इजराइल को एक और बड़ा झटका, इस मित्र देश ने फिलिस्तीन को अलग राष्ट्र की दी मान्यता, टेंशन में नेतन्याहू
France recognizes Palestine: गाजा में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और इजराइल की सैन्य कार्रवाई जारी है, जिससे स्थानीय नागरिकों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। इसी बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता मिलने की खबर ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है।
ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसी प्रमुख शक्तियों के बाद फ्रांस ने भी फिलिस्तीन को मान्यता दी, जिससे अंतरराष्ट्रीय समर्थन और बढ़ा है। यह कदम न केवल टू स्टेट सॉल्यूशन को मजबूती देता है, बल्कि इजराइल और फिलिस्तीन के बीच शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

155 देश ने फिलिस्तीन को मान्यता दी
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को घोषणा की कि फ्रांस ने फिलिस्तीन को आधिकारिक रूप से एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दे दी है। इस फैसले के बाद 2025 तक संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से अब तक 155 देश ने फिलिस्तीन को मान्यता दी है। अप्रैल 2025 में यह संख्या 147 थी, लेकिन सितंबर में फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, पुर्तगाल, बेल्जियम, लक्जमबर्ग, माल्टा, मोनाको, एंडोरा, सैन मारीनो और आर्मेनिया जैसी देशों की हालिया घोषणाओं के बाद यह बढ़ी है।
मैक्रों ने क्या कहा?
मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए कहा कि, फिलिस्तीनी राष्ट्र को स्वतंत्र मान्यता देना शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का एक आवश्यक कदम है। उनका कहना था कि इससे इजराइल और फिलिस्तीन के बीच समान अधिकार और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी गाजा की स्थिति को असहनीय बताते हुए टू स्टेट सॉल्यूशन को ही एकमात्र व्यावहारिक समाधान बताया।
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इजराइल ने किया विरोध
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फिलिस्तीन को राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की घोषणा को आतंकवाद को इनाम देने के समान बताया। उनकी सरकार ने वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों का विस्तार तेज कर दिया है और भविष्य में इसे और बढ़ाने की योजना है।
गाजा की स्थिति और वैश्विक प्रतिक्रिया
गाजा में दो साल से जारी जंग और लगातार सैन्य कार्रवाई के कारण भुखमरी और बर्बादी की तस्वीरें सामने आई हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब इजराइल और फिलिस्तीन पर टिकी हुई हैं। यह मान्यता फिलिस्तीन के लिए राजनीतिक मजबूती तो लाएगी, लेकिन अमेरिका के गैर-भागीदारी और वीटो क्षमता के कारण कदम अभी काफी हद तक प्रतीकात्मक ही माना जा रहा है।
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