पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: वो अहम चेहरे जिनकी किस्मत दांव पर लगी है

आने वाले दिनों में जिन पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, उनमें सबसे ज़्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल के चुनाव की हो रही है.
इस बार पश्चिम बंगाल के चुनाव पर ख़ास नज़र इसलिए भी है क्योंकि केंद्र की सत्तारूढ़ बीजेपी, पश्चिम बंगाल में 10 साल से शासन कर रही तृणमूल कांग्रेस को सीधे-सीधे टक्कर देने के इरादे में है.
बीजेपी ने चुनाव के लिए अपना पूरा ज़ोर लगा दिया है और प्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह समेत कई केंद्रीय मंत्री लगातार बंगाल पहुंच रहे हैं.
वहीं, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी यहां तीसरी बार सरकार बनाने की उम्मीद से मैदान में उतरी हैं. 34 साल तक सत्ता में रहा लेफ्ट मोर्चा भी कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव में उतर रहा है.
पढ़िए, पश्चिम बंगाल विधान सभा से जुड़ी सभी अहम बातें.
पश्चिम बंगाल में चुनाव कब हैं?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 27 मार्च से शुरू होगा. मतदान आठ चरणों में 29 अप्रैल तक चलेगा जिसके बाद दो मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे.
इस बार चुनाव आठ चरणों में कराए जाने को लेकर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि ऐसा कर चुनाव आयोग बीजेपी को फायदा पहुंचा रही है.
वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि त्योहारों की वजह से और कोविड-19 प्रोटोकॉल के मद्देनज़र बढ़ाए गए पोलिंग स्टेशनों के चलते चुनाव आठ चरणों में कराए जाने का फ़ैसला लिया गया है.
वाम दलों ने भी कहा कि चुनाव आयोग के इन तर्कों में कोई दम नहीं है. हालाँकि बीजेपी ने चुनाव आयोग की घोषणा का स्वागत किया है और दावा किया है कि इस तरह से बंगाल में विधानसभा चुनाव निष्पक्ष तरीक़े से कराए जा सकेंगे.
कितनी सीटों पर चुनाव हो रहे हैं?
पश्चिम बंगाल विधानसभा की 294 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं.
किसी भी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए कुल सीटों की आधी से एक ज़्यादा यानी 148 सीटें चाहिए होंगी. यानी जीत तय करने वाला जादुई आंकड़ा है 148.
पश्चिम बंगाल में कितने वोटर हैं?
पश्चिम बंगाल 7,32,94,980 रजिस्टर्ड वोटर हैं.
किस चरण में कितनी सीटें?
मतदान के पहले चरण में 30 विधानसभा क्षेत्रों के लिए 27 मार्च, दूसरे चरण में 30 विधानसभा क्षेत्रों के लिए 1 अप्रैल, तीसरे चरण में 31 विधानसभा क्षेत्रों के लिए 6 अप्रैल, चौथे चरण में 44 विधानसभा क्षेत्रों के लिए 10 अप्रैल, पाँचवें चरण में 45 विधानसभा क्षेत्रों के लिए 17 अप्रैल, छठें चरण में 43 विधानसभा क्षेत्रों के लिए, 22 अप्रैल को, सातवें चरण में 36 विधानसभा क्षेत्रों के लिए 26 अप्रैल और आठवें चरण में 35 विधानसभा क्षेत्रों के लिए 29 अप्रैल को मतदान होगा.
कौन हैं मुख्य उम्मीदवार ?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कई बड़े चेहरे अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं.
बीजेपी ने अब तक पाँच सांसदों को टिकट दिया है. केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो को टॉलीगंज विधानसभा सीट से, हुगली से सांसद लॉकेट चटर्जी को चुंचुड़ा विधानसभा सीट से, कूचबिहार से सांसद निसिथ प्रामाणिक को दिनहाटा विधानसभा क्षेत्र से, राज्यसभा सदस्य स्वपन दासगुप्ता को तारकेश्वर सीट से और रानाघाट से बीजेपी सांसद जगन्नाथ सरकार को शांतिपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है.
