'Twisha की लाश सड़ रही है, जल्दी ले जाओ', दूसरे पोस्टमॉर्टम की मांग पर AIIMS के डॉक्टर ने क्या-क्या कहा?
Twisha Sharma Case News Latest Update: शादी के महज पांच महीने बाद भोपाल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का शिकार हुई 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा का मामला लगातार उलझता जा रहा है। 12 मई को ससुराल में फांसी के फंदे पर लटकी मिली ट्विशा की लाश 13 मई से भोपाल AIIMS की मोर्चरी में पड़ा है। अब भोपाल पुलिस ने परिवार को पत्र लिखकर शव तुरंत ले जाने की अपील की है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि शव सड़ने लगा है और AIIMS में लंबे समय तक संरक्षण की व्यवस्था नहीं है।
परिवार ट्विशा की मौत को हत्या बताते हुए ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न और मारपीट के आरोप लगा रहा है। वे अंतिम संस्कार से इनकार कर रहे हैं और दिल्ली AIIMS में दूसरा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग पर अड़े हुए हैं।

पुलिस ने लेटर में क्या-क्या लिखा?
भोपाल पुलिस की कटारा हिल्स थाना पुलिस ने ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा को पत्र लिखा। इसमें कहा गया है कि शव लंबे समय से मोर्चरी में रखा हुआ है और सड़ने की आशंका बढ़ गई है। AIIMS भोपाल की मोर्चरी में शव को -4 डिग्री सेल्सियस पर रखा गया है, जबकि लंबे समय तक संरक्षण के लिए -80 डिग्री सेल्सियस की सुविधा जरूरी है, जो वहां उपलब्ध नहीं है।
पुलिस ने परिवार से अनुरोध किया है कि वे शव लेने की व्यवस्था करें। पुलिस का कहना है कि पहला पोस्टमॉर्टम 13 मई को हो चुका है और दूसरा पोस्टमॉर्टम कराने पर कोई आपत्ति नहीं है। भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने भी स्पष्ट किया कि कोर्ट अगर दूसरा पोस्टमॉर्टम कराने का आदेश दे तो वे इसके लिए तैयार हैं।
Twisha Sharma के परिवार की मांग और आरोप क्या हैं?
ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा लगातार दिल्ली AIIMS में दूसरा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी फॉरेंसिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही शव का अंतिम संस्कार शांति और गरिमा के साथ किया जाएगा। परिवार का आरोप है कि ट्विशा को ससुराल में मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा था। वे दहेज की मांग और जबरन गर्भपात जैसे गंभीर आरोप भी लगा रहे हैं। ट्विशा के पिता ने ससुराल पक्ष पर ट्विशा को ड्रग एडिक्ट और सिजोफ्रेनिक बताकर चरित्र हनन करने का भी आरोप लगाया है।
Twisha Sharma Post-mortem Report: मामले की मुख्य संदिग्धियां
- गर्दन पर निशान: AIIMS भोपाल के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गर्दन पर दो समानांतर लिगेचर मार्क्स मिले। पुलिस को फांसी लगाने में इस्तेमाल हुआ नायलॉन बेल्ट पोस्टमॉर्टम के समय डॉक्टर्स को उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे वैज्ञानिक मिलान नहीं हो सका। यह एक बड़ी लापरवाही मानी जा रही है।
- CCTV टाइम मिसमैच: ससुराल पक्ष का दावा है कि ट्विशा ने रात 10 बजे के बाद फांसी लगाई। लेकिन CCTV फुटेज में शाम 7:20 बजे ट्विशा छत की ओर जाती दिख रही है। बाद में शव को नीचे लाते समय भी फुटेज में कुछ असंगतियां बताई जा रही हैं।
- मानसिक स्वास्थ्य: ट्विशा की सास (पूर्व जज) गिरिबाला सिंह का कहना है कि ट्विशा डिप्रेशन और एडजस्टमेंट डिसऑर्डर की शिकार थी। 28 अप्रैल से 6 मई तक उसका साइकियाट्रिक इलाज चल रहा था और नींद व डिप्रेशन की दवाएं ली जा रही थीं। सुसाइड से पहले भी वह डॉक्टर से संपर्क में थी।
Twisha Sharma Post-mortem Report: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का सार
पहले पोस्टमॉर्टम में मौत का कारण एंटीमॉर्टम हैंगिंग बाय लिगेचर (फांसी) बताया गया। शरीर में कोई ड्रग्स नहीं मिले। हालांकि, शरीर पर अन्य चोटों के निशान भी दर्ज किए गए, जो मामले को जटिल बना रहे हैं।
पोस्टमॉर्टम, शव संरक्षण और कानूनी प्रक्रिया
Post-mortem क्या है?
