German Election Results:जर्मनी में दक्षिणपंथी सरकार बनना तय, जानिए भारत के लिए कितना फायदेमंद?
German Election Results: जर्मनी में हुए आम चुनाव में वर्तमान चांसलर ओलाफ स्कोल्ज की पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। ओलाफ स्कोल्ज की पार्टी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (SPD) इस चुनाव में तीसरे स्थान पर पहुंच गई है। वहीं कंजरवेटिव पार्टी (CDS) की इस चुनाव में जीत हुई है।
कंजरवेटिव पार्टी ने कुल 630 सीट में से 208 सीट लाकर सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। वहीं सत्ताधारी ओलाफ स्कोल्ज की पार्टी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (SPD) को महज 120 सीट मिली है। CDS के नेता फ्रेड्रिच मर्ज का अगला चांसलर बनना तय माना जा रहा है।

ओलाफ स्कोल्ज की पार्टी को बड़ा झटका
इस चुनाव में किसी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिली है। कुल 630 सीट वाले संसद में कंजरवेटिव पार्टी को 208 सीट मिली है। वहीं AFD 152 सीटों पर जीत दर्ज कर दूसरे नंबर पर रही है।
वहीं सबसे खराब प्रदर्शन सत्ताधारी ओलाफ स्कोल्ज की पार्टी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (SPD) ने की। पार्टी महज 120 सीट लाकर तीसरे नंबर पर चली गई है। लेकिन वहां पर किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिलने की वजह से सरकार बनाने में वक्त लग सकता है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत और जर्मनी के संबंध पिछसे कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं। भारत के प्रधानमंत्री और जर्मन चांसलर के बीच समय-समय पर मुलाकातें भी होती रहती है। भारत के विदेश मंत्री भी जर्मनी का दौरा करते रहे हैं।
वहीं इस चुनाव के बाद फ्रेड्रिच मर्ज का चांसलर बनना तय माना जा रहा है। फ्रेड्रिच मर्ज के साथ भी भारत का बढ़िया संबंध माना जाता है। फ्रेड्रिच मर्ज जब सत्ता में नहीं भी थे उस वक्त भी जब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर जर्मनी के दौरे पर जाते थे तो फ्रेड्रिच मर्ज से मुलाकात करते थे।
दोनों देशों के बीच हजारों-करोड़ों का व्यापार
फ्रेड्रिच मर्ज का दक्षिण पंथ की ओर झुकाव माना जाता है यही वजह से कि भारत के मौजूदा सरकार के साथ तालमेल बढ़िया रह सकता है। भारत के साथ जर्मनी का व्यापार लगातार बढ़ता ही जा रहा है। दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 26,067 करोड़ रुपए का है। वहीं दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में समझौता है। ऐसे में माना जा रहा है कि जर्मनी की नई सरकार से भारत को फायदा मिल सकता है।
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रूस के खिलाफ हैं फ्रेड्रिच मर्ज
फ्रेड्रिच मर्ज अमेरिका और यूरोप के साथ मजबूत संबंधों के समर्थन में हैं । वहीं वे रूस के खिलाफ यूक्रेन को मदद देने के पक्ष में आवाज उठाते रहे हैं। आर्थिक नीति के मामले में वह अभी अस्पष्ट हैं, लेकिन उन्होंने सैन्य खर्च बढ़ाने के लिए कर्ज सीमा में सुधार की बात की है। वहीं यदि फ्रेड्रिच मर्ज जर्मन चांसलर बनते हैं, तो वे जर्मनी के पहले नेता होंगे जिनके बच्चे हैं। 25 वर्षों में ऐसा पहली बार होगा।












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