Israel-Iran War: होर्मुज के बाद अब लाल सागर बंद करने की तैयारी, ईरान के खतरनाक प्लान लीक, भारत पर क्या असर?
Israel Iran War Update: मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ता तनाव अब केवल दो देशों की जंग नहीं रहा, बल्कि एक वैश्विक आर्थिक खतरे में बदल गया है। ईरान और इजराइल के बीच जारी तनातनी में अब यमन के हूती विद्रोहियों ने भी सीधे एंट्री मार ली है। इजराइल पर मिसाइल दागकर हूतियों ने साफ कर दिया है कि वे 'एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस' का सक्रिय हिस्सा हैं।
अगर हूती विद्रोही लाल सागर (Red Sea) के एंट्री गेट 'बाब अल-मंदेब' को पूरी तरह बंद कर देते हैं, तो दुनिया के व्यापार का एक बड़ा हिस्सा ठप हो जाएगा। भारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि हमारा बड़ा व्यापार इसी रास्ते पर टिका है।

Red Sea Crisis: शिपिंग रूट बंद होने से बढ़ेगी महंगाई
लाल सागर का रास्ता भारत को यूरोप और अमेरिका से जोड़ता है। अगर हूती विद्रोही इस रास्ते को रोकते हैं, तो भारतीय जहाजों को अफ्रीका के नीचे से (केप ऑफ गुड होप) होकर लंबा चक्कर काटकर जाना पड़ेगा। इससे न केवल समय ज्यादा लगेगा, बल्कि ईंधन का खर्च और जहाजों का बीमा (Insurance) भी महंगा हो जाएगा। नतीजा यह होगा कि आयात होने वाली चीजों के दाम बढ़ेंगे और भारत में महंगाई का दबाव महसूस होगा।
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Houthi Rebels Yemen: तेल और गैस की सप्लाई पर संकट
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल और नेचुरल गैस विदेशों से मंगवाता है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान का प्रभाव है और बाब अल-मंदेब पर हूतियों का खतरा। अगर ये दोनों समुद्री रास्ते बाधित होते हैं, तो भारत के लिए तेल की सप्लाई चेन टूट सकती है। ऊर्जा संकट पैदा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
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भारतीय एक्सपोर्टर्स की बढ़ेगी मुसीबत
भारत से जो सामान जैसे अनाज, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और दवाइयां यूरोप या खाड़ी देशों में जाती हैं, उनके लिए यह रास्ता लाइफलाइन है। रास्ता बंद होने या जोखिम बढ़ने से भारतीय सामान अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगा हो जाएगा। इससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को दूसरे देशों के मुकाबले कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा और उनके ऑर्डर्स कम हो सकते हैं। छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) के लिए यह स्थिति सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण होगी।
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Middle East Conflict: सुरक्षा और कूटनीति की अग्निपरीक्षा
हिंद महासागर के पास बढ़ती इस हलचल ने भारत की समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) के लिए चुनौती पेश कर दी है। भारतीय नौसेना को अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए अरब सागर में अधिक निगरानी और संसाधन तैनात करने पड़ रहे हैं। साथ ही, भारत को ईरान और इजराइल दोनों के साथ अपने अच्छे रिश्तों को संभालते हुए एक बैलेंस बनाना होगा, ताकि देश के रणनीतिक और आर्थिक हित सुरक्षित रह सकें।












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