इस्लामिक देश ईरान में 'विष्णु मंदिर'? बिग बी ने दिखाईं तस्वीरें, अब किस हाल में है? Video देख भर आएंगी आंखें
Iran Vishnu Mandir: हाल के महीनों में दुनिया की नजर एक बार फिर ईरान पर टिक गई है। खासकर 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद इस्लामिक गणराज्य ईरान को लेकर लोगों की दिलचस्पी अचानक काफी बढ़ गई है। लोग इंटरनेट पर ईरान के इतिहास, उसकी राजनीति, संस्कृति और अमेरिका-इजरायल जैसे उसके लंबे समय से चले आ रहे प्रतिद्वंद्वियों के साथ रिश्तों के बारे में जानकारी खोज रहे हैं। इसी बीच एक ऐसी चीज वायरल हो गई जिसने इस बहस को एक नया एंगल दे दिया।
अमिताभ बच्चन की पोस्ट ने क्यों मचा दी हलचल?
दरअसल बॉलीवुड सुपरस्टार Amitabh Bachchan ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें ईरान के बंदर अब्बास शहर में मौजूद एक प्राचीन हिंदू विष्णु मंदिर दिखाया गया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा और लोगों के बीच सवाल उठने लगे कि आखिर एक इस्लामिक देश में हिंदू मंदिर कैसे मौजूद है।
अमिताभ बच्चन ने अपनी पोस्ट में लिखा, "ईरान के अब्बास बंदर में प्राचीन हिंदू विष्णु मंदिर... 1892 में कजर युग के दौरान बनाया गया... यह शहर में काम करने वाले भारत के हिंदू व्यापारियों के लिए निर्मित किया गया था... गीत... फ़ारसी में।" इस पोस्ट ने भारत और ईरान के पुराने सांस्कृतिक रिश्तों को फिर चर्चा में ला दिया।

आखिर कहां स्थित है यह विष्णु मंदिर?
यह मंदिर Bandar Abbas Vishnu Temple के नाम से जाना जाता है और ईरान के दक्षिणी हिस्से में स्थित बंदर अब्बास शहर में मौजूद है। Bandar Abbas एक बेहद रणनीतिक शहर माना जाता है क्योंकि यह Strait of Hormuz के किनारे बसा हुआ है। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है, जहां से वैश्विक तेल और शिपिंग ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
मंदिर किसने बनवाया था?
दिलचस्प बात यह है कि यह मंदिर किसी राजा या शासक ने नहीं बनवाया था। इसे उन भारतीय हिंदू व्यापारियों ने बनवाया था जो उस समय इस इलाके में व्यापार किया करते थे। ईरानी इतिहासकार और कवि Mohammad Ali Sadid al-Saltaneh के मुताबिक, भारतीय व्यापारियों को साल 1888 में मंदिर निर्माण की अनुमति मिली थी।
चार साल में तैयार हुआ छोटा भारत
मंदिर को बनने में करीब चार साल लगे और इसके बाद यहां रहने वाले हिंदू समुदाय को पूजा का एक स्थायी स्थान मिला। यह सिर्फ पूजा का स्थल नहीं था बल्कि उस दौर में भारतीय समुदाय के मिलने-जुलने और एक-दूसरे की मदद करने की जगह भी था। कई लोग इसे उस समय का छोटा भारत भी मानते हैं, जहां भारतीय व्यापारी और परिवार एक-दूसरे से जुड़े रहते थे।
मंदिर की वास्तुकला क्यों है इतनी खास?
बंदर अब्बास विष्णु मंदिर की वास्तुकला इसे बेहद खास बनाती है। यह मंदिर भारतीय और फ़ारसी वास्तुकला का एक शानदार मिश्रण माना जाता है। मंदिर का सफेद गुंबद, धार्मिक प्रतीक और प्रार्थना स्थल भारतीय मंदिरों की याद दिलाते हैं, लेकिन इन्हें स्थानीय ईरानी स्टाइल के हिसाब से डिजाइन किया गया था।
हिंदू मंदिर में मस्जिद जैसा गुंबद क्यों?
