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नज़रियाः 'लालू की राजनीतिक हैसियत पहले जैसी नहीं रही'

By उर्मिलेश - वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंद

लालू प्रसाद यादव
Getty Images
लालू प्रसाद यादव

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता लालू प्रसाद यादव के ठिकानों की सीबीआई ने तलाशी ली है.

भ्रष्टाचार के आरोपों पर लालू प्रसाद यादव ने शुक्रवार को सफाई देते हुए कहा कि 'उन्हें प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के कहने पर निशाना बनाया जा रहा है.'

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साथ ही उन्होंने बिहार में गठबंधन में दरारों से इनकार किया है, लेकिन ये मामला तूल पकड़ता है तो नीतीश कुमार की सरकार और राजद के बीच एक मतभेद की स्थिति आ सकती है.

नीतीश कुमार ये कह सकते हैं कि कथित तौर पर जो दाग़ी हैं वो इस्तीफ़ा दे दें और सरकार में दूसरे लोग रहें.

नीतीश और लालू
Reuters
नीतीश और लालू

राष्ट्रीय राजनीति पर फ़र्क नहीं पड़ेगा

हालांकि राजद और जदयू के बीच गठबंधन में फिलहाल कोई समस्या नहीं आने वाली है लेकिन नैतिकता के तकाज़े को लेकर इस्तीफ़े की बात आ सकती है.

तब ये देखना होगा कि लालू उस स्थिति में क्या करते हैं.

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उस स्थिति में बिहार की राजनीति पर इसका प्रभाव पड़ना लाज़िमी है. लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में इसका बहुत कम फ़र्क पड़ने वाला है.

इसकी बड़ी वजह है कि अब राजद और लालू यादव की राष्ट्रीय राजनीति में पहले जैसी हैसियत नहीं रही.

इसका सबसे बड़ा दारोमदार इस बात निर्भर करता है कि बिहार में उनकी क्या स्थिति रहती है.

लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी
Getty Images
लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी

बदले की भावना से कार्रवाई

अगर उनके समर्थक उनका साथ नहीं छोड़ते हैं और लालू उन्हें इस आधार पर संगठित करने में सफल रहते हैं कि उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है तो बिहार में उनकी स्थिति मज़बूत हो सकती है.

लालू यादव अगर इस बात को कह रहे हैं कि बदले की भावना से कार्रवाई हो रही है और ये दलितों, पिछड़ों को निशाना बनाने की नीति है तो ये कोई नई बात नहीं है.

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इससे पहले भी बहुत सारे दलित पिछड़े नेता रहे हैं, उनके साथ ऐसी स्थियां कभी नहीं रहीं.

लेकिन ये बात ज़रूर है कि जिन लोगों के पास सीबीआई जैसी संस्थाएं रहती हैं वे आम तौर पर उन लोगों को निशाना बनाते हैं जो उनकी राजनीति को चुनौती लायक हैं.

इस लिहाज से उन लोगों ने लालू प्रसाद यादव को निशाना बनाया है, इसमें कोई दो राय नहीं है.

लालू ने समर्पण नहीं किया

लेकिन लालू यादव को इसके लिए क्लीन चिट नहीं दी जा सकती है.

हमाम में सभी नंगे हैं और यही कारण है कि बहुत सारे नेता खासकर उत्तर प्रदेश के नेता डरे हुए हैं और केंद्र के सामने समर्पण कर देते हैं.

लेकिन लालू प्रसाद ने उनके सामने समर्पण नहीं किया और शायद इसी का ख़ामियाजा उनको भुगतना पड़ रहा है.

ऐसी स्थिति में न तो भ्रष्टाचार को जायज ठहराया जा सकता है और ना ही चुनिंदा तरीक़े से निशाने बनाने को जायज ठहराया जा सकता है.

(बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी से बातचीत पर आधारित)

BBC Hindi
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English summary
View: 'Lalu's political status is not the same as before'.
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