Trump Jinping Meet: चीन के ताइवान वाले जाल में फंसने जा रहे Trump! Jinping ने पहले से कर रखी फील्डिंग सेट

Trump Jinping Meet: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीजिंग पहुंचने के बाद उनकी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की हाई-लेवल बैठक होगी, जिस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। कई लोगों को लग रहा था कि इस मीटिंग में ईरान युद्ध या स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ में बढ़ता तनाव सबसे बड़ा मुद्दा होगा, लेकिन असल में ऐसा नहीं है। चीन में चल रही सुगबुगाहटों को ठीक से समझें तो पता चलता है कि ट्रंप जिसे वे मुलाकात समझकर जा रहे हैं उसमें वे उल्टा फंस सकते हैं। क्योंकि यहां ईरान पर नहीं बल्कि ताइवान पर बात होने की संभावना ज्यादा है। ताइवान जिसे चीन अपना हिस्सा बताता है और ताइवान खुद को एक संप्रभु देश।

ताइवान क्यों बना अमेरिका-चीन रिश्तों का सबसे बड़ा विवाद?

ताइवान का मुद्दा कई दशकों से अमेरिका और चीन के बीच सबसे बड़ा तनाव बना हुआ है। अमेरिका लंबे समय से Strategic Ambiguity यानी रणनीतिक अस्पष्टता की नीति अपनाता रहा है। इसका मतलब यह है कि अमेरिका कभी साफ तौर पर यह नहीं बताता कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो वह सैन्य हस्तक्षेप करेगा या नहीं। हालांकि दूसरी तरफ अमेरिका लगातार ताइवान को हथियार देता रहा है ताकि वह चीन के खिलाफ अपनी रक्षा मजबूत कर सके। अब तक अमेरिका ताइवान को 50 अरब डॉलर से ज्यादा के हथियार बेच चुका है।

Trump Jinping Meet

ट्रंप का नया पैकेज बना चीन की टेंशन

पिछले साल अमेरिका ने ताइवान को 11 अरब डॉलर के हथियारों की रिकॉर्ड बिक्री को मंजूरी दी थी। इस फैसले से चीन काफी नाराज हो गया था। अब एक और बड़ा 14 अरब डॉलर का हथियार पैकेज अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की मंजूरी का इंतजार कर रहा है।

Vijay Wife Sangeetha Net Worth: करोड़ों की मालकिन हैं थलापति विजय की पत्नी, पति से पैसे में कम नहीं संगीता
Vijay Wife Sangeetha Net Worth: करोड़ों की मालकिन हैं थलापति विजय की पत्नी, पति से पैसे में कम नहीं संगीता

ट्रंप ने कहा है कि वह इस पैकेज पर सीधे शी जिनपिंग से चर्चा करेंगे। यह बात इसलिए भी बड़ी मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने ताइवान से जुड़े रक्षा समझौते को चीन के साथ बातचीत का हिस्सा नहीं बनाया था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम 1982 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन द्वारा ताइवान को दिए गए सुरक्षा आश्वासनों की भावना के खिलाफ माना जा सकता है।

ताइवान में क्यों बढ़ गई चिंता?

ट्रंप के इन बयानों के बाद ताइवान की राजधानी ताइपे में चिंता बढ़ गई है। वहां के अधिकारियों को डर है कि कहीं अमेरिका चीन के साथ किसी बड़े समझौते के बदले ताइवान के हितों से समझौता न कर ले। चीन चाहता है कि अमेरिका अपनी आधिकारिक भाषा भी बदले। अभी अमेरिका कहता है कि वह "ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन नहीं करता", लेकिन चीन चाहता है कि अमेरिका साफ तौर पर कहे कि वह "ताइवानी स्वतंत्रता का विरोध करता है।" यह बदलाव सुनने में सिर्फ शब्दों का अंतर लग सकता है, लेकिन कूटनीति में ऐसे शब्द बहुत बड़ा असर डालते हैं और ताइवान के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं।

