Bangladesh Election 2026: चोरी-छुपे पैसे बांट रहे थे यूनुस के कार्यकर्ता, पकड़े गए तो मचाया उत्पात, 40 घायल
Bangladesh Election 2026: वोटिंग से ठीक 72 घंटे पहले भड़की हिंसा ने चुनावी माहौल में भारी तनाव पैदा कर दिया है। देश दशकों बाद एक बड़े राजनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है और ऐसे समय में यह चुनाव बांग्लादेश के भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। लेकिन वोटिंग से ठीक पहले हुई हिंसा ने सुरक्षा व्यवस्था और चुनाव की को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पैसे बांटने के आरोप से शुरू हुआ विवाद
यह हिंसा उस समय शुरू हुई जब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकर्ताओं ने जमात-ए-इस्लामी पर आरोप लगाया कि वह देर रात एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान लोगों को नकद पैसे बांट रही थी। BNP का दावा था कि यह सीधे तौर पर चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है। आरोप लगते ही माहौल तनावपूर्ण हो गया। जिसके कुछ देर बाद हिंसा भड़क गई और कई लोग इसकी जद में आ गए।

रात भर चली झड़प, 40 से ज्यादा लोग घायल
BNP और जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं के बीच देर रात हुई झड़पों में महिलाओं सहित 40 से अधिक लोग घायल हो गए। चश्मदीदों के मुताबिक, जब BNP कार्यकर्ता विरोध दर्ज कराने मौके पर पहुंचे, तो जमात ने भी अपने समर्थकों को बुला लिया। इसके बाद हालात बेकाबू हो गए और पूरी रात दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़पें चलती रहीं।
वोटिंग से कुछ घंटे पहले भड़की सबसे बड़ी हिंसा
यह घटना 12 फरवरी को होने वाले वोटिंग और 10 फरवरी की सुबह 7:30 बजे चुनाव प्रचार खत्म होने से कुछ ही घंटे पहले हुई। इसी वजह से इसे मौजूदा चुनावी अभियान की सबसे हिंसक घटना बताया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है क्योंकि वोटिंग से पहले माहौल को शांत बनाए रखना बेहद जरूरी है। अगर हिंसा नहीं रुकती है तो इसका असर वोटिंग प्रतिशत पर भी पड़ सकता है।
छह हफ्तों में लगातार बढ़ती चुनावी हिंसा
पिछले छह हफ्तों के दौरान पूरे बांग्लादेश में चुनाव से जुड़ी हिंसक घटनाओं में पांच से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। जैसे-जैसे वोटिंग की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे राजनीतिक तनाव और अशांति बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह हालात चुनावी प्रक्रिया पर लोगों के भरोसे को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
BNP बनाम जमात
12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव को BNP और जमात-ए-इस्लामी गठबंधन के बीच एक स्पष्ट द्विध्रुवीय मुकाबला माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यह 2009 के बाद बांग्लादेश का सबसे अहम चुनाव हो सकता है। इस चुनाव में 12.7 करोड़ से अधिक मतदाता वोट डालने के पात्र हैं, जो इसे देश के इतिहास के सबसे बड़े चुनावों में से एक बनाता है।
300 में से 292 सीटों पर BNP का दावा
BNP प्रमुख तारिक रहमान ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी 300 संसदीय सीटों में से 292 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि BNP को "सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीटें" मिलेंगी। उनके इस बयान से पार्टी के आत्मविश्वास का अंदाजा लगाया जा सकता है।
मुहम्मद यूनुस ने बताया चुनाव को "महान उत्सव"
अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने चुनाव और साथ-साथ हो रहे सुधारों पर जनमत संग्रह को एक "महान उत्सव" बताया है। उन्होंने वादा किया कि यह बांग्लादेश के इतिहास का सबसे स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव होगा। यूनुस के मुताबिक, यही चुनाव "नए बांग्लादेश" की नींव रखेगा।
हिंसा से कमजोर हो सकता है लोकतंत्र पर भरोसा
हालांकि कई राजनीतिक विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि जारी हिंसा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों के भरोसे को कमजोर कर सकती है। मौजूदा हालात इसलिए भी खास हैं क्योंकि अब राजनीतिक भूमिकाएं उलट चुकी हैं। जो पार्टियां पहले सत्ता में थीं, वे अब बाहर हैं, और जो दल वर्षों तक दमन झेलते रहे, वे अब सड़कों पर चुनाव प्रचार में आगे नजर आ रहे हैं।
क्षेत्रीय राजनीति और भारत-चीन-पाकिस्तान का एंगल
यह चुनाव दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को भी नया रूप दे सकता है। शेख हसीना, जिन्हें भारत के काफी करीब माना जाता था, उनके नई दिल्ली भाग जाने के बाद से चीन का प्रभाव बढ़ा है। कुछ विश्लेषक मानते हैं कि BNP भारत के प्रति अपेक्षाकृत ज्यादा अनुकूल है, जबकि जमात के नेतृत्व वाली सरकार पाकिस्तान के करीब जा सकती है। हालांकि जमात-ए-इस्लामी का कहना है कि वह "किसी भी देश की ओर झुकाव नहीं रखती।"
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