Iran Vs America War: 'होर्मुज में खुद लड़ो या हमसे तेल खरीदो', नाराज ट्रंप की दुनिया को खुली चेतावनी

Iran Vs America War: डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अब दुनिया का 'अकेला रक्षक' नहीं बना रहेगा। ईरान के साथ जारी तनाव के बीच, उन्होंने अपने मित्र देशों को चेतावनी दी है कि वे अपनी सुरक्षा और ऊर्जा जरूरतों के लिए खुद जिम्मेदारी उठाएं।

ट्रंप की नाराजगी उन देशों से ज्यादा है जो युद्ध के समय पीछे हट गए थे, लेकिन अब सुविधाओं की उम्मीद कर रहे हैं। सरल शब्दों में कहें तो, ट्रंप 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति पर चलते हुए सहयोगियों को आत्मनिर्भर बनने की सलाह दे रहे हैं।

Iran Vs America War

Middle East conflict Hindi: सहयोगियों को दो टूक चेतावनी

ट्रंप ने ब्रिटेन और अन्य साथी देशों को स्पष्ट संदेश दिया है कि अमेरिका हर बार उनकी मदद के लिए आगे नहीं आएगा। उनका कहना है कि जब ईरान के खिलाफ एक्शन लेने की बारी आई, तो कई देश पीछे हट गए थे। अब यदि उन देशों को तेल या सुरक्षा की कमी महसूस हो रही है, तो उन्हें खुद मैदान में उतरना होगा। ट्रंप का मानना है कि दोस्ती सिर्फ फायदों के लिए नहीं होती; मुश्किल वक्त में साथ देना भी जरूरी है।

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Iran War update: ऊर्जा संकट और अमेरिका का विकल्प

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के कारण जेट फ्यूल की सप्लाई बाधित हुई है। इस पर ट्रंप ने एक चतुर बिजनेस मूव चलते हुए कहा कि जिन देशों को तेल चाहिए, वे अमेरिका से खरीद सकते हैं। अमेरिका के पास पर्याप्त तेल भंडार है। उन्होंने देशों को सलाह दी कि वे खाड़ी देशों पर निर्भर रहने के बजाय खुद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जाकर अपना कंट्रोल बनाएं ताकि उनकी सप्लाई सुरक्षित रहे।

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फ्रांस से नाराजगी की वजह

फ्रांस की हरकत पर ट्रंप काफी सख्त नजर आए। युद्ध के दौरान जब इजराइल की मदद के लिए अमेरिकी सैन्य विमान जा रहे थे, तब फ्रांस ने अपना हवाई क्षेत्र (Airspace) इस्तेमाल करने से मना कर दिया। ट्रंप ने इसे 'धोखा' और 'बुरा रवैया' करार दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका इस बात को भूलेगा नहीं और आने वाले समय में फ्रांस को इसके नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं।

युद्ध का भारी नुकसान और नया मोड़

इस जंग में अब तक भारी तबाही हुई है। मिडिल ईस्ट में 3,000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें अमेरिकी सैनिक भी शामिल हैं। ट्रंप का दावा है कि उन्होंने ईरान को काफी कमजोर कर दिया है और सबसे कठिन काम पूरा हो चुका है। अब वे चाहते हैं कि दूसरे देश आगे आएं और कमान संभालें, ताकि अमेरिका अपने संसाधनों और सैनिकों को लंबे समय तक दांव पर न लगाए।

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