कौन थे खामनेई के खास जनरल Hussein Salami? इजरायली हमले में मारे गए,अमेरिका और यूरोपीय देश दशकों से ढूंढ रहे थे
Israel Strikes Iran: पश्चिम एशिया में तनाव एक खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। शुक्रवार तड़के इज़राइल ने ईरान के खिलाफ ऑपरेशन राइजिंग लायन नामक एक बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान की शुरुआत की, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। इस खतरनाक हमले में इज़राइली वायुसेना ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया। लेकिन इस ऑपरेशन का सबसे बड़ा असर ईरान की सैन्य संरचना पर पड़ा क्योंकि स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के शक्तिशाली प्रमुख मेजर जनरल हुसैन सलामी इस हमले में मारे गए हैं। मेहर न्यूज एजेंसी ने भी इसी तरह की पुष्टि करते हुए इस खबर को ईरानी प्रतिष्ठान के लिए एक गहरा झटका बताया है। इस रिपोर्ट में जानते हैं कौन थे हुसैन सलामी? और आखिर क्यों उन्हें अमेरिका, इज़राइल और यूरोपीय देशों ने घोषित किया था एक खतरनाक और वांछित शख्स?
Who was Hussein Salami- कौन थे हुसैन सलामी?
हुसैन सलामी ईरान के सबसे ताकतवर और प्रभावशाली सैन्य अधिकारियों में से एक थे। वे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ईरान की अर्धसैन्य शक्ति के कमांडर-इन-चीफ थे और सीधे तौर पर देश की सर्वोच्च सत्ता के बेहद करीबी माने जाते थे। उनका जन्म वर्ष 1960 में ईरान के इस्फहान प्रांत के गुलपायेगान शहर में हुआ था। वे वर्ष 1980 में ईरान-इराक युद्ध की शुरुआत के साथ ही IRGC में शामिल हुए। शुरुआत में उन्होंने इस्फहान शाखा में सेवा दी और जल्द ही ईरानी कुर्दिस्तान में इराकी सेनाओं के खिलाफ मोर्चा संभाला। युद्ध में उनके प्रदर्शन और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें तेज़ी से ऊंचे पदों तक पहुँचाया। युद्ध समाप्त होने के बाद सलामी ने ईरानी सेना के स्टाफ कॉलेज से डिफेंस मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की और सैन्य संचालन विभाग में अहम ज़िम्मेदारियां संभालनी शुरू कीं। वर्ष 1997 से 2005 तक वे IRGC के संयुक्त स्टाफ में वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे।

परमाणु और मिसाइल नीति के प्रमुख शिल्पकार थे
Hussein Salami ने IRGC एयर फोर्स की कमान संभाली, जहां वे 2006 से 2009 तक प्रमुख के रूप में तैनात रहे। उनकी रणनीतिक समझ और कट्टरपंथी विचारधारा ने उन्हें सत्ता के और करीब ला दिया। 2009 में उन्हें IRGC का डिप्टी कमांडर नियुक्त किया गया, और एक दशक तक इस पद पर रहने के बाद, 21 अप्रैल 2019 को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने उन्हें पदोन्नत कर IRGC का कमांडर-इन-चीफ बनाया। सलामी को न केवल एक सैन्य रणनीतिकार के रूप में जाना जाता था, बल्कि वे ईरान की परमाणु और मिसाइल नीति के प्रमुख शिल्पकार भी माने जाते थे। पश्चिमी देशों में उनकी पहचान एक कट्टर इज़राइल और अमेरिका विरोधी सैन्य चेहरा होने के रूप में रही है।
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सलामी क्यों थे वांछित?
मेजर जनरल हुसैन सलामी इज़राइल और अमेरिका के कट्टर विरोधी माने जाते थे। वे ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों में गहराई से शामिल थे, जिसकी वजह से वे संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और यूरोपीय संघ की निगरानी में थे। दिसंबर 2006 में UNSC ने उन्हें ईरान के मिसाइल प्रोग्राम से जुड़े होने के कारण प्रतिबंधित किया। अक्टूबर 2007 में अमेरिका ने उन्हें Weapons of Mass Destruction फैलाने वालों की सूची में डालकर उनकी संपत्ति जब्त करने के आदेश दिए। 12 अप्रैल 2021 को यूरोपीय संघ ने भी उन्हें मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों में प्रतिबंधित किया।
सितंबर 2023 में फ्रांस में सलामी, कुद्स फोर्स कमांडर इस्माइल कानी और खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब पर महसा अमीनी के समर्थन में प्रदर्शन करने वालों को धमकाने और आतंकवाद को उचित ठहराने के लिए आपराधिक शिकायत दर्ज की गई। 2024 के अप्रैल और अक्टूबर में, जब ईरान ने पहली बार इज़राइल पर सीधा सैन्य हमला करते हुए 300 से अधिक ड्रोन और मिसाइलें छोड़ी थीं, तब सलामी ही IRGC का नेतृत्व कर रहे थे। जनवरी 2024 में वे एक गुप्त मिसाइल ठिकाने का दौरा करते हुए दिखे थे, जहां से इज़राइल पर हमले के लिए नई मिसाइलें बनाई जा रही थीं।
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