ताइवान ने अमेरिका को बताया सबसे भरोसेमंद साथी

ताइवान के उप विदेश मंत्री चेन मिंग-ची ने हाल ही में अमेरिका के CBS News को एक इंटरव्यू दिया था। जिसमें उन्होंने कहाकि उन्हें अमेरिका द्वारा छोड़े जाने की चिंता नहीं है। उन्होंने अमेरिका को ताइवान का सबसे भरोसीमंद साथी बताया था। चेन ने उस इंटरव्यू में कहा था कि, "हम अमेरिका पर उतना ही भरोसा कर सकते हैं जितना अमेरिका हम पर कर सकता है। क्या हमें अमेरिकी दोस्तीे पर भरोसा है? हां, वे हमारे सबसे भरोसेमंद भागीदार हैं।" चेन का ये बयान बताता है कि ताइवान की अमेरिका पर निर्भरता और भरोसा किस हद तक है।

दुनिया की चिप इंडस्ट्री में ताइवान की कितनी बड़ी भूमिका?

ताइवान सिर्फ राजनीतिक रूप से ही नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी और ग्लोबल सप्लाई चेन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया के लगभग 90% हाई-एंड सेमीकंडक्टर यानी एडवांस चिप्स ताइवान में बनाए जाते हैं। यही चिप्स AI, रक्षा तकनीक, सुपरकंप्यूटर, स्मार्टफोन और आधुनिक हथियारों में इस्तेमाल होते हैं। यही वजह है कि अमेरिका और चीन दोनों ताइवान को रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानते हैं।

West Bengal CM Salary: BJP के सीएम को कितनी मिलेगी सैलरी? अलाउंस में भी मिलेगा मोटा पैसा? सुख-सुविधा अलग से
West Bengal CM Salary: BJP के सीएम को कितनी मिलेगी सैलरी? अलाउंस में भी मिलेगा मोटा पैसा? सुख-सुविधा अलग से

शी जिनपिंग ने क्या कहा?

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पहले ही कह चुके हैं कि ताइवान का चीन में दोबारा मिलना तय है और इसे रोका नहीं जा सकता। चीन ताइवान के लिए One Country, Two Systems मॉडल का प्रस्ताव देता रहा है, जिसका इस्तेमाल वह हांगकांग और मकाऊ में भी करता है। हालांकि जिनपिंग यह भी साफ कर चुके हैं कि जरूरत पड़ने पर चीन ताइवान को बलपूर्वक अपने कंट्रोल में लेने से पीछे नहीं हटेगा। जिसकी झलक हम पिछले कुछ सालों में देख चुके हैं जब चीन वहां के एयर स्पेस और समुद्री सीमा में घुस जाता है।

क्या चीन जल्द हमला करेगा?

हालांकि मार्च में जारी अमेरिकी इंटेलिजेंस रिपोर्ट में कहा गया था कि चीन अगले साल ताइवान पर हमला नहीं करेगा। दरअसल चीन की सेना में हाल ही में बड़ी अंदरूनी कार्रवाई और छंटनी के कारण उसकी तैयारी फिलहाल ठंडी हो गई है। इसलिए 2026 तक के लिए ताइवान को सुरक्षित माना जा रहा है।

ताइवान क्यों नहीं चाहता चीन के साथ मिलना?

ताइवान हमेशा कहता है कि ताइवानी लोग चीन की हुकूमत कभी स्वीकार नहीं करेंगे। ताइवान के लोग लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की आजादी और खुले समाज को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं। उन्हें बड़ी मुश्किल से आजादी मिली है।

Greek Blue-White Houses: क्या है ग्रीस के नीले और सफेद घरों का रहस्य? परंपरा के पीछे छुपा गहरा साइंस समझें
Greek Blue-White Houses: क्या है ग्रीस के नीले और सफेद घरों का रहस्य? परंपरा के पीछे छुपा गहरा साइंस समझें

साथ ही ताइवान यह भी कहता रहा है कि हमने कभी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के शासन के तहत एक भी दिन नहीं बिताया है। फिर हम उनके हिस्से कैसे हो सकते हैं? यही वजह है कि ताइवान का मुद्दा सिर्फ जमीन या राजनीति का नहीं बल्कि पहचान, लोकतंत्र और भविष्य की लड़ाई भी बन चुका है। ऐसे में अब देखना होगा कि ट्रंप चीन जाकर क्या करते हैं और उसका असर क्षेत्रीय शांति पर क्या पड़ता है।

हमारी ये रिपोर्ट आपको कैसी लगी, हमें कमेंट में बताएं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+