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Threat To Donald Trump: 'ट्रंप का सिर काटो और ₹200 करोड़ ले जाओ’, App से जुटाया पैसा, पाकिस्तान भी शामिल!

Threat To Donald Trump: अमेरिका ईरान के बीच चल रही जंग के बीच से एक ऐसी खबर आई है जिसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कान खड़े कर दिए। ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में मोबाइल यूज़र्स को भेजे गए मैसेज में "ट्रंप की हत्या के लिए इनाम" वाले एक अंतरराष्ट्रीय अभियान के मैसेज आए। यह जानकारी Iran International ने स्क्रीनशॉट के हवाले से दी है।

कौन देगा ट्रंप को मारने पर इनाम?

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जो भी ट्रंप का कत्ल करेगा उसे इनाम देने के लिए बड़ी रकम क्राउडफंड यानी जनता से चंदा इकठ्ठा करके जुटाई जा रही है। यानी कोई एक शख्स नहीं है जो इनाम दे। साल 2024 में भी ईरान पर आरोप लगा था कि उसने ट्रंप को मारने के लिए कई "किल टीमें" भेजीं, लेकिन वे सफल नहीं हो सकीं। हालांकि इनके भेजने के कोई खास सबूत नहीं मिले।

Threat To Donald Trump

कत्ल के मैसेज के लिए एप पर जानकारी

ईरान में लोगों को "किल ट्रंप" मैसेज वाले SMS भेजे जा रहे हैं। इन मैसेज में लोगों से एक वेबसाइट पर जाकर समर्थन दर्ज करने और SMS के जरिए अपनी भागीदारी कन्फर्म करने को कहा जाता है। हैरानी की बात ये है कि इस मिशन की जानकारी ईरान के घरेलू ऐप Rubika पर भी दी जा रही है।

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हजारों समर्थक, करोड़ों डॉलर का वादा

तेहरान स्थित Didban Iran के मुताबिक, इस अभियान को करीब 2,90,000 लोगों का समर्थन मिल चुका है, यानि इतने लोग चंदा दे चुके हैं। साथ ही, अभियान में घोषित इनाम की राशि 2.5 करोड़ डॉलर (लगभग ₹208-₹235 करोड़) तक पहुंच गई है। हालांकि वेबसाइट का दावा है कि यह रकम अभी इकट्ठी नहीं हुई, बल्कि सिर्फ वादा की गई है। अगर कोई आज-कल में ही ट्रंप का काम तमाम कर देता है तो इसकी जानकारी भी एप पर नहीं है।

'जिहाद फतवे' के बाद शुरू हुआ अभियान

वेबसाइट के मुताबिक, यह अभियान ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर Ali Khamenei से जुड़े "जिहाद फतवे" के बाद शुरू हुआ था। इसका मकसद ट्रंप की हत्या करने वाले को इनाम देना बताया गया है। मतलब ईरान पर हमला होने के पहले से ट्रंप की सुपारी के लिए चंदा जोड़ा जा रहा है।

सोशल मीडिया पर भी 'किल ट्रंप' कैंपेन

Rubika पर "किल ट्रंप" नाम से चैनल चलाया गया, जिसमें ट्रंप की तस्वीर पर लेजर डॉट के साथ निशाना दिखाया गया था। इस चैनल के 2.3 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर थे। जानकारी के मुताबिक, एक और APP बले पर भी करीब 2,000 सदस्यों वाला चैनल इस अभियान को सपोर्ट कर रहा था। उसकी तरफ से मैसेज भी फॉरवर्ड हो रहे हैं और चंदा भी जुटाया जा रहा है। इस अभियान से जुड़ी वेबसाइट 21 फरवरी 2026 को रजिस्टर हुई थी। इसके 16 दिन बाद एक और वेबसाइट बनाई गई, जिसका इस्तेमाल इसी कैंपेन के लिए किया गया। वहीं भारत में ये App और वेबसाइट दोनों ब्लॉक हैं। मतलब भारत से इसमें चंदा नहीं दे सकते।

"ट्रंप का सिर लाओ"

The Jerusalem Post की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, एक क्राउडफंडिंग में ट्रंप की हत्या के लिए 4 करोड़ डॉलर का इनाम रखा गया था। यह अभियान "ब्लड कोवेनेंट" नाम के समूह से जुड़ा था। जिसमें ट्रंप का सिर काटकर लाने वाले को इनाम देने की घोषणा की गई थी। अमेरिका के थिंक टैंक MEMRI के मुताबिक, "ब्लड कोवेनेंट" ईरानी शासन के समर्थन से काम करता है। MEMRI ने इसे जिहाद की शुरुआत बताया, जिसमें लोगों से पैसे से लेकर जान देने तक की अपील की गई।

स्थानीय मौलवियों ने भी घोषित किया इनाम

ईरान के पश्चिमी अज़रबैजान प्रांत में एक मौलवी ने ट्रंप की हत्या के लिए 100 अरब तोमान (लगभग ₹9.6 करोड़) का इनाम घोषित किया। प्रांतीय अधिकारी मंसूर इमामी ने कहा, "जो ट्रंप का सिर लाएगा, उसे यह इनाम दिया जाएगा।"

ईरानी राष्ट्रपति ने झाड़ा पल्ला

हालांकि ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इन आरोपों से दूरी बनाई। उन्होंने Tucker Carlson को दिए इंटरव्यू में कहा कि ऐसे किसी फतवे की उन्हें जानकारी नहीं है और इसका सरकार से कोई संबंध नहीं है।

अमेरिका में 'किल टीम' साजिशों का खुलासा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2024 में ट्रंप की हत्या की दो साजिशों का भंडाफोड़ हुआ। एक मामले में फरहाद शकेरी नाम के व्यक्ति को ईरान की ओर से किल टीम बनाने का आदेश दिया गया था। New York Post के मुताबिक, शकेरी ने अमेरिका में दो लोगों को हायर किया, जिन्हें बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। अदालत में उसने कबूल किया कि उसे 7 अक्टूबर 2024 को ट्रंप की हत्या की योजना बनाने को कहा गया था।

IRGC की भूमिका और करोड़ों का खर्च

शकेरी ने बताया कि Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) इस मिशन में शामिल था और उसने कहा था कि पैसा कोई मुद्दा नहीं है। इससे पहले भी ट्रंप को निशाना बनाने में भारी रकम खर्च की जा चुकी थी।

पाकिस्तानी नागरिक की साजिश भी बेनकाब

एक और साजिश में पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट का नाम सामने आया। उसे ट्रंप की हत्या के लिए 10 लाख डॉलर (करीब ₹8.99 करोड़) का ऑफर दिया गया था। अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, मर्चेंट अमेरिका में किल टीम भर्ती करने आया था, लेकिन जिन लोगों को उसने हायर किया, वे Federal Bureau of Investigation (FBI) के अंडरकवर एजेंट निकले।

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2020 के बाद से बढ़ा खतरा

2020 में Qasem Soleimani की हत्या के बाद से ईरान पर ट्रंप को निशाना बनाने के आरोप लगातार बढ़ते रहे हैं। माना जाता है कि उसी के बाद से यह दुश्मनी और गहरी हो गई। वहीं अमेरिका में इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। जहां साजिश सिर्फ ऑनलाइन नहीं बल्कि जमीन पर भी करवट ले रही है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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