Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Covid-19 के बाद China से फैला एक और वायरस! दर्द भरे हैं इसके लक्षण, चपेट में आए तो क्या होगा?

China: दक्षिणी चीन के गुआंग्डोंग प्रांत के फोशान शहर में एक सीनियर हाई स्कूल से चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां के एक स्कूल में पढ़ने वाले 103 छात्र नोरोवायरस (Norovirus) से संक्रमित पाए गए हैं। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने शनिवार को इसकी पुष्टि की। राहत की बात यह है कि किसी भी छात्र की हालत गंभीर नहीं है और अब तक कोई मौत दर्ज नहीं की गई है।

छात्रों की हालत स्थिर, स्कूल पूरी तरह सैनिटाइज

जिन छात्रों में संक्रमण की पुष्टि हुई है, वे सभी शिनहुई मिडिल स्कूल के छात्र बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, सभी संक्रमित छात्रों की हालत स्थिर है। स्कूल परिसर को पूरी तरह सैनिटाइज कर दिया गया है। इसके साथ ही छात्रों की सेहत पर लगातार नजर रखी जा रही है और उनकी डेली अटेंडेंस भी चेक की जा रही है। फिलहाल इस मामले में महामारी विज्ञान (Epidemiological) सर्वे भी जारी है, ताकि संक्रमण की वजह का पता लगाया जा सके।

China

क्या है नोरोवायरस और इसके लक्षण?

नोरोवायरस एक बेहद आम लेकिन अत्यधिक संक्रामक वायरस है, जो तीव्र गैस्ट्रोएंटेराइटिस का कारण बनता है। इस बीमारी के सबसे सामान्य लक्षणों में उल्टी और दस्त शामिल हैं। यह वायरस खासतौर पर स्कूल, हॉस्टल, क्रूज शिप और भीड़भाड़ वाले इलाकों में तेजी से फैलता है।

गुआंग्डोंग में क्यों बढ़ता है खतरा?

गुआंग्डोंग प्रांतीय रोग नियंत्रण प्राधिकरण के मुताबिक, यह प्रांत अक्टूबर से मार्च के बीच हर साल अपने नोरोवायरस सीजन में प्रवेश करता है। शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, ठंडे महीनों में इस वायरस के फैलने की संभावना ज्यादा होती है, क्योंकि लोग बंद जगहों पर ज्यादा समय बिताते हैं।

दुनियाभर में नोरोवायरस कितना खतरनाक?

वैश्विक स्तर पर नोरोवायरस एक बड़ी स्वास्थ्य चिंता बना हुआ है। अनुमान के मुताबिक, हर साल करीब 68.5 करोड़ लोग इस वायरस से संक्रमित होते हैं। इनमें से 20 करोड़ मामले पांच साल से कम उम्र के बच्चों में पाए जाते हैं। इतना ही नहीं, यह वायरस हर साल करीब 2 लाख लोगों की जान लेता है, जिनमें लगभग 50,000 बच्चे शामिल होते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर कम आय वाले देशों में देखने को मिलता है।

दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी भारी असर

नोरोवायरस सिर्फ सेहत ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर डालता है। इलाज, स्वास्थ्य सेवाओं और कामकाज में नुकसान की वजह से दुनिया को हर साल करीब 60 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

कहां से आया नोरोवायरस का नाम?

नोरोवायरस का पहला ज्ञात प्रकोप 1968 में अमेरिका के ओहियो राज्य के नॉरवॉक शहर के एक स्कूल में सामने आया था। इसी वजह से इसके शुरुआती स्ट्रेन को 'नॉरवॉक वायरस' कहा गया। अक्सर लोग गैस्ट्रोएंटेराइटिस को गलती से 'पेट का फ्लू' या स्टमक फ्लू कह देते हैं, लेकिन यह समझना जरूरी है कि इन्फ्लूएंजा वायरस श्वसन (respiratory) फ्लू का कारण बनता है, न कि गैस्ट्रोएंटेराइटिस का।

अलग-अलग देशों में अलग-अलग मौसम में फैलता है वायरस

नोरोवायरस का प्रकोप भौगोलिक स्थिति पर भी निर्भर करता है। भूमध्य रेखा के उत्तर में स्थित देशों में यह वायरस आमतौर पर नवंबर से अप्रैल के बीच फैलता है। भूमध्य रेखा के दक्षिण में स्थित देशों में इसके मामले अप्रैल से सितंबर के बीच ज्यादा देखने को मिलते हैं। वहीं, भूमध्य रेखा के आसपास के इलाकों में इसका कोई तय सीजन नहीं होता, और यह सालभर फैल सकता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+