Shubhanshu Shukla को लेकर अंतरिक्ष गया Falcon 9 रॉकेट क्या है? एक बार उड़ान में कितना खर्चा?
Shubhanshu Shukla Axiom-4 Space Mission Expense: भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने 25 जून 2025 को Axiom-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए उड़ान भरकर इतिहास रच दिया। फ्लोरिडा के नासा कैनेडी स्पेस सेंटर से SpaceX के Falcon 9 रॉकेट और नए ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट ने भारतीय समयानुसार दोपहर 12:01 बजे उड़ान भरी।
यह मिशन 26 जून को शाम 4:30 बजे ISS से जुड़ेगा और 14 दिनों तक वहां रहेगा। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि इस रॉकेट को एक बार अंतरिक्ष में भेजने की लागत कितनी है? रकम जानकर आप दंग रह जाएंगे! आइए जानते हैं...

Falcon 9 और Crew Dragon की लागत का खुलासा
SpaceX के Falcon 9 रॉकेट और Crew Dragon कैप्सूल के साथ एक मानवयुक्त मिशन की कुल अनुमानित लागत लगभग 140 मिलियन डॉलर (लगभग 1,170 करोड़ रुपये) है। इसमें रॉकेट, कैप्सूल, लॉन्च सेवाएं, सुरक्षा प्रणालियां, और लाइफ-सपोर्ट सिस्टम की लागत शामिल है। गैर-मानवयुक्त (कार्गो) मिशनों की तुलना में मानव मिशन ज्यादा महंगे होते हैं, क्योंकि इनमें अतिरिक्त सुरक्षा और जीवन रक्षक उपकरणों की जरूरत होती है।
प्रति सीट कितना खर्च?
नासा के Office of Inspector General (OIG) के अनुसार, Crew Dragon की शुरुआती मिशनों में प्रति सीट लागत लगभग 55 मिलियन डॉलर थी। हाल के कॉन्ट्रैक्ट्स (Crew-7 से Crew-14) में यह बढ़कर 65-72 मिलियन डॉलर प्रति सीट हो गई है। Axiom Space जैसे निजी मिशनों में भी प्रति सीट लागत 55-65 मिलियन डॉलर के बीच रहती है।
तुलना में कहां खड़ा है Falcon 9?
| स्पेसक्राफ्ट | प्रति सीट लागत (USD) |
| Crew Dragon (शुरुआती) | लगभग $55 मिलियन |
| Crew Dragon (हालिया) | $65-72 मिलियन |
| Soyuz (रूस) | लगभग $80-86 मिलियन |
| Boeing Starliner | लगभग $90 मिलियन |
Crew Dragon की लागत रूसी Soyuz और Boeing Starliner की तुलना में 30-40% कम है, जो इसे लागत-कुशल बनाता है। Falcon 9 की उपयोगिता (reusability) लागत को और कम करती है, क्योंकि इसका पहला चरण (first stage) लॉन्च के बाद वापस धरती पर उतर जाता है।
क्यों खास है यह मिशन?
Axiom-4 मिशन नासा और इसरो के सहयोग का हिस्सा है, जिसमें शुभांशु शुक्ला सहित चार अंतरिक्ष यात्री (पेगी व्हिटसन, स्लावोस उज्नांस्की-विस्निव्स्की, और टिबोर कपु) 60 वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे, जिनमें 7 भारतीय शोधकर्ताओं के हैं। यह मिशन भारत के गगनयान कार्यक्रम और भविष्य के अंतरिक्ष स्टेशन के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
Falcon 9 और Crew Dragon के साथ एक मिशन की लागत भले ही अरबों में हो, लेकिन इसकी उपयोगिता और सुरक्षा इसे अंतरिक्ष यात्रा का भविष्य बनाती है। शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा न केवल भारत के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अंतरिक्ष अब सिर्फ सपना नहीं, बल्कि हकीकत है।
(इनपुट- न्यूर्याक की syfy मीडिया, स्पेस डॉट कॉम)
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