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Israel-Iran War: अब शांत होगा पश्चिम एशिया? एक ही दिन में ईरानी नेताओं को PM मोदी और जयशंकर ने किया फोन

Israel-Iran War: पश्चिम एशिया के अशांत माहौल में भारत की विदेश नीति एक बड़े और रणनीतिक बदलाव से गुजर रही है। संघर्ष के शुरुआती दौर में भारत का झुकाव स्पष्ट तौर पर इजराइल पर हुए आतंकी हमलों की निंदा करने की ओर था, और ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई के निधन जैसे संवेदनशील घटनाक्रमों पर भी भारत ने एक लंबी चुप्पी साधे रखी थी। लेकिन अब, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ईरानी नेतृत्व से बार-बार होती बातचीत यह संकेत दे रही है कि भारत अपनी 'वेट एंड वॉच' की नीति छोड़कर सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका में आ गया है।

नवरोज और ईद की बधाई के बहाने संबंधों में जमी बर्फ को पिघलाकर भारत ने संतुलन साधने की कोशिश की है। भारत अब ईरान को विश्वास में लेकर न केवल क्षेत्रीय शांति की वकालत कर रहा है, बल्कि समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा जैसे वैश्विक हितों पर भी अपनी बात मजबूती से रख रहा है। यह सक्रियता दर्शाती है कि भारत अब इस संकट में एक निष्पक्ष और प्रभावी खिलाड़ी के रूप में उभरना चाहता है।

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पीएम मोदी और जयशंकर का 'डबल-एक्शन' प्लान

शनिवार को ईद के मौके पर पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन से बात की और उसके तुरंत बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से संवाद किया। यह 'डबल-एक्शन' दिखाता है कि भारत अब शीर्ष स्तर पर ईरान से सीधे संपर्क में है। त्योहारों की बधाई देना केवल एक शिष्टाचार नहीं, बल्कि रिश्तों की जमी बर्फ को पिघलाने का एक तरीका है, ताकि गंभीर मुद्दों पर खुलकर बात की जा सके।

India Iran Diplomatic Talks: क्यों बदली भारत ने अपनी पुरानी रणनीति?

शुरुआत में भारत ने इजराइल पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की थी, लेकिन युद्ध लंबा खिंचने और लाल सागर में जहाजों पर बढ़ते हमलों ने भारत को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया। भारत की अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार पर टिकी है। अगर यह रास्ता असुरक्षित होता है, तो भारत में तेल और गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं। अपनी ऊर्जा सुरक्षा और 'कनेक्टिविटी' (जैसे चाबहार पोर्ट) को बचाने के लिए भारत ने अब ईरान को विश्वास में लेना जरूरी समझा है।

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Middle East Tension: क्या अब बदल जाएगा इस जंग का स्वरूप?

भारत की इस सक्रियता से युद्ध के और अधिक फैलने का खतरा कम हो सकता है। भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से है जिसके रिश्ते इजराइल और ईरान, दोनों से अच्छे हैं। भारत अब एक 'ब्रिज' (पुल) का काम कर रहा है। अगर भारत ईरान को उकसावे वाली कार्रवाई से रोकने में कामयाब होता है, तो यह जंग एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदलने के बजाय कूटनीतिक मेज पर आ सकती है।

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वैश्विक व्यापार और शांति का नया 'भारतीय मॉडल'

भारत की रणनीति अब 'केवल अपनी सुरक्षा' से बढ़कर 'वैश्विक भलाई' की ओर मुड़ गई है। पीएम मोदी ने साफ कहा कि समुद्री रास्तों (Freedom of Navigation) की सुरक्षा पूरी दुनिया के लिए जरूरी है। भारत अब एक निष्पक्ष और प्रभावी खिलाड़ी के रूप में उभरा है, जो न केवल शांति चाहता है बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि युद्ध की वजह से दुनिया की सप्लाई चेन न टूटे।

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