MP के निमाड़ में सबसे सफल है सौर ऊर्जा संयंत्र, क्या है कारण, जानिए?

मध्यप्रदेश में इन दिनों लोग अपने घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करते नजर आ रहे हैं, जहां निमाड़ अंचल में सौर ऊर्जा संयंत्र की सफलता का प्रतिशत ज्यादा नजर आता है.

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    मध्यप्रदेश में अब लोग वैकल्पिक ऊर्जा के स्त्रोत को अपनाने लगे हैं, जिसमें मुख्य रुप से लोग अब अपने घरों की छत पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली का उत्पादन करते नजर आ रहे हैं। मध्यप्रदेश के निमाड़ अंचल में लोगों द्वारा घरों की छत पर सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं, जिससे बिजली का निर्माण किया जा रहा है। गौरतलब है कि, निमाड़ अंचल में गर्मी अत्यधिक पड़ती है। यही कारण है कि, यहां साल के लगभग 10 महीनों तक तेज धूप अपना असर दिखाती है। इसी के चलते निमाड़ अंचल के खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर और बड़वानी जैसे जिले में बिजली उत्पादन के मामले में अव्वल नजर आते हैं, जहां धूप अत्यधिक पढ़ने से सौर ऊर्जा स्त्रोत अच्छे से काम कर पाते हैं, और अत्यधिक मात्रा में बिजली का उत्पादन होता है।

    एमपी के ये जिले अव्वल

    सौर ऊर्जा उपकरण के सहायता से बिजली उत्पादन करने वाले मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों की बात करें तो इनमें इंदौर, उज्जैन, रतलाम, खरगोन बड़वानी और बुरहानपुर जैसे जिले शामिल हैं। मालवा निमाड़ अंचल के यह जिले में लगातार सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादित करते नजर आ रहे हैं, हाल ही में जो आंकड़ा बिजली कंपनी की ओर से सौर ऊर्जा लगाने वाले शहरों का सामने आया है, उनमें मालवा निमाड़ अंचल के इंदौर, उज्जैन, रतलाम और खरगोन जिले शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक गर्मी के मौसम में अत्यधिक बिजली का उत्पादन सौर ऊर्जा के माध्यम से किया जा सकता है। यही कारण है कि, गर्मी के मौसम में सर्वाधिक बिजली सौर ऊर्जा के माध्यम से बनेगी।

    फ्लोटिंग सोलर परियोजना स्थापित की जा रही

    मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर में 600 मेगावाट की फ्लोटिंग सोलर परियोजना स्थापित की जा रही है। प्रदेश में 7 हजार 500 करोड़ रूपये की 3 अन्य फ्लोटिंग परियोजनाओं पर जल्द ही काम शुरू किया जायेगा। 60 हजार मेगावाट की सोलर, 15 हजार मेगावाट की पवन एवं अन्य नवकरणीय ऊर्जा आधारित परियोजना स्थापना की संभावना है। प्रदेश में अब तक 60 हजार मेगावाट से अधिक सोलर और लगभग 5 हजार मेगावाट की पवन ऊर्जा परियोजना क्रियान्वित और क्रियान्वयन स्तर पर है। उधर, अब इंदौर में सुपर कॉरिडर, बायपास आदि क्षेत्रों में अपने परिसर से बिजली बनाने वालों की संख्या 4300 के करीब हो गई है। वहीं कंपनी क्षेत्र में यह संख्या बढ़कर 7250 के पार पहुंच गई है। इंदौर इस तरह सौर ऊर्जा के क्षेत्र में मप्र में सबसे ज्यादा स्थानों के उपयोग वाला शहर बना हुआ है।

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