इस मंदिर की सबसे अनोखी बात इसका केंद्रीय गुंबद है। आमतौर पर हिंदू मंदिरों में इस तरह का गुंबद नहीं दिखता, लेकिन यहां यह इस्लामी मस्जिदों की शैली से प्रेरित नजर आता है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर 72 छोटे बुर्ज बने हैं, जिन पर हिंदू आकृतियां उकेरी गई हैं। यह साफ दिखाता है कि उस समय दोनों संस्कृतियों का प्रभाव एक-दूसरे में कितना घुला-मिला हुआ था।
किन चीजों से बना था यह मंदिर?
इस मंदिर को बनाने में स्थानीय सामग्रियों जैसे मूंगा पत्थर, मिट्टी, चूना और मोर्टार का इस्तेमाल किया गया। गुंबद के ऊपर की सजावट ईरानी मीनारों जैसी लगती है, लेकिन इसमें भारतीय डिजाइन की झलक भी दिखाई देती है। छत तक पहुंचने के लिए एक घुमावदार सीढ़ी बनाई गई है, जो ईरानी वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण मानी जाती है।
मंदिर आज किस हालत में है?
मंदिर की बनावट इस तरह की गई थी कि सूरज की रोशनी सीधे गर्भगृह तक पहुंचे। हालांकि आज यह मंदिर पूजा के लिए सक्रिय नहीं है, लेकिन ईरानी सांस्कृतिक विरासत विभाग ने इसे एक ऐतिहासिक स्मारक के तौर पर संरक्षित किया हुआ है। यह भारत और ईरान के गहरे ऐतिहासिक रिश्तों का एक भावनात्मक और दुर्लभ सबूत माना जाता है।
अमिताभ बच्चन की पोस्ट के बाद क्यों बढ़ी लोगों की दिलचस्पी?
इस पोस्ट के वायरल होने के बाद लोगों में यह जिज्ञासा भी बढ़ी कि आखिर ईरान जैसे इस्लामिक देश में हिंदू समुदाय कितना बड़ा है। ईरान की कुल आबादी करीब 90 मिलियन यानी 9 करोड़ मानी जाती है, जिनमें लगभग 99.4 प्रतिशत लोग इस्लाम धर्म को मानते हैं।
ईरान में कौन-कौन से धर्म के लोग रहते हैं?
ईरान में मुस्लिम आबादी के भीतर लगभग 89.46 प्रतिशत शिया और 9.94 प्रतिशत सुन्नी मुसलमान हैं। इसके अलावा हिंदू, ईसाई और पारसी समुदाय भी वहां रहते हैं। यानी धार्मिक रूप से देखें तो ईरान पूरी तरह एकरूप देश नहीं है बल्कि वहां विविधता भी मौजूद है।
ईरान में कितने हिंदू रहते हैं?
Pew Research Center की रिपोर्ट के मुताबिक, 2010 में ईरान में लगभग 20,000 हिंदू रहते थे और 2020 तक भी यह संख्या लगभग समान बनी रही। इनमें ज्यादातर हिंदू मूल रूप से भारत के Gujarat से जुड़े परिवार हैं, जो व्यापार, नौकरी और कामकाज के लिए वहां बसे हुए हैं।
क्या यह ईरान का इकलौता हिंदू मंदिर है?
नहीं, यह ईरान का अकेला हिंदू धार्मिक स्थल नहीं है। ईरान के Sistan and Baluchestan प्रांत की राजधानी Zahedan में एक आर्य समाज मंदिर भी मौजूद है। यह दिखाता है कि भारत और ईरान के रिश्ते सिर्फ राजनीति या व्यापार तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक स्तर पर भी दोनों के बीच गहरा जुड़ाव रहा है।
इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।














Click it and Unblock the Notifications