कोली को फांसी देने की प्रेक्टिस करता जल्लाद पवन
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) हालांकि सु्प्रीम कोर्ट ने निठारी कांड के गुनाहगार सुरेन्द्र कोली की फांसी पर फिलहाल रोक लगा दी है, पर किसी सफल पेशेवर की तरह से जल्लाद पवन कुमार अपने बड़े काम से पहले जमकर प्रेक्टिस कर रहा है।

फांसीघर का निरीक्षण
उसने शनिवार और फिर रविवार को मेरठ जेल में नोएडा के निठारी कांड के गुनाहगार सुरेंद्र कोली को फांसी देने की प्रेक्टिस की। उसने एक पुतले को फाँसी पर लटकाया।
जानकारों ने बताया कि जब वह अपने काम को अंजाम दे रहा था तो वह विश्वास से लबरेज लग रहा था। कोली को 12 सितंबर से पहले फांसी दी जानी है। पवन कुमार से रविवार को मेरठ पुलिस के आला अफसरों से जेल में बात की। जल्लाद पवन ने फांसीघर का निरीक्षण किया । उसे पुलिस उसके घर से लेकर आई थी।
पुश्तैनी पेशा
जल्लाद का काम पवन कुमार का पुश्तैनी पेशा है। इस बीच, कोली को फांसी को सही तरह से अंजाम देने के लिए प्रदेश का पुलिस महकमा सारी व्यवस्था कर रहा है। कोली को मेरठ जेल में फांसी दी जानी है। पवन कुमार के पिता मम्मू और दादा कल्लू भी जल्लाद थे।
पवन का परिवार चार पीढ़ियों से जल्लाद का काम कर रहा है। दादा कल्लू जल्लाद ने 1981में रंगा और बिल्ला को फांसी दी थी। इंदिरा गांधी के हत्यारे सतवंत सिंह और केहर सिंह को भी कल्लू जल्लाद ने ही फांसी का फंदा पहनाया था। उसके दादा कल्लू ने राजधानी के सत्तर के दशक में हुए गीता-संजय चोपड़ा के हत्यारों को फांसी दी थी।
40 साल के बाद फांसी
जब कोली को मेरठ जेल में फांसी दी जाएगी तो करीब 40 साल के बाद इधर फिर किसी को फांसी पर लटकाया जाएगा। यहां की जेल में फांसी पर लटकने वाला कोली 18वां अपराधी होगा।
मेरठ जेल में 1951 में पहली फांसी दी गई थी। नैनीताल के काशीपुरा निवासी रूपकिशोर को यह फांसी दी गई थी। मेरठ जेल में आखिरी फांसी साल 1975 में कर्मसिंह निवासी मुजफ्फरनगर को दी गई थी।












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