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1,500 साल पहले हुए सूर्य ग्रहण का रिकॉर्ड मिला, पृथ्वी की स्पीड में बदलाव की झलक, इन रहस्यों से उठेगा पर्दा!

नई दिल्ली, 3 अक्टूबर: खगोलविदों ने करीब 1,500 साल पहले हुए सूर्य ग्रहण का रिकॉर्ड हासिल किया है। हालांकि, वैज्ञानिकों की आज की जरूरतों के हिसाब से ये रिकॉर्ड विस्तृत नहीं है, लेकिन इसमें से ऐसी कई जानकारियां हासिल की जा रही हैं, जो पृथ्वी के प्राचीन इतिहास से लेकर भविष्य तक की तस्वीर साफ कर सकती है। इनकी मदद से यह भी पता चल सकता है कि समुद्र अपना रूप कैसे बदल रहा है और बर्फ की मात्रा में किस गति से बदलाव हो रहे हैं। ऐसी उम्मीद है कि आने वाले समय में यह दुर्लभ रिकॉर्ड बहुत ही काम का साबित होने वाला है।

1,500 साल पहले हुए सूर्य ग्रहण का दुर्लभ रिकॉर्ड मिला

1,500 साल पहले हुए सूर्य ग्रहण का दुर्लभ रिकॉर्ड मिला

शोधकर्ताओं को एक ऐसे सूर्य ग्रहण का रिकॉर्ड मिला है, जो 1,500 साल पहले देखा गया था। लेकिन, इससे वैज्ञानिकों को पृथ्वी के घूर्णन की गति का इतिहास और इसमें समय के साथ हुए बदलाव को लेकर काफी कुछ मिला है। इस शोध के लिए वैज्ञानिकों ने चार संभावित समय और स्थानों का रिकॉर्ड खंगाला है। इसमें यूनानी साम्राज्य, रोमन साम्राज्य का पूर्वी हिस्सा, जो कि पश्चिमी रोमन साम्राज्य के ढहने के बाद कायम हुआ था, उसपर भी काफी फोकस किया गया। इससे पहले के सूर्य ग्रहणों का रिकॉर्ड बहुत ही कम मिला है।

पृथ्वी की स्पीड में बदलाव की झलक

पृथ्वी की स्पीड में बदलाव की झलक

ग्रहणों से मिली जानकारी की बदौलत पृथ्वी के घूर्णन की गति में बदलाव के बारे में काफी कुछ पता चल सकता है।इससे जुड़े ऐतिहासिक रिकॉर्ड से इसमें हुए बदलावों को काफी अच्छी तरीके से समझा जा सकता है। हालांकि, प्राचीन लोगों ने इन खगोलीय घटनाओं का रिकॉर्ड उस हिसाब से नहीं रखा है, जिससे की आज के वैज्ञानिकों की अहम जरूरतें पूरी हो सकें। जैसे कि अगर शोधकर्ता यह सोचें कि उन्हें ग्रहण का सटीक समय, स्थान या कितनी देर तक रहा, इसका डेटा मिल जाए तो यह लगभग असंभव है। इसलिए, उन्हें इसमें परेशानिययों का भी सामना करना पड़ता है।

मूल्यवान जानकारियां उपलब्ध-शोधकर्ता

मूल्यवान जानकारियां उपलब्ध-शोधकर्ता

जापान के सुकुबा यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर कोजी मुराता ने एक बयान में कहा, 'हालांकि, उस कालखंड के अधिकतर पहले प्रत्यक्षदर्शियों के बयान खो चुके हैं, जैसे कि उद्धहरण और ट्रांसलेशन आदि। लेकिन, बाद की पीढ़ियों ने जो रिकॉर्ड दर्ज किए हैं, उसमें मूल्यवान जानकारियां उपलब्ध हैं।' उन्होंने बताया, 'विश्वसनीय स्थिति और समय की जानकारी के अलावा हमें ग्रहण की पूरी तस्वीर की आवश्कता थी- मतलब दिन के समय अंधकार की डिग्री, जिससे कि आसमान में तारे उपस्थित हो सकें।'

पृथ्वी पर दिन की लंबाई का अनुमान मिलता है

पृथ्वी पर दिन की लंबाई का अनुमान मिलता है

उदाहरण के लिए इस नए शोध में उस सूर्य ग्रहण को लिया गया है जो 19 जुलाई, 418 में रिकॉर्ड किया गया था। यह इतना पूर्ण सूर्य ग्रहण था कि दिन में ही आसमान में तारे दिखाई पड़ने लगे थे। वह सूर्य ग्रहण रोमन साम्राज्य की तत्कालीन राजधानी कांस्टेंटिनोपल में देखा गया था। अब यह स्थान तुर्की का इस्तांबुल है। अपने शोध के लिए रिसर्च टीम ने पूर्वी भूमध्य सागर में वर्ष 346, 418, 484, 601 और 693 ईसवी में कुल पांच सूर्य ग्रहणों की पहचान की है। इससे उस समय पृथ्वी पर दिन की लंबाई का अनुमान मिलता है।

इन रहस्यों से उठेगा पर्दा!

इन रहस्यों से उठेगा पर्दा!

वैज्ञानिकों का फोकस पांचवीं, छठी और सातवीं शताब्दी के सूर्य ग्रहणों के तुलनात्मक विश्लेषण से प्राचीन इतिहास में वैश्विक घटनाओं का अध्ययन करना है। जैसे कि समुद्र के स्तर में कैसे बदलवा हुआ है और धरती पर बर्फ की मात्रा में क्या अंतर आया है। क्योंकि, जो डेटा मिले हैं, उसकी मदद से पृथ्वी की गति और बाद के वर्षों में उसमें हुए परिवर्तन का अंदाजा मिल सकता है। क्योंकि, ये डेटा शताब्दियों में हुए बदलाव की झलक देते हैं; और भविष्य में होने वाले बदवावों के भी रहस्य सुलझाने का दम रखते हैं। (तस्वीरें- प्रतीकात्मक)

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