Waqf Amendment Bill: वक्फ संशोधन विधेयक पर अंतिम समय में क्या करेगी JDU और TDP? BJD देगी किसका साथ?

Waqf Amendment Bill: वक्फ संशोधन विधेयक पर लोकसभा में बहस शुरू हो चुकी है। हालांकि, बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के पास लोकसभा और राज्यसभा में आवश्यक संख्या बल है, लेकिन जेडीयू और टीडीपी जैसे सहयोगी दलों का अंतिम रुख इसके लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।

इसी तरह से नवीन पटनायक की बीजू जनता दल (BJD) का रुख समझना भी काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले दो कार्यकालों में इस तरह के सभी अहम विधेयकों पर विपक्ष में रहते हुए भी बीजेडी मोदी सरकार का साथ देती रही है।

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Waqf Amendment Bill: जेडीयू और टीडीपी का क्या होगा आखिरी दांव?

नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) और चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (TDP) पारंपरिक रूप से मुस्लिम वोटरों पर भी निर्भर रही हैं। ऐसे में दोनों दलों के लिए इस विधेयक पर समर्थन या विरोध का फैसला राजनीतिक नजरिए से बेहद नाजुक हो गया है।

सूत्रों के अनुसार, जेडीयू और टीडीपी संसद में विधेयक का समर्थन करने वाली हैं। ऐसा भी कहा जा रहा है कि विधेयक को लेकर इन दोनों की आपत्तियों को सरकार ने संशोधन विधेयक में शामिल कर लिया है।

मसलन, टीडीपी इस बात पर जोर दे रही है कि वक्फ बोर्ड में गैर-मुसलमानों को सदस्य बनाए जाने से संबंधित प्रावधान में बदलाव किए जाएं। वहीं, जेडीयू इस विधेयक के 'पूर्वप्रभाव'से लागू करने (Retrospective Implementation) को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज करा चुकी है।

Waqf Bill: विधेयक के 'पूर्वप्रभाव' से लागू करने का मुद्दा क्या है?

मौजूदा वक्फ अधिनियम, 1995 में 'वक्फ बाय यूजर' (Waqf by user) का प्रावधान है, जिसके तहत कोई संपत्ति यदि लंबे समय से धार्मिक या परोपकारी कार्यों के लिए इस्तेमाल हो रही है, तो वह खुद-ब-खुद वक्फ घोषित की जा सकती है, भले ही उसके लिए औपचारिक दस्तावेज उपलब्ध न हों।

नए संशोधन में इस प्रावधान को हटाने के प्रस्ताव की बात है, जिससे आशंका जताई जा रही है कि इससे वर्षों से चली आ रही वक्फ संपत्तियों की कानूनी स्थिति पर प्रश्नचिह्न लग सकता है। आशंका जताई गई है कि इससे उन संपत्तियों पर कानूनी विवाद बढ़ सकते हैं, जिन्हें दशकों से वक्फ माना जाता रहा है। खासकर बिहार जैसे राज्यों में यह मुद्दा संवेदनशील है, क्योंकि वहां इसी साल विधानसभा चुनाव भी होने हैं।

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जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, 'नीतीश कुमार ने सबसे पहले भाजपा नेतृत्व को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के माध्यम से विधेयक की समीक्षा के लिए राजी किया था। इस समीक्षा प्रक्रिया में सभी दलों को प्रतिनिधित्व मिला और कई विवादित प्रावधानों पर विचार किया गया। जेडीयू ने विधेयक के 'पूर्वप्रभावी' पर खुलकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है और केंद्र सरकार ने भरोसा दिया है कि यह 'पूर्वप्रभाव' लागू नहीं किया जाएगा।'

Waqf Bill kya hai: क्या अंतिम समय में बदल सकता है फैसला?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेडीयू और टीडीपी, दोनों ही अपने मुस्लिम वोट बैंक को देखते हुए अंतिम समय में अपना रुख बदल भी सकते हैं। हालांकि, अभी तक इन दोनों दलों ने विधेयक के पूर्ण समर्थन का संकेत दिया है और यही वजह है कि मोदी सरकार ने इसपर अब बहुत ही सकारात्मक मनोबल के साथ कदम बढ़ाया है। लेकिन, अटकलें ये भी हैं कि दबाव बढ़ने पर ये दल संसद में अपनी रणनीति बदल भी सकते हैं।

Waqf Bill: बीजेडी का खुला विरोध

ओडिशा की नवीन पटनायक की बीजू जनता दल (बीजेडी) ने साफ कर दिया है कि वह इस विधेयक का विरोध करेगी। बीजेडी का कहना है कि यह विधेयक राज्य सरकार को वक्फ संपत्तियों पर अत्यधिक नियंत्रण प्रदान करता है, जिससे विवाद समाधान प्रक्रिया में अस्पष्टता आ सकती है।

बीजेडी के राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा ने कहा, 'बीजेडी सरकार से यह मांग करती है कि वह विधेयक के प्रावधानों की फिर से समीक्षा करे और इसमें आवश्यक सुरक्षा उपाय जोड़े, ताकि वक्फ संपत्तियों का पारदर्शी और निष्पक्ष प्रशासन सुनिश्चित किया जा सके।'

बीजेडी का मानना है कि संशोधन के बाद भी यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के मनमाने वर्गीकरण को रोकने में सक्षम नहीं है और इसमें एक स्वतंत्र अपीलीय तंत्र (Appellate Mechanism) का अभाव है। इसके अलावा, राज्य सरकार को वक्फ भूमि की स्थिति तय करने का अधिकार देने से सरकारी हस्तक्षेप की संभावना बढ़ जाती है।

बीजेडी का कहना है कि वक्फ संस्थानों के लिए कानूनी और प्रशासनिक सहायता की व्यवस्था न होने से वे नौकरशाही के चंगुल में फंस सकते हैं और इस वजह से पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। नवीन पटनायक की पार्टी ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा, 'बीजेडी संविधान प्रदत्त धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता के पक्ष में खड़ी है और इसीलिए इस विधेयक का विरोध करेगी।'

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