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Israel Attack Iran: इजरायली हमले में मारे गए ईरान के ये 5 बड़े अधिकारी क्यों थे खास? कौन करेगा नेतृत्व?

Israel Attack Iran: मिडिल ईस्ट का उपजा तनाव अब युद्ध में बदल चुका है, ये कहने में कोई दो राय अब रह नहीं गई है। इजरायल ने ईरान के सैन्य और न्यूक्लियर ठिकानों पर टारगेटेड एयर स्ट्राइक की है। जिसमें ईरान के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ मेजर जनरल मोहम्मद बाघेरी, आईआरजीसी के कमांडर इन चीफ हुसैन सलामी, आईआरजीसी के एयरोस्पेस फोर्सेस के चीफ आमिर अली हजीजादेह, ईरान न्यूक्लियर प्रोग्राम के चीफ मोहम्मद इस्लामि और डिफेंसिव इनोवेशन एंड रिसर्च के संगठन के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल रेजा मोजाफरीनिया की मौत हो गई है। ईरान को ये अब तक का सबसे बड़ा झटका है, क्योंकि अब उसकी सेना के पास नेतृत्व की भी कमी है।

इजरायल का 'ऑपरेशन राइजिंग लायन'

13 जून को इज़राइल ने ईरान पर हवाई हमला किया, जिसे उसने 'ऑपरेशन राइजिंग लायन' नाम दिया है। इज़राइल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हमला किया, इस हवाई हमले के बाद ईरान की राजधानी तेहरान के उत्तर-पूर्व में एक के बाद एक कई धमाकों की आवाज सुनाई दी। वहीं अमेरिका ने इज़राइल के हमलों से पूरी तरह किनारा कर लिया है। इजरायल से हुए इस हमले के बाद ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है और सभी हवाई अड्डों पर उड़ानें सस्पेंड कर दी हैं।

Israel Attack Iran

फेरीदून अब्बासी की भी मौत

हमले को लेकर टाइम्स ऑफ इज़राइल ने भी जानाकारी दी जिसके मुताबिक , ईरान के सरकारी मीडिया ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कमांडर हुसैन सलामी की मौत की पुष्टि की है। इसके अलावा, ईरान के सैन्य प्रमुख मोहम्मद बाघेरी के अलावा न्यूक्लियर प्रोग्राम के पूर्व प्रमुख फेरीदून अब्बासी और सेना के अन्य शीर्ष अधिकारियों के भी मारे जाने का दावा किया गया है। हमले के बाद तेहरान में इमारतों से धुआं उठता दिखा और आग की लपटें भी देखी गईं। ईरानी लोगों ने भी इस हमले को अपने मोबाइल में भी रिकॉर्ड किया जिसके वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

जरूरत पड़ी तो दोबारा हमला होगा- इजरायल

इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने जानकारी दी है कि उन्होंने ईरान के खिलाफ एक बड़ी सैन्य कार्रवाई की है। IDF ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, "IAF के दर्जनों फाइटर जेट्स ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों और न्यूक्लियर प्रोग्राम से जुड़े ठिकानों पर हमला किया है। यह हमला पहले से तैयारी करके और सटीक तरीके से किया गया है, इसके पीछे का कारण इजरायल ने बताया कि ईरान न्यूक्लियर बम बनाने के करीब था जिससे उसकी संप्रभुता को खतरा था और ईरान का परमाणु शक्ति बनना भी पूरी दुनिया के लिए भी एक बड़ा खतरा होता। लिहाजा इजरायल को अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए यह हमला करना जरूरी था और अगर आगे भी जरूरत पड़ी तो वह ऐसा करेगा।

न्यूक्लियर साइंटिस्ट को भी मारा- नेतन्याहू

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक वीडियो संदेश में कहा, "हमने ईरानी बम बनाने पर काम कर रहे प्रमुख ईरानी न्यूक्लियर साइंटिस्ट को निशाना बनाया है। इजरायली पायलट सक्रिय रूप से ईरान में कई ठिकानों को निशाना बना रहे हैं।" नेतन्याहू ने आगे कहा कि वह राष्ट्रपति ट्रंप को उनके नेतृत्व और ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम का सामना करने के लिए धन्यवाद देना चाहते हैं। ईरान 3 साल के भीतर 10,000 बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन करने की तैयारी कर रहा है। नेतन्याहू ने चेतावनी दी कि कल्पना कीजिए कि न्यू जर्सी के आकार के देश पर 10,000 टन विस्फोटक गिराए जाएं, यह एक असहनीय खतरा है और इसे रोका जाना चाहिए, इसलिए हमने ऐसा किया।

दुश्मन को सजा देंगे- खामेनेई

हमले के बाद ईरानी सैन्य बलों के प्रवक्ता जनरल शेकरची का बयान सामने आया है. उन्होंने इज़रायल और अमेरिका को इस हमले की बहुत भारी कीमत चुकाने की चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि ईरान यहूदी शासन के खिलाफ ज़ोरदार जवाब देगा. शेकरची ने आरोप लगाया कि इज़रायल ने ईरान में रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया है. वहीं, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने भी हमले की निंदा करते हुए कहा कि आज सुबह हमारे में एक बड़ा हमला हुआ. यहूदी शासन ने हमारे आम नागरिक पर हमला किया है. ये बताता है कि उनके इरादे बुरे थे. इसके साथ ही खामेनेई ने कहा कि हम इसका बदला सख्ती के साथ लेंगे. ईरान की सेना इस हमले को नजरअंदाज नहीं करेगी और दुश्मन को सजा देगी।

अमेरिका ने झाड़ा पल्ला

इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बयान सामने आया है। रुबियो ने कहा, "आज रात इजरायल ने ईरान के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की है। हम ईरान के खिलाफ हमलों में शामिल नहीं हैं। मतलब साफ है कि अमेरिका ने इजरायल के इस हमले से पल्ला झाड़ लिया है। रूबियो ने आगे कहा कि हमारी प्राथमिकता अमेरिकी सेना की सुरक्षा करना है। इजरायल ने हमें बताया कि उनकी यह कार्रवाई आत्मरक्षा के लिए जरूरी थी।" अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, बढ़ते हालातों के जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कैबिनेट स्तर की बैठक बुला रहे हैं।

होने वाली थी ईरान-अमेरिका की बैठक

गौरतलब है कि ये हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी और ईरानी अधिकारी रविवार को ओमान में तेहरान के बढ़ते यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पर छठे दौर की वार्ता करने वाले थे। पिछले 5 दौर की बैठक में ईरान को यूरेनियम से न्यूक्लियर बम बनाने की मनाही थी और ईरान लगातार इसकी परमीशन लेने की कोशिश कर रहा था।

ईरान तैयार, इजरायल अलर्ट, अमेरिका सब देख रहा

इधर इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमलों के दौरान अपनी रक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाई है। ईरान ने अपने डिफेंस सिस्टम को अलर्ट पर रखा है। अमेरिका भी मामले पर दोनों पक्षों से बातचीत कर मामले को सुलझाने में लगा है, लेकिन अब बात हाथ से निकलती हुई दिखाई दे रही है। भारत पर इस हमले का जो असर होगा वो ये कि आने वाले दिनों में भारत में पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम बढ़ सकते हैं।

इस घटना पर आपकी क्या राय है हमें कॉमेंट जरूर बताएं।

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