहेंगी।
जून के मध्य में फिर होगी समीक्षा
सरकार का पखवाड़ा समीक्षा तंत्र अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर काम करता है। यदि आने वाले दिनों में कच्चे तेल या रिफाइंड फ्यूल की वैश्विक कीमतों में बड़ा बदलाव होता है तो निर्यात शुल्क में फिर संशोधन किया जा सकता है। अब पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर लागू नई दरों की अगली समीक्षा जून के मध्य में होने की उम्मीद है। उस समय वैश्विक बाजार की स्थिति, घरेलू मांग और ईंधन उपलब्धता को देखते हुए अगला फैसला लिया जाएगा।












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