Bangladesh Hindu Population: बांग्लादेश में कितनी है हिंदुओं की आबादी, हिंसा के बीच आए डराने वाले आंकड़ें
Bangladesh Hindu population: बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद उपजी राजनीतिक अस्थिरता ने वहां के हिंदू अल्पसंख्यकों को एक भयानक अनिश्चितता के बीच धकेल दिया है। हालिया महीनों में मंदिरों में तोड़फोड़, घरों को जलाने और बेकसूर लोगों की हत्याओं की खबरों ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। आलम यह है कि जब हिंदू समुदाय अपनी सुरक्षा के लिए आवाज उठाता है, तो उनके नेताओं को ही मुकदमों के जाल में उलझा दिया जाता है।
शरीफ उस्मान हादी जैसे छात्र नेताओं की मृत्यु के बाद हिंदू आबादी पर हमलों का सिलसिला और तेज हो गया है, जिससे प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी हो गया है कि विभाजन के समय से अब तक बांग्लादेश में हिंदुओं की जनसंख्या में कितनी गिरावट आई है और क्या वहां का अल्पसंख्यक समुदाय अपने ही देश में एक अंतहीन खौफ के साए में जीने को मजबूर है?

Bangladesh Hindu attacks news: इस वक्त बांग्लादेश में हिंदुओं की कितनी जनसंख्या
बांग्लादेश की 2022 की आधिकारिक जनगणना के अनुसार, वहां हिंदुओं की कुल संख्या 13.13 मिलियन (लगभग 1.31 करोड़) है, जो कुल आबादी का 7.95% हिस्सा है। देश की कुल 165.16 मिलियन आबादी में से 91.08% मुसलमान हैं, जबकि बौद्ध और ईसाई जैसे अन्य अल्पसंख्यक 1% से भी कम हैं।
जनसंख्या का यह वितरण पूरे देश में एक समान नहीं है। जहा मैमनसिंह डिवीजन में हिंदुओं की हिस्सेदारी सबसे कम (3.94%) है, वहीं सिलहट डिवीजन में यह सबसे अधिक (13.51%) है।
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Bangladesh Hindu percentage: इन जिलों में हिंदुओं की बड़ी अबादी
- गोपालगंज: 26.94%
- मौलवीबाजार: 24.44%
- ठाकुरगांव: 22.11%
- खुलना: 20.75%
वहीं देश के 21 जिलों में हिंदुओं की आबादी 10% से अधिक है
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कभी 33% फीसदी थी हिंदुओं की अबादी
ऐतिहासिक रूप से समृद्ध बांग्लादेशी हिंदू समाज आज अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। 1901 में जो आबादी कुल जनसंख्या का एक-तिहाई (33%) थी, वह 2022 तक सिमटकर महज 7.96% रह गई है। 1951 में भी यह आंकड़ा 22% के करीब था, लेकिन विभाजन के बाद और विशेषकर 1941-1974 के दौरान पाकिस्तान शासन के तहत हिंदुओं ने सबसे भीषण पलायन और उत्पीड़न झेला।
जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी संगठनों के अत्याचारों, आर्थिक बहिष्कार और धार्मिक असुरक्षा ने हिंदुओं को अपनी जमीन छोड़ने पर मजबूर किया। आज यह गिरावट न केवल जनसांख्यिकीय बदलाव है, बल्कि अल्पसंख्यक समुदाय के निरंतर घटते अस्तित्व और वहां व्याप्त असुरक्षित वातावरण की दुखद कहानी है।
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Bangladesh violence against Hindus: बांग्लादेश में तेजी से क्यों बढ़ी मुस्लिम आबादी
- हिंदुओं का निरंतर पलायन: 1947 के विभाजन और 1971 के मुक्ति संग्राम के बाद से लाखों हिंदू असुरक्षा और सांप्रदायिक तनाव के कारण भारत चले गए। 'वेटेड प्रॉपर्टी एक्ट' जैसे कानूनों ने उनकी संपत्ति छीन ली, जिससे पलायन बढ़ा और आबादी में मुस्लिमों का अनुपात स्वतः बढ़ गया।
- इस्लामी राष्ट्र की पहचान और धर्मांतरण: 1988 में इस्लाम को राज्य धर्म घोषित करने के बाद देश की पहचान एक मुस्लिम राष्ट्र के रूप में मजबूत हुई। कट्टरपंथी संगठनों के दबाव में जबरन धर्मांतरण और अल्पसंख्यकों के हाशिए पर जाने से मुस्लिम बहुसंख्यक आबादी का दबदबा और अधिक बढ़ता चला गया।
- प्रजनन दर (Fertility Rate) में अंतर: ऐतिहासिक रूप से, मुस्लिम समुदाय में औसत प्रजनन दर हिंदू आबादी की तुलना में अधिक रही है। हालांकि अब बांग्लादेश की कुल प्रजनन दर में कमी आई है, लेकिन पिछले दशकों के इस अंतर ने मुस्लिम जनसंख्या के आधार को तेजी से विस्तार दिया।
- सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक कारक: विशेषज्ञों के अनुसार, हिंदुओं में उच्च साक्षरता और शहरीकरण के कारण उन्होंने परिवार नियोजन को जल्दी अपनाया। इसके विपरीत, ग्रामीण मुस्लिम आबादी में शिक्षा के अभाव और बड़े परिवारों की धार्मिक व सामाजिक स्वीकार्यता ने उनकी संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।












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