Drishyam 3 Review: सस्पेंस नहीं, डर और अपराधबोध की कहानी है 'दृश्यम 3', मोहनलाल ने जीता दिल, क्यों देखें फिल्म

फिल्म- दृश्यम 3 (Drishyam 3)
स्टारकास्ट- मोहनलाल, मीणा, आशा सरत
डायरेक्टर- जीतू जोसेफ
भाषा- मलयालम, कन्नड़, तमिल और तेलुगू
रनटाइम- 2 घंटे 36 मिनट
स्टार- 3 स्टार (***)

Drishyam 3 Review: सस्पेंस और क्राइम थ्रिलर फिल्मों की बात हो और 'दृश्यम' फ्रेंचाइजी का नाम न आए, ऐसा होना मुश्किल है। साल 2013 में शुरू हुई जॉर्जकुट्टी की कहानी अब तीसरे अध्याय तक पहुंच चुकी है। 'दृश्यम 3' सिर्फ एक मर्डर मिस्ट्री नहीं बल्कि एक ऐसे इंसान की कहानी बनकर सामने आती है जो अपने परिवार को बचाने की कीमत लगातार अपने डर और अपराधबोध से चुका रहा है।

Drishyam 3 Review

ज्यादा गहरी और इमोशनल है फिल्म 'दृश्यम 3'
सुपरस्टार मोहनलाल की फिल्म 'दृश्यम 3' आज यानी 21 मई 2026 (गुरुवार) को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म को मलयालम, कन्नड़, तमिल और तेलुगू भाषा में रिलीज किया गया है। निर्देशक जीतू जोसेफ ने इस बार फिल्म को केवल थ्रिल और ट्विस्ट तक सीमित नहीं रखा है बल्कि कहानी में भावनाओं और मानसिक तनाव की परतें भी जोड़ दी हैं। यही वजह है कि 'दृश्यम 3' पिछली फिल्मों से कहीं ज्यादा गहरी और इमोशनल महसूस होती है।

क्या है फिल्म 'दृश्यम 3' की कहानी?

-फिल्म की कहानी दूसरे भाग के बाद आगे बढ़ती है। जॉर्जकुट्टी अब पहले जैसा निश्चिंत इंसान नहीं रहा। बाहर से सबकुछ सामान्य दिखता है लेकिन भीतर वह हर पल डर और बेचैनी के साथ जी रहा है।

-अतीत का साया अब भी उसके परिवार का पीछा कर रहा है और पुलिस की निगाहें उस पर टिकी हुई हैं। फिल्म ये दिखाती है कि कोई इंसान एक राज को कितने लंबे समय तक अपने अंदर दबाकर जी सकता है और उस राज का मानसिक असर उसकी जिंदगी को कैसे बदल देता है।

-कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ती है लेकिन हर सीन के साथ तनाव बढ़ता जाता है। क्लाइमैक्स तक पहुंचते-पहुंचते फिल्म कई ऐसे मोड़ देती है जो दर्शकों को चौंका देते हैं।

फिल्म की स्टारकास्ट और उनकी एक्टिंग

-अगर फिल्म की सबसे बड़ी ताकत की बात करें तो वह सुपरस्टार मोहनलाल हैं। उन्होंने जॉर्जकुट्टी के किरदार को जिस बारीकी और गहराई से निभाया है, वह कमाल का है।

-फिल्म में कई ऐसे पल हैं जहां बिना ज्यादा डायलॉग बोले सिर्फ आंखों और चेहरे के भावों से वह डर, तनाव और मजबूरी को महसूस करा देते हैं। यही उनकी एक्टिंग की सबसे बड़ी खूबी है। जॉर्जकुट्टी का अंदरूनी संघर्ष इस बार पहले से ज्यादा साफ नजर आता है।

-वहीं एक्ट्रेस मीणा ने जॉर्जकुट्टी की पत्नी के किरदार में शानदार काम किया है। परिवार के बाकी कलाकारों ने भी अपने रोल्स को मजबूती से निभाया है, जिससे कहानी और ज्यादा वास्तविक लगती है।

जीतू जोसेफ का धीमा लेकिन असरदार निर्देशन

-जीतू जोसेफ एक बार फिर साबित करते हैं कि सस्पेंस पैदा करने के लिए तेज शोर या बड़े-बड़े एक्शन सीक्वेंस जरूरी नहीं होते। उनका निर्देशन फिल्म को धीरे-धीरे आगे बढ़ाता है लेकिन यही स्लो-बर्न स्टाइल इसकी सबसे बड़ी ताकत भी बन जाता है।

-हालांकि कुछ जगह फिल्म की रफ्तार थोड़ी धीमी महसूस हो सकती है लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, हर छोटी डिटेल महत्वपूर्ण लगने लगती है। क्लाइमैक्स तक पहुंचते-पहुंचते सारी कड़ियां शानदार तरीके से जुड़ जाती हैं।

बैकग्राउंड म्यूजिक और सिनेमैटोग्राफी ने बढ़ाया तनाव

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर हर सीन में एक अनकहा डर पैदा करता है। शांत माहौल के बीच भी दर्शक लगातार किसी बड़े खुलासे का इंतजार करते रहते हैं। सिनेमैटोग्राफी भी कहानी के मूड को मजबूत बनाती है। कई सीन्स इतने वास्तविक लगते हैं कि दर्शक खुद को जॉर्जकुट्टी के डर और तनाव का हिस्सा महसूस करने लगते हैं।

क्यों देखें फिल्म 'दृश्यम 3'?

-अगर आप सिर्फ तेज रफ्तार मसाला थ्रिलर देखने की उम्मीद से थिएटर जाएंगे तो फिल्म आपको थोड़ा अलग अनुभव दे सकती है लेकिन अगर आपको मनोवैज्ञानिक सस्पेंस, गहरी कहानी और दमदार अभिनय पसंद है तो 'दृश्यम 3' आपको अंत तक बांधे रखेगी।

-ये फिल्म सिर्फ अपराध छिपाने की कहानी नहीं है बल्कि उस अपराध के बाद हर दिन डर के साथ जीने की कहानी है। 'दृश्यम 3' ये साबित करती है कि जॉर्जकुट्टी का सफर अभी खत्म नहीं हुआ है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत बन जाती है।

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