इसके अलावा बीजेपी ने मुकुल रॉय, उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय और राहुल सिन्हा को भी टिकट दिया है.
पार्टी ने अभिनेत्री पारनो मित्रा को भी उम्मीदवार बनाया है. पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल रॉय कृष्णानगर उत्तर से और उनके बेटे शुभ्रांशु को बीजपुर से उम्मीदवार बनाया गया है.
राहुल सिन्हा हाबड़ा से चुनाव लड़ेंगे. पार्टी ने चुनावों में कलाकारों, खेल और सिनेमा जगत की हस्तियों और विभिन्न पेशेवरों को मैदान में उतारा है.
वहीं, तृणमूल कांग्रेस छोड़ हाल में बीजेपी में शामिल हुए शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम सीट से सूबे की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को टक्कर दे रहे हैं.
तृणमूल कांग्रेस की बात करें तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हर बार भवानीपुर से चुनाव लड़ती आई हैं, लेकिन इस बार वो हाई-प्रोफ़ाइल नंदीग्राम से अपनी किस्मत आज़मा रही हैं.
टीएमसी ने भी इस बार कई अभिनेताओं, गायकों, क्रिकेटरों, निर्देशकों को चुनावी मैदान में उतारा है. जैसे-क्रिकेटर मनोज तिवारी को शिबपुर से टिकट मिला है और अभिनेताओं में सायोनी घोष को आसनसोल दक्षिण, जून मलैया को मेदिनीपुर, सायंतिका बनर्जी तो बांकुरा और अभिनेत्री कंचन मलि को उत्तरपाड़ा निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया गया है.
इसके अलावा टीएमसी ने फिल्म निर्देशक राज चक्रवर्ती को बैरकपुर निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया है. लोक गायक अदिति मुंशी को उत्तर 24 परगना के राजरहाट गोपालपुर सीट पर उम्मीदवार बनाया गया है.
टीएमसी की लिस्ट में दो और दिलचस्प नाम हैं - रत्ना चटर्जी और सुजाता मंडल ख़ान, जो बीजेपी में शामिल अपने पतियों के ख़िलाफ़ चुनावी मैदान में उतर रही हैं. इनमें बीजेपी सांसद सौमित्र ख़ान की पत्नी सुजाता मंडल और बीजेपी नेता शोभन चटर्जी की पत्नी रत्ना चटर्जी शामिल हैं. दोनों ही उम्मीदवार अपने पतियों से अलग रह रही हैं.
वहीं वाम मोर्चा, कांग्रेस और आईएसएफ़ वाले गठबंधन ने कई अहम चेहरों पर दाँव लगाया है. इनमें पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेता नेपाल महतो अपनी मौजूदा सीट बाघमुंडी से चुनाव लड़ेंगे. आईएसएफ़ के अध्यक्ष सिमुल सोरेन हुगली ज़िले के हरिपाल से चुनाव लड़ेंगे.
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने इस बार कई युवा चेहरों को चुनाव में उतारा है, जिनमें जेएनयू की छात्र संघ अध्यक्ष 25 वर्षीय आइशी घोष जमुरिया सीट से उम्मीदवार के तौर पर लड़ेंगी. वहीं, डीवीएफ़आई की अध्यक्ष मीनाक्षी मुखर्जी नंदीग्राम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ेंगी.

मुख्य निर्वाचन क्षेत्र कौन से हैं?
पश्चिम बंगाल चुनाव में जिन विधान सभा सीटों पर सबकी नज़र रहेगी उनमें नंदीग्राम सीट सबसे प्रमुख है, जहां ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच कड़ी टक्कर है.
साथ ही जिन सीटों से बीजेपी के पांच सांसद लड़ रहे हैं वो भी नज़र में रहेंगी. इन सीटों में टॉलीगंज, चुंचुड़ा, दिनहाटा, तारकेश्वर, शांतिपुर विधानसभा सीट शामिल हैं.
