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Supreme Court ने कस्टम्स और GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति को रखा बरकरार, जानिए क्या कहा

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित सीमा शुल्क और जीएसटी कानूनों के तहत गिरफ्तारी की शक्ति को वैध करार दिया है। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अगर गिरफ्तारी की स्पष्ट आशंका हो, तो व्यक्ति पहले से ही जमानत के लिए आवेदन कर सकता है, भले ही एफआईआर दर्ज न हुई हो।

करीब 280 याचिकाओं में जीएसटी और सीमा शुल्क अधिनियम के तहत गिरफ्तारी के प्रावधानों को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि ये कानून संविधान और आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के खिलाफ हैं।

Supreme Court

हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया और अधिकारियों को गिरफ्तारी की शक्ति देने वाले प्रावधानों को सही ठहराया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन शक्तियों का इस्तेमाल कुछ निश्चित परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए।
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गिरफ्तारी के लिए स्पष्ट नियम बनाए

न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी ने अपने अलग फैसले में मुख्य न्यायाधीश की राय से सहमति जताई। अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गिरफ्तारी के मामलों में उचित सुरक्षा दी गई है।

अदालत ने यह भी साफ किया कि अधिकारियों को गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी तुरंत देनी होगी और व्यक्ति को पूछताछ के दौरान कानूनी सहायता लेने की अनुमति दी जानी चाहिए।

सीमा शुल्क अधिनियम में हुए संशोधन

सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में ओम प्रकाश बनाम भारत संघ मामले का जिक्र करते हुए बताया कि उसके बाद सीमा शुल्क अधिनियम में कई संशोधन किए गए।

  • 2012, 2013 और 2019 में किए गए बदलावों में कुछ अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती घोषित किया गया।
  • इन संशोधनों के तहत अधिकारियों को मजिस्ट्रेट के वारंट के बिना भी गिरफ्तारी की अनुमति दी गई।
  • अदालत ने कहा कि अब पुराने फैसलों पर निर्भरता की जरूरत नहीं है।

जीएसटी अधिनियम की भी पुष्टि

सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के जीएसटी अधिनियम के तहत सरकार को दी गई गिरफ्तारी की शक्ति को भी बरकरार रखा।

  • अदालत ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 246A केंद्र और राज्यों को जीएसटी से जुड़े कानून बनाने का अधिकार देता है।
  • इसमें कर चोरी के खिलाफ कार्रवाई भी शामिल है।
  • अदालत ने कहा कि समन, गिरफ्तारी और अभियोजन जैसी शक्तियां जीएसटी कानून को लागू करने के लिए जरूरी हैं।

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