Meta Layoffs: सुबह 4 बजे आए एक मेल से मची खलबली, मेटा ने एक झटके में क्यों निकाल दिए 8000 कर्मचारी?

Meta Layoffs: दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी मेटा (Meta) से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। सीईओ मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) के एक बड़े फैसले ने पूरी कंपनी के भीतर हड़कंप मचा दिया है। मेटा ने वैश्विक स्तर पर बड़े पैमाने पर छंटनी (Restructuring) शुरू कर दी है, जिसका सीधा असर कंपनी के हजारों कर्मचारियों पर पड़ा है। इस पूरी कार्रवाई को जिस तरह से अंजाम दिया गया, उसने कर्मचारियों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

दरअसल, अलग-अलग टाइम जोन के हिसाब से सुबह-सुबह आए ईमेल ने कई कर्मचारियों के पैरों तले से जमीन खिसका दी है। आइए जानतें हैं इस पूरी छंटनी के पीछे मेटा की क्या रणनीति है, इसके साथ ही कंपनी के भीतर अचानक ऐसा क्या हुआ जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है...

Meta Layoffs 2026

सुबह 4 बजे आए ईमेल ने उड़ाए होश

इस पूरी छंटनी में सबसे ज्यादा चर्चा इसके अजीबोगरीब टाइमिंग की हो रही है। The Sunday guardian की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंगापुर जैसे कई क्षेत्रों में कर्मचारियों को सुबह के करीब 4 बजे ही नौकरी से निकाले जाने के टर्मिनेशन ईमेल (Termination Emails) मिल गए। दरअसल, मेटा ने इस पूरी प्रक्रिया को बहुत ही गुपचुप और तेजी से अंजाम दिया।

अचानक 'वर्क फ्रॉम होम' के निर्देश

ईमेल भेजने से पहले कई रीजन्स के कर्मचारियों को अचानक 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम) करने के निर्देश दिए गए थे। कर्मचारी अभी कुछ समझ पाते, उससे पहले ही टाइम जोन के हिसाब से फेज्ड रोलआउट (चरणबद्ध तरीके से) के तहत नौकरी से निकालने के ईमेल आने शुरू हो गए। सुबह-सुबह अचानक बिना किसी पूर्व सूचना या सीधे संवाद के मिली इस खबर ने कर्मचारियों के बीच मानसिक तनाव और डर का माहौल पैदा कर दिया है।

कितनी बड़ी है यह छंटनी? आंकड़े कर देंगे हैरान

मेटा की इस नई छंटनी का दायरा बेहद बड़ा है। कंपनी अपने ऑर्गेनाइजेशनल स्ट्रक्चर को छोटा (Flattening) करने और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) पर पूरा फोकस करने के लिए यह कदम उठा रही है। आंकड़ों के जरिए समझिए कंपनी के भीतर क्या चल रहा है:

  • 8,000 कर्मचारियों पर असर: इस नए दौर की छंटनी में अकेले लगभग 8,000 कर्मचारियों की नौकरी जाने की खबर है। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित इंजीनियरिंग, प्रोडक्ट और सपोर्ट टीम के लोग हुए हैं।
  • 7,000 कर्मचारियों का ट्रांसफर: कंपनी सिर्फ लोगों को निकाल नहीं रही है, बल्कि करीब 7,000 कर्मचारियों को एआई-केंद्रित (AI-focused) टीमों में रीअसाइन (Reassign) यानी ट्रांसफर कर रही है।
  • 6,000 पद हमेशा के लिए बंद: मेटा ने अपनी कंपनी में खाली पड़े करीब 6,000 ओपन जॉब पोजीशन्स को भी बंद करने का फैसला किया है।

आपको बता दें कि इस बड़ी रीस्ट्रक्चरिंग से पहले मेटा के कुल कार्यबल (Workforce) की संख्या लगभग 80,000 थी। इस कदम से साफ है कि कंपनी अपने वर्कफोर्स को सिर्फ कम नहीं कर रही, बल्कि उसे पूरी तरह से रीशेप (नया आकार) दे रही है।

आखिर इस वक्त क्यों नौकरियां काट रही है मेटा?

मेटा के इस आक्रामक फैसले के पीछे कंपनी की एआई (AI) को लेकर बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर रणनीति है। कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास पर $100 बिलियन (100 अरब डॉलर) से लेकर $145 बिलियन (145 अरब डॉलर) तक का भारी-भरकम खर्च करने जा रही है। इस छंटनी के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • मैनेजमेंट की परतें कम करना: कंपनी अपने संगठनात्मक ढांचे से अतिरिक्त लेयर्स और मैनेजमेंट पदानुक्रम को कम करना चाहती है।
  • रफ्तार बढ़ाना: छोटी टीमों के जरिए काम की ऑपरेशनल स्पीड को तेज करना।
  • संसाधनों का स्थानांतरण: गैर-जरूरी और एक जैसा काम करने वाले (Overlapping) रोल को खत्म करके पूरा पैसा और संसाधन एआई प्रोडक्ट डेवलपमेंट में लगाना।

जासूसी का डर और कर्मचारियों का फूटा गुस्सा

इस छंटनी के बीच मेटा के अंदर एक और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कंपनी के भीतर वर्कप्लेस मॉनिटरिंग सिस्टम (Workplace Monitoring Systems) को लेकर कर्मचारियों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कर्मचारियों को डर है कि कंपनी उनके कीबोर्ड एक्टिविटी, माउस मूवमेंट और स्क्रीन यूसेज को ट्रैक कर रही है, ताकि उस डेटा का इस्तेमाल एआई ट्रेनिंग (AI Training) के लिए किया जा सके।

इस निगरानी के विरोध में 1,000 से अधिक कर्मचारियों ने एक पेटीशन (याचिका) पर हस्ताक्षर कर अपना विरोध दर्ज कराया है। बार-बार हो रही रीस्ट्रक्चरिंग और नौकरी की अनिश्चितता के कारण कंपनी के अंदर कर्मचारियों का मनोबल (Morale) पूरी तरह गिर चुका है।

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एआई-फर्स्ट (AI-First) कंपनी बनने की होड़

मार्क जुकरबर्ग मेटा को पूरी तरह से एआई संचालित कंपनी बनाना चाहते हैं। कंपनी अब जेनरेटिव मॉडल्स, एआई एजेंट्स और ऑटोमेशन टूल्स पर दांव लगा रही है, जो इंजीनियरिंग और ऑपरेशन्स का एक बड़ा हिस्सा खुद संभाल सकते हैं। इसके लिए मेटा:

  • एआई-नेटिव (AI-native) टीमें तैयार कर रही है।
  • इंजीनियर्स को कोडिंग के लिए एआई टूल्स का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
  • पारंपरिक वर्कफ्लो पर निर्भरता को कम कर रही है।

टेक इंडस्ट्री में चल रहा है 'स्ट्रक्चरल शिफ्ट'

मेटा में चल रही यह छंटनी कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि पूरी वैश्विक टेक इंडस्ट्री में इस समय ऐसा ही ट्रेंड देखने को मिल रहा है। अमेज़न (Amazon), माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), ओरेकल (Oracle), सिस्को (Cisco) और लिंक्डइन (LinkedIn) जैसी बड़ी कंपनियों ने भी हाल ही में अपने कर्मचारियों की संख्या में कटौती की है।

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