Xi Jinping Putin Meeting: अमेरिका को चीन ने दिया धोखा! पुतिन की मौजूदगी में जिंगपिंग ने ट्रंप को दी चुनौती

Xi Jinping Putin Meeting: चीन के राष्ट्रपति शी जिंगपिंग ने बीजिंग में रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ बैठक में रूस-चीन रिश्तों को "अराजक दुनिया में शांति की ताकत" बताया। खास बात ये है कि कुछ ही दिन पहले चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी बेहद भव्य स्वागत किया था।

अब पुतिन के साथ बैठक में अमेरिका पर परोक्ष हमला करके शी जिनपिंग ने साफ संकेत दिया है कि चीन एक साथ दोनों महाशक्तियों के साथ अपनी रणनीति चला रहा है। इससे चीन की विदेश नीति और उसके असली इरादों पर नई बहस शुरू हो गई है।

Xi Jinping Putin Meeting

Trump China Visit: अमेरिका को इशारों में चीन का संदेश

बीजिंग के 'ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल' में हुई बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने बिना अमेरिका का नाम लिए "एकतरफा वर्चस्ववादी सोच" की आलोचना की। चीन अक्सर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल अमेरिकी विदेश नीति पर निशाना साधने के लिए करता है। शी ने कहा कि दुनिया तेजी से अस्थिर हो रही है और ऐसे समय में चीन और रूस को अपना रणनीतिक सहयोग और मजबूत करना चाहिए। इस बयान को वॉशिंगटन के लिए सीधा संदेश माना जा रहा है कि बीजिंग अभी भी मॉस्को के साथ मजबूती से खड़ा है।

रूस-चीन दोस्ती को बताया दुनिया की स्थिरता

बैठक में पुतिन ने कहा कि रूस और चीन के रिश्ते "अभूतपूर्व ऊंचाई" पर पहुंच चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि दोनों देश अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थिरता लाने वाली बड़ी ताकत बन चुके हैं। पुतिन और शी जिनपिंग की अब तक 40 से ज्यादा मुलाकातें हो चुकी हैं, जिससे दोनों नेताओं के करीबी रिश्ते साफ दिखते हैं। पुतिन ने एक चीनी कहावत का भी जिक्र किया जिसका मतलब है कि "करीबी दोस्त से थोड़ी दूरी भी लंबी लगती है।" इससे दोनों नेताओं की राजनीतिक और निजी समझ दिखी।

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ट्रंप और पुतिन के बीच संतुलन साधता चीन

दिलचस्प बात ये है कि पुतिन से पहले शी जिनपिंग ने बीजिंग में डोनाल्ड ट्रंप की भी शानदार मेजबानी की थी। चीन ने दोनों नेताओं को लगभग एक जैसी भव्यता दिखाई। इससे साफ है कि बीजिंग अमेरिका और रूस दोनों के साथ रिश्ते बनाए रखना चाहता है। एक तरफ चीन अमेरिका के साथ व्यापार और वैश्विक राजनीति में संतुलन चाहता है, वहीं दूसरी तरफ रूस के साथ मिलकर पश्चिमी दबाव का मुकाबला भी करना चाहता है। यही वजह है कि चीन की विदेश नीति को अब कई विश्लेषक "दोहरी रणनीति" बता रहे हैं।

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ईरान-इजरायल युद्ध पर भी चीन की चिंता

शी जिनपिंग ने बैठक में ईरान-इजरायल तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि युद्ध जल्द खत्म होना चाहिए क्योंकि इसका असर ऊर्जा सप्लाई, व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लड़ाई दोबारा शुरू होना दुनिया के लिए नुकसानदायक होगा और बातचीत ही सबसे बड़ा रास्ता है। चीन खुद को एक जिम्मेदार वैश्विक ताकत के रूप में दिखाना चाहता है, लेकिन साथ ही वह अमेरिका की नीतियों पर सवाल उठाने का मौका भी नहीं छोड़ रहा।

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