PM मोदी ने इटली पीएम Meloni को दी ‘Melody’, कैसे 1 रुपये की टॉफी से बनी करोड़ों की कंपनी?
PM Modi Gifts Meloni Melody Toffee: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के बीच खास बॉन्डिंग एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार चर्चा की वजह बनी है भारत की मशहूर 'Melody' टॉफी। पीएम मोदी ने मेलोनी को 'Melody' टॉफी गिफ्ट की, जिसके बाद सोशल मीडिया पर 'Melodi' ट्रेंड फिर वायरल हो गया। 'Melodi' नाम मोदी और मेलोनी के नामों को जोड़कर बनाया गया है, जिसे लोग उनकी दोस्ती का प्यारा प्रतीक मानते हैं।
इटली पीएम जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर पीएम मोदी का आभार जताया। वीडियो में उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि "Melody हमारी दोस्ती की मिठास को और बढ़ाती है।" इसके बाद यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया और लोगों ने 'Melodi' ट्रेंड को फिर से सोशल मीडिया पर छा दिया।

'मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?' यह सवाल भारतीय बच्चों और वयस्कों के बीच कई दशकों से एक लोकप्रिय पहेली रहा है। पीएम मोदी ने इटली पीएम को ये टॉफी गिफ्ट कर भारतीयों की पुरानी यादें ताजा कर दी है। आइए जानते हैं कैसे 1 रु की टॉफी से बनी करोड़ों की कंपनी और कौन हैं इस कंपनी का मालिक?
कौन बनाता है Melody टॉफी?
दिलचस्प बात यह है कि भारतीय बच्चों और वयस्कों के बीच कई दशकों से पॉपुलर रही 'Melody' टॉफी Parle Products कंपनी बनाती है। पारले सिर्फ एक कंपनी का नाम नहीं, बल्कि भारत के लाखों घरों में स्वाद, विश्वास और बचपन की यादों का प्रतीक रहा है।
Parle कंपनी की कब और किसने की शुरूआत?
इस कंपनी की शुरुआत 1929 में हुई थी और इसे भारत के चौहान परिवार द्वारा संचालित किया जाता है। मोहनलाल दयाल चौहान ने 1928 में 'हाउस ऑफ पारले' ट्रेड ऑर्गनाइजेशन की नींव रखी। 1920 के दशक में चल रहे स्वदेशी आंदोलन से प्रेरित होकर मोहनलाल चौहान ने विदेशी फूड प्रोडक्ट्स के बदले देशी विकल्प देने की पहल की।
मुंबई के विले पार्ले इलाके में एक पुरानी फैक्ट्री खरीदकर मिठाइयों का उत्पादन शुरू किया गया। 1929 में कंपनी ने मिठाइयों का उत्पादन शुरू किया, जिसके बाद 1939 में बिस्कुट भी बनाने लगी। वर्तमान में कंपनी के प्रमुख उद्योगपति Nadia Chauhan और उनका परिवार हैं।
'Melody'टॉफी कब हुई लांच?
पारले प्रोडक्ट्स ने साल 1983 में 'मेलोडी' चॉकलेट टॉफी को बाजार में उतारा था। इसका अनोखा चॉकलेट और कैरेमल का स्वाद इसे खास बनाता है, जिसने इसे दशकों तक लोकप्रिय बनाए रखा है। मेलोडी ने 1980 और 90 के दशक में भारतीयों के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई। आज भी यह लोगों की पसंदीदा टॉफियों में शुमार है, जिसकी लोकप्रियता 'मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?' जैसे मशहूर विज्ञापन ने और बढ़ाई।
Parle G क्यों पड़ा नाम?
साल 1939 में, पारले ने अपना पहला बिस्कुट "पारले मोनाको" लॉन्च किया, जिसने भारतीय बिस्कुट बाजार में एक नई पहचान बनाई और काफी पसंद किया गया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सामग्री की कमी के चलते इसका नाम "पारले ग्लूको बिस्कुट" करना पड़ा। भारत की आजादी के बाद, इसे "पारले जी" के रूप में पुन: ब्रांड किया गया और यह जल्द ही हर भारतीय घर का पसंदीदा बन गया। आज, "पारले जी" गर्व से दुनिया का सबसे अधिक बिकने वाला बिस्कुट है, जो इसकी वैश्विक पहचान का प्रमाण है।
1999 में तीन हिस्सों में बंट गया पारले परिवार का कारोबार
साल 1999 में चौहान परिवार का बिजनेस तीन अलग-अलग समूहों में बंट गया। पहली ब्रांच, विजय चौहान के नेतृत्व में 'पारले प्रोडक्ट्स', बिस्कुट और कन्फेक्शनरी पर केंद्रित है। इसमें 'पारले जी', 'मोनाको', 'हाइड एंड सीक', 'मेलोडी', 'पॉपिन्स', 'किस्मी' और 'क्रैकजैक' जैसे कई लोकप्रिय ब्रांड शामिल हैं।
दूसरी शाखा, 'पारले एग्रो', प्रकाश चौहान की अध्यक्षता में है, जहां उनकी बेटियां शाउना, अलीशा और नादिया मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। 'पारले एग्रो', पेय पदार्थ बाजार में अपनी मजबूत पकड़ रखती है, जिसमें 'फ्रूटी', 'एप्पी फिज' और 'बेली' जैसे सफल ब्रांड शामिल हैं।
तीसरी ब्रांच की कमान शक्ति चौहान के हाथों में थी, जो 'पारले बिसलेरी' के मालिक थे। यह कंपनी पैकेज्ड पानी और शीतल पेय के लिए प्रसिद्ध थी। हाल ही में, शक्ति चौहान ने अपनी 'बिसलेरी' यूनिट को टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स को लगभग 7,000 करोड़ रुपये में बेच दिया। इस बड़े सौदे ने भारतीय कॉर्पोरेट जगत में खासी सुर्खियां बटोरीं थीं।
Melody बनी दोस्ती और बचपन की यादों का प्रतीक
आज 'Melody' सिर्फ एक टॉफी नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की यादों का हिस्सा बन चुकी है। पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की दोस्ती के साथ जुड़ने के बाद यह टॉफी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। सोशल मीडिया पर 'Melodi' ट्रेंड ने यह साबित कर दिया कि कभी-कभी 1 रुपये की छोटी-सी टॉफी भी लोगों के दिलों में बड़ी जगह बना लेती है।














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