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Vishnu Tiwari: जेल की दीवारें खा गई जवानी, मजदूरी करने को मजबूर विष्णु ने क्यों उठाए New UGC Act पर सवाल?

Vishnu Tiwari on UGC New Rule 2026: एक बेगुनाह इंसान के लिए जवानी के 20 साल किसी कालकोठरी में गुजार देना कैसा होता है... इसकी कल्पना भी रूह कंपा देने वाली है। उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले का एक शख्स जब दो दशक बाद जेल की सलाखों से बाहर निकला, तो उसके पास न तो सिर छिपाने को छत थी और न ही उसका हाथ थामने वाला कोई अपना।

एक झूठे बलात्कार और SC/ST एक्ट के मुकदमे ने उस युवक से उसका पूरा संसार छीन लिया, जिसे सालों बाद अदालत ने पूरी तरह बेगुनाह पाया। आज वही शख्स देश में UGC के नए नियमों (UGC New Rule 2026) को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच एक चेतावनी बनकर सामने आया है। उनका कहना है कि अगर कानून की आड़ में शिकायतों की सही जांच न हुई, तो समाज में उनके जैसे कई और जिंदा लाश पैदा हो जाएंगे। यह दर्दनाक दास्तां विष्णु तिवारी की है, जिनकी आंखों में आंसू और जुबां पर व्यवस्था के प्रति गहरा मलाल है।

Vishnu Tiwari on UGC New Rule 2026

Vishnu Tiwari: एक झूठा केस उम्र को निगल गया

विष्णु तिवारी आज अपनी कहानी सुनाते हुए उन जख्मों को कुरेदते हैं जो कभी भर नहीं सकते। वे कहते हैं कि उन्होंने उस कानून की मार सही है जो बिना सच्चाई जाने किसी को भी अपराधी घोषित कर देता है।

बर्बाद जवानी: विष्णु कहते हैं, "मेरी पूरी जिंदगी एक गलत आरोप ने लील ली। जब मुझे घर बसाना था, तब मैं जेल में सड़ रहा था।"

UGC नियमों पर सवाल: नए नियमों को लेकर उनकी चिंता जायज है। वे कहते हैं कि कानून डर पैदा करने के लिए नहीं, बल्कि इंसाफ के लिए होना चाहिए।

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Who is Vishnu Tiwari: कौन हैं विष्णु तिवारी?

यूपी के बुंदेलखंड के ललितपुर के रहने वाले विष्णु पर जमीन और गाय से जुड़े एक विवाद के बाद गंभीर धाराएं लगा दी गई थीं। इस झूठे केस के कारण उन्हें 20 साल तक जेल में रहना पड़ा। जब वे जेल से बाहर आए तो उनका सब कुछ खत्म हो चुका था। उनके माता पिता और दो भाइयों की मौत हो चुकी थी। घर गिर गया था और खेती बारी सब बर्बाद हो गई थी। विष्णु का कहना है कि उनकी जवानी के वो दिन कोई वापस नहीं लौटा सकता जो जेल की अंधेरी कोठरी में बीत गए।

रिहाई मिली, पर घर-संसार सब उजड़ गया

अदालत का फैसला विष्णु के पक्ष में जरूर आया, लेकिन जब वे गांव लौटे तो पीछे कुछ नहीं बचा था। जेल की काली रातों के बीच उनके माता-पिता और दो सगे भाइयों की मौत हो गई। वे अपनों को आखिरी विदाई तक नहीं दे पाए। घर गिर चुका था और खेती की जमीन भी हाथ से निकल गई। हैरानी की बात यह है कि 20 साल बाद बाहर आने पर भी उन्हें कोई आर्थिक मदद नहीं मिली। आज वे दाने-दाने को मोहताज हैं और मजदूरी कर अपना गुजारा कर रहे हैं।

Vishnu Tiwari: कैसे शुरू हुई थी यह बर्बादी?

इस पूरी तबाही की जड़ बुंदेलखंड इलाके में जमीन और मवेशियों को लेकर हुआ एक मामूली विवाद था। मामूली कहासुनी के बाद विष्णु पर बलात्कार जैसी संगीन धाराएं थोप दी गईं। निचली अदालत से लेकर ऊपरी अदालत तक का सफर तय करने में 20 साल लग गए। जब हाईकोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट और सबूतों को दोबारा देखा, तो पाया कि केस पूरी तरह फर्जी था।

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