BRICS 2026: 'ग्लोबल साउथ की ताकत बनेगा यह संगठन', पहले दिन की बैठक के बाद बोले भारत के विदेश मंत्री जयशंकर
BRICS Foreign Ministers Meeting India: भारत में ब्रिक्स (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों की बड़ी बैठक का आगाज़ हो चुका है, जिसकी अध्यक्षता विदेश मंत्री एस. जयशंकर कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और बदलती वैश्विक स्थितियों के बीच हो रही यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। जयशंकर ने पहले दिन की बैठक के बाद सोशल मीडिया के जरिए जानकारी साझा करते हुए कहा कि ब्रिक्स आज दुनिया में सुधार और बदलाव का सबसे बड़ा मंच बन चुका है।
भारत की अध्यक्षता में इस बार का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स को और अधिक लचीला, आधुनिक और 'ग्लोबल साउथ' की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाना है, ताकि यह आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सके।

BRICS: दुनिया के लिए एक मजबूत विकल्प
एस. जयशंकर ने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स की असली ताकत इसकी स्वतंत्रता और विविधता है। आज दुनिया इस संगठन को बहु-ध्रुवीयता (Multi-polarity) के प्रतीक के रूप में देख रही है। यह न केवल देशों को जोखिम कम करने के विकल्प देता है, बल्कि संप्रभु समानता और आपसी सम्मान की कद्र भी करता है। जयशंकर के मुताबिक, न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) जैसे संस्थानों ने यह साबित कर दिया है कि ब्रिक्स अब वैश्विक संस्थाओं का एक भरोसेमंद और ठोस विकल्प बन चुका है।
ग्लोबल साउथ की आवाज बनेगा भारत
भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स का पूरा ध्यान विकासशील देशों यानी 'ग्लोबल साउथ' की प्राथमिकताओं पर है। जयशंकर ने बताया कि हम सप्लाई चेन को मजबूत करने और बाजारों में विविधता लाने पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा, आपदाओं से पहले चेतावनी देने वाले सिस्टम (Early Warning Systems) और जलवायु परिवर्तनों को झेल सकने वाले बुनियादी ढांचे के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। डिजिटल एकीकरण के जरिए सामाजिक कल्याण को हर व्यक्ति तक पहुंचाना भारत का मुख्य लक्ष्य है।
नवाचार और युवाओं के लिए नए अवसर
ब्रिक्स देशों के बीच इनोवेशन (Innovation) को बढ़ावा देने के लिए भारत ने कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे हैं। जयशंकर ने 'ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क' और 'यूथ स्टार्टअप प्लेटफॉर्म' का जिक्र किया, जो सदस्य देशों के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका देंगे। इसके साथ ही, विज्ञान और अनुसंधान के लिए एक साझा रिपोजिटरी (Repository) तैयार की जा रही है, ताकि शोध और नई तकनीकों का लाभ सभी सदस्य देशों को समान रूप से मिल सके।
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व्यापार और स्वास्थ्य में गहरा सहयोग
व्यापार को आसान बनाने के लिए 'BRICS MSME कनेक्ट पोर्टल' और व्यापारिक लेन-देन के लिए नई प्रणालियों पर चर्चा की गई। जयशंकर ने कहा कि हमारा मकसद छोटे और मध्यम उद्योगों को एक-दूसरे से जोड़ना है। इसके साथ ही खेती और स्वास्थ्य के क्षेत्र में साझेदारी को और गहरा किया जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि ये साझा प्रयास ब्रिक्स को और भी फुर्तीला और आधुनिक बनाएंगे, जिससे आपसी सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।
पर्यावरण और भविष्य की सुरक्षा
विदेश मंत्री ने 'सस्टेनेबिलिटी' यानी टिकाऊ विकास पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए स्वच्छ ऊर्जा और सस्टेनेबल ग्रोथ के रास्तों पर ध्यान देना जरूरी है। भारत का प्रयास है कि ब्रिक्स के सभी देश मिलकर पर्यावरण की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं। जयशंकर ने विश्वास व्यक्त किया कि खुलापन, एकजुटता और सर्वसम्मति के सिद्धांतों के साथ ब्रिक्स आने वाले समय में दुनिया की एक अटूट ताकत बनेगा।
बैठक में कौन-कौन हो रहा शामिल
इस बैठक में ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची, इंडोनेशिया के विदेश मंत्री सुगिओनो, मलेशिया के विदेश मंत्री दातो सेरी उतामा मोहम्मद बिन हाजी हसन, संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मामलों के राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार और दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला सहित अन्य विदेश मंत्री भाग ले रहे हैं।












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