Supreme Court: 'PIL या पैसा इंटरेस्ट लिटिगेशन', SC की जज ने जनहित याचिकाओं पर क्यों उठाए सवाल
Supreme Court judge Justice BV Nagarathna: सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बीवी नागरत्ना ने जनहित याचिकाओं (PIL) के दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह एक शक्तिशाली कानूनी हथियार था,जिसे समाज में अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए विकसित किया गया था, लेकिन अब कुछ लोगों की गलत नीयत के कारण इसे संदेह की नजर से देखा जाने लगा है।
उन्होंने कहा कि पीआईएल कभी एक 'पुण्य हथियार' था, जो कमजोर और वंचित लोगों को न्याय दिलाने का एक प्रभावी माध्यम था। लेकिन आज यह मूल उद्देश्य से भटकता जा रहा है।

Supreme Court: 'पीआईएल, पैसा इंटरेस्ट लिटिगेशन', 'पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन', 'प्राइवेट इंटरेस्ट लिटिगेशन' बन गया है'
जस्टिस नागरत्ना ने कहा,'पीआईएल,अगर मैं इसे आम बोलचाल की भाषा में कहूं, तो यह 'पैसा इंटरेस्ट लिटिगेशन', 'पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन', 'प्राइवेट इंटरेस्ट लिटिगेशन' बन गया है।' मतलब, अब कई लोग इसका उपयोग निजी स्वार्थ, सस्ती लोकप्रियता और कमाई के लिए करने लगे हैं।
उन्होंने यह बातें ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा प्रकाशित लॉ, जस्टिस, सोसाइटी: सेलेक्टेड वर्क्स ऑफ उपेंद्र बक्षी (Law, Justice, Society: Selected Works of Upendra Baxi) नामक पुस्तक के विमोचन के दौरान कहीं।
Supreme Court: PIL का सही उपयोग क्यों जरूरी?
जस्टिस नागरत्ना ने इस बात पर जोर दिया है कि पीआईएल को सामाजिक हित से जुड़े मामलों में ही दायर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध विधिवेत्ता प्रोफेसर उपेंद्र बक्सी ने पीआईएल को 'सामाजिक कार्रवाई याचिका' (Social Action Litigation) के रूप में परिभाषित किया था।
उनका मानना था कि यह एक ऐसा साधन है, जिससे सरकार और राज्य को जवाबदेह बनाया जा सकता है और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा की जा सकती है।
Supreme Court PIL: मौजूदा समय में जनहित याचिकाओं को निहित स्वार्थ में हो रहा गलत इस्तेमाल- सुप्रीम कोर्ट की जज
लेकिन मौजूदा समय में पीआईएल का कई बार दुरुपयोग किया जाता है। न्यायपालिका पर दबाव डालने, राजनीतिक या निजी फायदे के लिए इसे हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके कारण असली जनहित से जुड़े मामलों पर असर पड़ता है और न्याय प्रणाली पर अनावश्यक बोझ बढ़ता है सो अलग।
Supreme Court PIL: पीआईएल का दुरुपयोग रोकने के लिए क्या किया जाए?
जस्टिस नागरत्ना ने सुझाव दिया कि अब समय आ गया है कि जनहित याचिकाओं के सही इस्तेमाल पर दोबारा विचार किया जाए और इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त दिशानिर्देश तय किए जाएं। उन्होंने कहा कि जनहित याचिकाओं को केवल उन्हीं मामलों में दायर किया जाना चाहिए, जहां वास्तव में समाज के एक बड़े वर्ग के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा हो।
उन्होंने प्रोफेसर बक्सी की सराहना करते हुए कहा कि उनके लेखन ने भारतीय संविधान को न्याय, सुशासन और सामाजिक परिवर्तन के एक सशक्त दस्तावेज के रूप में देखने की प्रेरणा दी है।
जनहित याचिकाओं(PIL) का सही और न्यायसंगत उपयोग समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के लिए एक वरदान हो सकता है, लेकिन इसके दुरुपयोग से यह अपने उद्देश्य से भटक सकता है। इसलिए, न्यायपालिका और समाज दोनों को मिलकर इसके सार्थक और प्रभावी उपयोग पर जोर देना चाहिए। (इनपुट-पीटीआई)












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