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'फांसी नहीं, गला दबाने से हुई Epstein की मौत', पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर का दावा, दोबारा होगी जांच?

Epstein मामले ने अमेरिका, भारत, ब्रिटेन समेत 10 से भी ज्यादा देशों की राजनीति बुरी तरह हिला दी है। सिर्फ राजनेता ही नहीं बल्कि वकील, अधिकारी से लेकर व्यापारी तक सैंकड़ों लोगों के नाम इसमें आ चुके हैं। साल 2019 में जैफ्री एप्स्टीन ने जेल के अंदर ही तकरीबन तीन फीट की हाइट से फांसी लगा ली थी। लेकिन अब Autopsy करने वाले फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. माइकल बैडेन ने दावा किया कि एप्स्टीन की मौत फांसी से नहीं हुई थी। जिसके बाद इस मामले ने वापस सबका ध्यान खींच लिया है।

आधिकारिक रिपोर्ट क्या कहती है?

अगस्त 2019 में एपस्टीन न्यूयॉर्क की एक फेडेरल जेल में मृत पाए गए थे। अधिकारियों ने उस समय इसे आत्महत्या बताया और कहा कि उन्होंने फांसी लगाई थी। यह मामला तब और गंभीर था क्योंकि एपस्टीन पर नाबालिग लड़कियों की यौन तस्करी जैसे गंभीर आरोप लगे थे। जिसमें कुछ मामलों में उसे सजा हुई थी और कई सारे मुकदमों की सुनवाई अभी बाकी थी। न्यूयॉर्क मेडिकल एग्जामिनर के कार्यालय ने उस समय पोस्टमार्टम के आधार पर मौत को आत्महत्या ही घोषित किया था, जो आज भी माना जाता है।

Epstein

डॉ. माइकल बैडेन का दावा डराने वाला

डॉ. माइकल बैडेन, जो एपस्टीन के परिवार की ओर से पोस्टमार्टम के दौरान एक ऑब्जर्वर के रूप में मौजूद थे, लगातार इस नतीजे पर सवाल उठाते रहे हैं। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा कि उपलब्ध सबूतों और चोटों के पैटर्न को देखकर उन्हें लगता है कि मौत फांसी से नहीं, बल्कि गला घोंटने से हुई हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले में और गहराई से जांच की जरूरत है। पहले भी वे कह चुके हैं कि मौत के सही कारण और तरीके को तय करने के लिए और ज्यादा जानकारी जरूरी है।

ऑटोप्सी रिपोर्ट में क्या मिला था?

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, एपस्टीन की गर्दन में कई फ्रैक्चर पाए गए थे। इनमें हायोइड हड्डी और थायरॉयड कार्टिलेज को नुकसान शामिल था। डॉ. बैडेन का कहना है कि इस तरह की चोटें आत्महत्या के मामलों में आम नहीं होतीं।

उनके मुताबिक, ऐसे फ्रैक्चर आमतौर पर गला घोंटने के मामलों में ज्यादा देखे जाते हैं। यही वजह है कि वे इन चोटों को गंभीर मानते हुए आधिकारिक जांच पर सवाल उठा रहे हैं। एपस्टीन की कानूनी टीम ने भी उस समय मेडिकल रिपोर्ट को लेकर असंतोष जताया था।

जेल में सुरक्षा की बड़ी चूक

हालिया रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि जिस मेट्रोपॉलिटन करेक्शनल सेंटर (MCC) में एपस्टीन को रखा गया था, वहां कई सुरक्षा खामियां थीं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक:
• सेल की नियमित जांच में लापरवाही हुई।
• सेल के अंदर अतिरिक्त सामग्री मिली।
• ड्यूटी पर तैनात गार्डों ने कथित तौर पर झूठे रिकॉर्ड बनाए।

ये सभी बातें इस केस को और ज्यादा रहस्यमय बनाती हैं।

सेलमेट को क्यों हटाया गया?

एपस्टीन की मौत से एक रात पहले उनके सेलमेट को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया था। हैरानी की बात यह है कि उसके बाद कोई नया कैदी उनकी सेल में नहीं रखा गया। साथ ही, जेल में जो नियमित निगरानी प्रक्रिया होती है, उसे भी कथित तौर पर सही तरीके से फॉलो नहीं किया गया। इससे यह सवाल और गहरे हो जाते हैं कि आखिर उस रात जेल प्रशासन क्या कर रहा था।

अब भी अनसुलझे हैं कई सवाल

इतने सवाल और नए दावों के बावजूद, अधिकारियों ने अपने आधिकारिक फैसले में कोई बदलाव नहीं किया है। न्यूयॉर्क के मेडिकल एग्जामिनर आज भी इसे आत्महत्या ही मानता है। लेकिन डॉ. माइकल बैडेन और कई अन्य लोगों का मानना है कि इस केस की निष्पक्ष और विस्तृत जांच दोबारा होनी चाहिए।

दोबारा होगी जांच?

जेफरी एपस्टीन की मौत आज भी एक ऐसा मामला है, जिसमें कई तथ्य सामने हैं, कई सवाल खड़े हैं, लेकिन अंतिम सच्चाई को लेकर बहस अब भी जारी है। लोगों के लिए समझना जरूरी है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत का मामला नहीं, बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा भी है। साथ ही जिन लोगों के नाम एप्स्टीन फाइल्स में आए हैं उसमें सबसे बड़ा नाम अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही हैं। उनके कई फोटो और वीडियो भी सामने आ चुके हैं। वहीं जब एप्स्टीन की मौत हुई तब डोनाल्ड ट्रंप ही अमेरिका के राष्ट्रपति थे। लिहाजा जांच की सुई उनकी ओर भी मुड़ रही है।

इस मामले पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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