Bangladesh Violence: फिर जल उठा बांग्लादेश! उस्मान हादी की मौत के बाद क्या-क्या हुआ? अब तक के सभी अपडेट
Bangladesh Violence: बांग्लादेश में शुक्रवार, 19 दिसंबर की सुबह हालात उस समय बेकाबू हो गए, जब छात्र आंदोलन का प्रमुख नेता और इंकिलाब मंच (Inquilab Mancha) के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत की पुष्टि हुई।
उनकी मौत की खबर सामने आते ही ढाका समेत देश के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन, आगजनी, सड़क जाम और झड़पें शुरू हो गईं, जिससे पूरे देश में तनाव का माहौल बन गया। हादी की मौत के बाद मोहम्मद यूनुस का राष्ट्र के नाम संबोधन दिया और लोगों से शांति की अपील की। मीडिया दफ्तरों पर हमले से लेकर भारतीय मिशन पर पथराव तक। पढ़ें अब तक के सारे अपडेट्स...

शरीफ उस्मान हादी का शव आज ढाका पहुंचेगा
32 वर्षीय शरीफ उस्मान हादी 2024 के जुलाई छात्र आंदोलन (July Uprising) के प्रमुख चेहरों में से एक थे, जिसने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासन का अंत किया था। वह आगामी फरवरी 2026 के राष्ट्रीय चुनाव में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे।
12 दिसंबर को ढाका में एक मस्जिद से निकलते वक्त नकाबपोश हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी। गंभीर हालत में उन्हें पहले स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए सिंगापुर एयरलिफ्ट किया गया। छह दिनों तक जिंदगी से जूझने के बाद 18 दिसंबर की रात सिंगापुर में उनकी मौत हो गई।
उसका शव आज ढाका पहुंचेगा, जहां अंतिम संस्कार होगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पहला जनाज़ा सिंगापुर में और मुख्य अंतिम संस्कार शनिवार को ढाका के माणिक मिया एवेन्यू में ज़ोहर की नमाज़ के बाद होगा
मोहम्मद यूनुस का राष्ट्र के नाम संबोधन, एक दिन का शोक
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा-आज मैं आपके सामने बेहद दुखद समाचार लेकर आया हूं। जुलाई आंदोलन के साहसी योद्धा और इंकिलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी अब हमारे बीच नहीं रहे।
यूनुस ने एक दिन के राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया और कहा कि हादी की हत्या के दोषियों को जल्द न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। साथ ही उन्होंने लोगों से संयम और शांति बनाए रखने की अपील की। इसके साथ ही बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने हादी को "युवाओं की आकांक्षाओं की आवाज" बताया। वहीं, मुख्य न्यायाधीश सैयद रिफ़ात अहमद ने कहा-देश ने एक साहसी और निडर आवाज खो दी है।
देशभर में हिंसक प्रदर्शन, सड़कें जाम
हादी की मौत के बाद ढाका के शाहबाग इलाके में सड़कें जाम कर दी गईं। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड लगाकर रास्ते बंद किए। हालांकि, एम्बुलेंस और आपात सेवाओं को जाने दिया गया। चटगांव और अन्य शहरों में भी प्रदर्शन फैल गए। BBC बांग्ला के मुताबिक, शाहबाग में करीब 200 प्रदर्शनकारी जुटे, जो किसी राजनीतिक दल के बैनर तले नहीं थे।
मीडिया पर हमला, दफ्तर जलाए गए
हिंसा का सबसे गंभीर रूप तब सामने आया जब प्रदर्शनकारियों ने ढाका में डेली स्टार (The Daily Star) और डेली प्रोथोम आलो (Prothom Alo) के ऑफिस पर हमला कर दिया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में देखा गया कि प्रदर्शनकारियों ने इन मीडिया दफ्तरों में तोड़फोड़ और आगजनी की।
डेली स्टार के कार्यालय में आग लगने के दौरान कम से कम 25 पत्रकार और कर्मचारी अंदर फंस गए, जिन्हें कई घंटों बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। हालात इतने बिगड़ गए कि पत्रकारों और स्टाफ ने सोशल मीडिया के जरिए मदद की अपील करते हुए हिंसा रोकने की मांग की।
चटगांव में भारतीय मिशन पर पथराव, भारत विरोधी नारे
हादी की मौत के बाद गुस्सा सिर्फ सरकार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका रुख भारत की ओर भी मुड़ गया। चटगांव स्थित भारतीय सहायक उच्चायोग पर प्रदर्शनकारियों ने पत्थर और ईंटें फेंकीं। शेख हसीना की अवामी लीग और भारत विरोधी नारे लगाए गए। पुलिस ने हालात काबू में करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। करीब रात 2 बजे स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सका।
भारत में शेख हसीना की मौजूदगी बना गुस्से की बड़ी वजह
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना, जिन्हें पिछले साल सत्ता से हटाया गया था और जिन्हें हाल ही में मानवता के खिलाफ अपराधों में मौत की सजा सुनाई गई, भारत में शरण लिए हुए हैं। इसी मांग को लेकर भारतीय उच्चायोग की ओर मार्च, वीजा सेंटर्स पर प्रदर्शन, भारतीय डिप्टी हाई कमिश्नर के आवास को घेरने की कोशिश जैसी घटनाएं सामने आईं।
सुरक्षा हालात को देखते हुए भारत ने खुलना और राजशाही में भारतीय वीजा आवेदन केंद्र बंद किए और बांग्लादेशी राजदूत को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से भारतीय मिशनों और राजनयिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की उम्मीद करता है।
बांग्लादेश फिर बड़े संकट के मुहाने पर
शरीफ उस्मान हादी की मौत ने बांग्लादेश को एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता, हिंसा और कूटनीतिक तनाव के दौर में धकेल दिया है। मीडिया दफ्तरों पर हमले, भारत विरोधी प्रदर्शन और सड़कों पर फैली अराजकता ने साफ कर दिया है कि हालात बेहद नाजुक हैं। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि बांग्लादेश इस संकट से कैसे बाहर निकलता है।












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