Bangladesh में चीन ने बनाया भारत विरोधी माहौल? जानिए पर्दे के पीछे की पूरी कहानी
Bangladesh: बांग्लादेश में इन दिनों अराजकता अपने चरम पर है। भारत विरोधी लहर को सत्ता से हवा मिल रही है और चीन इसका पूरा फायदा उठाने की जुगाड़ा में है। चीन बांग्लादेश के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर कब्जा जमा रहा है और बांग्लादेश को हथियार सप्लाई भी कर रहा है। जिसको लेकर अब भारत चिंता में है। बांग्लादेश की आंतरिक स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। भारतीय राजनायिकों, दूतावास और उनमें काम करने वाले कर्मचारियों को निशाना बनाने की साजिश रची जा रही है। इन सब के बीच अब चीन का चेहरा सामने आ रहा है, जिसको लेकर भारत ने सख्ती दिखाई है।
संसद में पेश हुई रिपोर्ट, बांग्लादेशी दूत को किया गया तलब
यह रिपोर्ट संसद में उस वक्त पेश की गई, जब भारत के विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश की सुरक्षा स्थिति को लेकर बढ़ती चिंताओं के चलते बांग्लादेशी राजदूत को तलब किया था। रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन मोंगला पोर्ट और लालमोनिरहाट एयरबेस के निर्माण में बांग्लादेश की मदद कर रहा है। इसके साथ ही समिति ने भारत के रणनीतिक रूप से बेहद अहम सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे आमतौर पर "चिकन नेक" कहा जाता है, के आसपास चीन की बढ़ती गतिविधियों पर भी ध्यान दिलाया है।

बुनियादी ढांचे और सैन्य सहयोग से बढ़ी चिंता
रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि "बांग्लादेश में चीन की बढ़ती उपस्थिति, खासकर बुनियादी ढांचे, सैन्य सहयोग और बंदरगाह विकास के माध्यम से, चिंता का विषय है।" विदेश मंत्रालय ने मोंगला पोर्ट और लालमोनिरहाट एयरबेस में चीन की गतिविधियों को लेकर अपनी सतर्कता दोहराई है। मंत्रालय का कहना है कि सरकार बांग्लादेश में चीन की मौजूदगी, वहां चल रही चीनी परियोजनाओं और उनके संभावित असर पर लगातार नजर बनाए हुए है।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर खास नजर
विदेश मंत्रालय ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर से जुड़े रणनीतिक पहलुओं पर भी चिंता जताई। मंत्रालय के मुताबिक, सरकार ऐसे हर घटनाक्रम पर नजर रखती है जो भारत के राष्ट्रीय हितों को प्रभावित कर सकता है और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाते हैं। यह चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि मार्च 2025 में बांग्लादेश ने मोंगला बंदरगाह के 370 मिलियन डॉलर के विस्तार के लिए चीन के साथ एक सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
भारत भी इंफ्रास्ट्रक्चर में निभा रहा भूमिका
हालांकि रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत ने भी बांग्लादेश में अहम परियोजनाओं में सहयोग दिया है। भारत खुल्ना-मोंगला रेलवे लाइन जैसी बड़ी कनेक्टिविटी परियोजना को फंड कर रहा है, जिससे बंदरगाह को देश के अंदरूनी इलाकों से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके। इसके अलावा भारत के पास बांग्लादेश के साथ मोंगला और चटगांव बंदरगाहों के जरिए ट्रांजिट पहुंच का समझौता भी है।
हालिया घटनाओं से रिश्तों में और तनाव
इसी बीच बांग्लादेश में हाल के घटनाक्रमों ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में और खटास ला दी है। गुरुवार, 18 दिसंबर 2025, को प्रो-यूनुस समूहों द्वारा भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन शुरू होने के बाद भारत ने बांग्लादेश के दो शहरों में अपने वीज़ा केंद्र बंद कर दिए। यह फैसला सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए लिया गया।
वीज़ा केंद्र बंद, आवेदकों को नई तारीख
भारतीय वीज़ा आवेदन केंद्र (IVAC) ने बयान जारी कर कहा, "वर्तमान सुरक्षा स्थिति को देखते हुए, IVAC राजशाही और खुल्ना आज (18.12.2025) बंद रहेंगे। जिन आवेदकों ने आज के लिए अपॉइंटमेंट लिया था, उन्हें बाद की तारीख में नया स्लॉट दिया जाएगा।" न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन 'भारतीय आधिपत्य विरोधी जुलाई 36 मंच' नामक समूह द्वारा आयोजित किया गया था।
इन सभी घटनाओं से साफ है कि बांग्लादेश में चीन की बढ़ती भूमिका और वहां की आंतरिक राजनीति भारत के लिए रणनीतिक और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
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