पोस्टमॉर्टम (ऑटोप्सी) शव की वैज्ञानिक जांच है जिसमें मौत का कारण, समय, तरीका और चोटों की प्रकृति पता की जाती है। भारत में CrPC की धारा 174 के तहत अचानक या संदिग्ध मौत में पोस्टमॉर्टम अनिवार्य है। दूसरे पोस्टमॉर्टम की मांग तब की जाती है जब पहली रिपोर्ट में संदेह हो, सबूतों में कमी हो या परिवार न्याय की उम्मीद में उच्चतर केंद्र चाहे। कोर्ट की अनुमति जरूरी होती है।
शव संरक्षण की वैज्ञानिक प्रक्रिया:
- सामान्य मोर्चरी: 2-4 डिग्री सेल्सियस (कुछ दिनों तक)।
- लंबे समय के लिए: -80 डिग्री या एम्बल्मिंग (रसायनिक संरक्षण)।
- भोपाल AIIMS जैसी सुविधाओं में लंबे भंडारण की क्षमता सीमित होती है, इसलिए देरी से शव डीकंपोज (सड़ना) शुरू हो जाता है। इससे फॉरेंसिक सबूत (जैसे टिश्यू, विषाक्त पदार्थ) खराब हो सकते हैं।
इस मामले में कानूनी स्थिति:
- परिवार ने दहेज हत्या (IPC 304B), क्रूरता (498A) और हत्या (302) जैसे धाराओं में FIR दर्ज कराई है। SIT जांच कर रही है। पति समर्थ सिंह फरार है, उसकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। सास गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत मिली हुई है।
दहेज और घरेलू हिंसा का व्यापक संदर्भ:
भारत में हर साल हजारों महिलाएं दहेज और घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं (NCRB डेटा के अनुसार)। शादी के बाद शुरुआती महीनों में तनाव आम है, खासकर जब दोनों पक्ष अलग-अलग पृष्ठभूमि से आते हों। ट्विशा और समर्थ की मुलाकात डेटिंग ऐप पर हुई थी, जो आधुनिक रिलेशनशिप ट्रेंड को दर्शाता है, लेकिन पारिवारिक दबाव अक्सर समस्या बढ़ा देते हैं।
फॉरेंसिक चुनौतियां क्या-क्याा?
बेल्ट जैसे महत्वपूर्ण सबूत का पोस्टमॉर्टम के समय न होना जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। CCTV टाइमस्टैंप और चोटों की प्रकृति (दो समानांतर निशान) सुसाइड बनाम हत्या में अंतर साबित करने वाले हो सकते हैं। दूसरा पोस्टमॉर्टम इन असंगतियों को सुलझा सकता है, बशर्ते शव की स्थिति अनुमति दे।
परिवार और समाज पर असर
ट्विशा का परिवार न्याय की लड़ाई में अंतिम संस्कार टाल रहा है, जो भावनात्मक रूप से बेहद दर्दनाक है। ऐसे मामले पूरे समाज को झकझोर देते हैं और पुलिस, फॉरेंसिक सिस्टम व न्यायिक प्रक्रिया की कमियों को उजागर करते हैं।
क्या हो सकता है आगे?
कोर्ट जल्द ही दूसरे पोस्टमॉर्टम पर फैसला सुना सकता है। अगर दिल्ली AIIMS में अनुमति मिली तो नई रिपोर्ट कई सवालों के जवाब दे सकती है। पुलिस को समर्थ सिंह को गिरफ्तार करने में तेजी लानी होगी।
यह मामला केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, फॉरेंसिक जांच की गुणवत्ता और शादी के बाद के संबंधों में उभरती चुनौतियों का प्रतीक बन गया है। न्याय प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो, यही आम उम्मीद है।













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