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कोरोना से ठीक हुए लोग वैक्सीन कब लगवाएं और कोविशील्ड की दो डोज में कितनी अंतर हो? पैनल ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव

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नई दिल्ली, 13 मई: देश के कई इलाकों में कोविड-19 वैक्सीन की किल्लत के बीच एक सरकारी पैनल ने वैक्सीन नीति को लेकर तीन महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय तकनीकी सलाहाकर समूह ने कोरोना से ठीक हुए लोगों के लिए 6 महीने बाद ही वैक्सीन लगाने का सुझाव दिया है। यही नहीं पैनल ने कोविशील्ड की दो डोज के बीच के अंतर को भी और ज्यादा बढ़ाने की सिफारिश की है। गौरतलब है कि पिछले एक मई से जबसे 18 से 44 साल के लोगों को वैक्सीन लगाने की मंजूरी मिली है, इसकी फिलहाल काफी कमी देखी जा रही है। इसको लेकर जमकर राजनीति भी हो रही है। ऐसे समय में सरकारी पैनल से आया यह सुझाव सरकार को राहत दे सकती है।

6 महीने बाद वैक्सीन लगवाएं कोविड मरीज-पैनल

6 महीने बाद वैक्सीन लगवाएं कोविड मरीज-पैनल

सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि सरकारी पैनल ने कोविड-19 से ठीक हो चुके मरीजों को स्वस्थ होने के 6 महीने बाद वैक्सीन लगवाने की सलाह दी है। इससे पहले डॉक्टर कोरोना मरीजों को रिकवरी के कम से कम तीन महीने बाद वैक्सीन लगाने की सलाह दे रहे थे। अमेरिका में सीडीसी ने भी इसको लेकर जो गाइडलाइन बनाई हुई है, उसके तहत कोविड से रिकवर होने के 90 दिन बाद ही वैक्सीन लगवाने को कहा जाता है। यही नहीं पैनल ने गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए भी बहुत बड़ी सिफारिश की है, जिसकी मांग कई दिनों से की जा रही है। पैनल ने कहा है कि गर्भवती महिलाएं देश में उपलब्ध दोनों वैक्सीन- कोविशील्ड या कोवैक्सिन में से कोई एक लगवा सकती हैं। यही नहीं डिलीवरी के बाद स्तनपान कराने वाली महिलाएं भी अब टीका लगवा सकेंगी।

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    वैक्सीन से प्लेसेंटा को नुकसान नहीं- स्टडी

    वैक्सीन से प्लेसेंटा को नुकसान नहीं- स्टडी

    गौरतलब है कि ऑब्सटेरिक्स एंड गायनेकोलॉजी जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक वैक्सीन की वजह से गर्भवती महिलाओं के प्लेसेंटा को नुकसान नहीं पहुंचता। इस स्टडी में हिस्सा लेने वाली ज्यादातर मरीजों को मॉडर्ना और फाइजर की वैक्सीन दी गई थी, जो फिलहाल भारत में नहीं दी जा रही है। लेकिन, इस स्टडी ने टीके को लेकर गर्भवती माताओं, डॉक्टरों और शोधकर्ताओं के डर को जरूर पहले ही कम कर दिया था। अमेरिका के नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी फिनबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसीन के एसिस्टेंट प्रोफेसर जेफरी गोस्डस्टिन ने कहा है, 'इसके बाद हम क्या कह सकते हैं, कोविड वैक्सीन प्लेसेंटा को नुकसान नहीं पहुंचाती है।'

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    कोविशील्ड की दो डोज में अंतर बढ़ाने सिफारिश

    कोविशील्ड की दो डोज में अंतर बढ़ाने सिफारिश

    यही नहीं सूत्रों के मुताबिक नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन ने कोविशील्ड वैक्सीन की पहली और दूसरी डोज में अंतर भी 12 से 16 हफ्तों तक बढ़ाने की सिफारिश की है। इस समय इसके लिए 6 से 8 हफ्तों का अंतर निर्धारित है। पिछले मार्च में ही केंद्र सरकार ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की इस वैक्सीन की दो डोज के बीच का गैप 28 दिन से बढ़ाकर 6 से 8 हफ्ते कर दिया था। हालांकि, भारत बायोटेक के देसी टीके कोवैक्सिन को लेकर दो डोज के बीच अंतर को लेकर किसी तरह के बदलाव का सुझाव नहीं दिया गया है। बता दें कि पिछले 1 मई से केंद्र सरकार ने 18 साल से ऊपर के सभी व्यस्क लोगों को कोरोना का टीका लगवाने की इजाजत दे दी है। लेकिन, इसकी वजह से वैक्सीन की डिमांड और सप्लाई का गैप बहुत ज्यादा बढ़ गया है और फिलहाल पहले की तरह लोग आसानी से टीके नहीं लगवा पा रहे हैं।

    English summary
    Get vaccinated 6 months after recovering from covid, the difference between two doses of Covishield should also increased and pregnant or lactating women should also be vaccinated, recommendation of government panel
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