इसके अलावा कृष्णानगर उत्तर सीट, जहां से पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल रॉय चुनाव लड़ रहे हैं. जमुरिया सीट पर भी नज़रें होंगी जहाँ से आइशी घोष चुनाव लड़ रही हैं.

चुनाव के प्रमुख मुद्दे क्या हैं?
सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और उसे कड़ी टक्कर दे रही बीजेपी, दोनों ने ही विकास को मुद्दा बनाया है.
बीजेपी के बड़े नेता अपने चुनाव प्रचार में पश्चिम बंगाल के लिए 'प्रगतिशील बांग्ला' और 'शोनार बांग्ला' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी रैलियों में 'आशोल पोरिबोरतोन' (असली परिवर्तन) की बात कर रहे हैं, यानी ऐसा बंगाल जहां ग़रीब से ग़रीब को भी आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिले.
उन्होंने कहा, "आशोल पोरिबोरतोन मतलब ऐसा बंगाल जहां हर क्षेत्र, हर वर्ग की विकास में बराबर की भागीदारी होगी."
विपक्ष, ममता सरकार के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा रहा है. ममता सरकार पर अम्फान रिलीफ़ फंड में गड़बड़ी जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं. साथ ही बीजेपी, बुआ-भतीजे की जोड़ी को भी निशाना बना रही है.
केंद्रीय मंत्री अमित शाह समेत बीजेपी के अन्य नेता लगातार अपने भाषणों में बनर्जी को 'तोलाबाज़ भाइपो' (बंगाली में इसका मतलब लुटेरा भतीजा) शब्द का इस्तेमाल कर उन पर हमला बोल रहे हैं और ग़लत तरीके़ से धन जमा करने का आरोप लगाते आ रहे हैं.
ममता बनर्जी और उनके भतीजे और डायमंड हार्बर सीट से लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी इन आरोपों का कड़े शब्दों में इनकार करते रहे हैं.
इसके अलावा बीजेपी के चुनाव में प्रमुख प्रतिद्वंदी बन जाने के बादे से हिंदुत्व कार्ड, ध्रुवीकरण और तुष्टिकरण के मुद्दे लोगों की ज़ुबान पर हैं. ममता बनर्जी बीजेपी के ख़िलाफ़ देश में महंगाई, गैस के बढ़े दाम और पेट्रोल डीज़ल के बढ़े दामों को मुद्दा बना रही है.
चुनाव में सभी दलों की नज़र मतुआ समुदाय पर है. उत्तरी बंगाल में क़रीब 70 विधानसभा सीटों पर इस समुदाय का प्रभाव है. इस समुदाय के लिए नागरिकता बड़ा मुद्दा है.
यहां एनआरसी-सीएए वैसा मुद्दा नहीं बना है जैसी उम्मीद की जा रही थी, बीजेपी ने भी इस मुद्दे को चुनावों में नहीं उठाया है.

नतीजे कब आएंगे?
मतदान संपन्न होने के बाद नतीजों की घोषणा रविवार, 2 मई 2021 को की जाएगी.
पश्चिम बंगाल के पिछले चुनाव में क्या हुआ था?
2016 के विधान सभा चुनाव में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने 211 सीटें जीतकर दो तिहाई बहुमत हासिल किया था. वहीं, बीजेपी को महज़ तीन सीटें मिली थीं.
लेफ्ट-कंग्रेस गठबंधन राजनीतिक पंडितों के अनुमान के मुताबिक़ कमाल नहीं कर पाया था और 77 सीटें ही जीत सका था. हालाँकि कांग्रेस ने 44 सीटें जीतकर अपने सहयोगी लेफ्ट दलों से बेहतर प्रदर्शन किया था.
2019 के आम चुनाव में बीजेपी ने 42 लोकसभा सीटों में से क़रीब आधी यानी 18 सीटें जीतकर पश्चिम बंगाल में बड़ी कामयाबी हासिल की और टीएमसी ने 22 सीटें जीती थीं, जबकि लेफ्ट एक भी सीट जीतने में नाकाम रही.
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