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Khamenei Death: बुरी तरह से फंसा भारत! पाकिस्तान का वास्ता देकर ईरान ने रखी शर्त, क्या करेगी मोदी सरकार?

India Reaction Khamenei Death: नई दिल्ली में ईरानी दूतावास की ओर से जारी प्रेस रिलीज ने सनसनी फैला दी है। ईरान ने अयातुल्ला खामेनेई की मौत को सामान्य नहीं, बल्कि अमेरिका और इजरायल का 'कायराना हमला' करार दिया है। इस गंभीर मोड़ पर ईरान ने भारत से साफ लहजे में उम्मीद की है कि दिल्ली इस 'अपराध' की कड़ी निंदा करे।

खास बात यह है कि ईरान ने इशारों-इशारों में पाकिस्तान का नाम लेकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की है कि अगर पड़ोसी देशों ने साथ नहीं दिया, तो क्षेत्र में अस्थिरता का 'टाइम बम' फट सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें भारत के स्टैंड पर टिकी हैं।

India Reaction Khamenei Death

हमले को बताया 'अमेरिकी-इजरायली साजिश'

ईरानी दूतावास ने सीधे तौर पर अमेरिका और इजराइल को खामेनेई की मौत का जिम्मेदार ठहराया है। प्रेस रिलीज में इसे 'अक्षम्य अपराध' बताते हुए कहा गया है कि इन देशों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ईरान का कहना है कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है। भारत में बैठे कूटनीतिक जानकार इसे ईरान की ओर से 'युद्ध की घोषणा' के बराबर मान रहे हैं, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में भीषण संघर्ष छिड़ने की आशंका पैदा हो गई है।

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India Iran War: भारत पर कड़ा स्टैंड लेने का दबाव

ईरान ने भारत जैसे 'स्वतंत्र और न्यायप्रिय' देशों से अपील की है कि वे इस घटना पर चुप्पी न साधें। ईरान चाहता है कि भारत वैश्विक मंच पर अमेरिका और इजराइल की खुलकर निंदा करे। भारत के लिए यह सबसे बड़ी कूटनीतिक परीक्षा है, क्योंकि एक तरफ हमारे इजराइल और अमेरिका के साथ मजबूत रणनीतिक रिश्ते हैं, तो दूसरी तरफ ईरान के साथ ऐतिहासिक और व्यापारिक संबंध। दिल्ली की एक छोटी सी चूक भारत के वैश्विक हितों को नुकसान पहुंचा सकती है।

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पाकिस्तान का एंगल और दिल्ली की टेंशन

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने संकेत दिए हैं कि अगर भारत ने इस 'आतंक' का विरोध नहीं किया, तो पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देश इस स्थिति का फायदा उठा सकते हैं। पाकिस्तान पहले से ही ईरान के साथ सीमाई इलाकों में सक्रिय है। ईरान का तर्क है कि अगर क्षेत्र का सबसे बड़ा लोकतंत्र (भारत) इस पर चुप रहा, तो इससे कट्टरपंथी ताकतों को बढ़ावा मिलेगा। यह भारत के लिए दोहरी चुनौती है, इजराइल से दोस्ती बचाएं या ईरान के जरिए पाकिस्तान को काबू में रखें।

Khamenei Death US Israel: चाबहार और व्यापारिक हितों पर दांव

भारत ने चाबहार पोर्ट में भारी निवेश किया है, जो अफगानिस्तान और मध्य एशिया का गेटवे है। ईरान की नई सैन्य सत्ता (IRGC) इस प्रोजेक्ट को सौदेबाजी के लिए इस्तेमाल कर सकती है। अगर भारत ने ईरान की मांग के अनुरूप कड़ा रुख नहीं अपनाया, तो भारत का करोड़ों का निवेश और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स अधर में लटक सकते हैं। साथ ही, 14,000 करोड़ का द्विपक्षीय व्यापार रुकने से भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाएगी।

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World News Hindi: क्या होगा भारत का अगला कदम?

प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय इस समय 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में हैं। भारत कभी भी किसी पक्ष के सीधे संघर्ष में नहीं पड़ता, लेकिन ईरान की ओर से दिया गया 'शहीद' का दर्जा और हमले के आरोप मामले को पेचीदा बना रहे हैं। दिल्ली को यह तय करना होगा कि वह मानवीय आधार पर शोक संवेदना व्यक्त करे या ईरान की 'निंदा' वाली मांग को मानकर अमेरिका से पंगा ले। भारत का फैसला ही तय करेगा कि खाड़ी में शांति रहेगी या तबाही।

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