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Odisha Lok Sabha Chunav: बीजेडी के सबसे मजबूत वोट बैंक में सेंध लगा पाएगी बीजेपी?

Odisha Lok Sabha Election: नवीन पटनायक 24 साल से ओडिशा की सत्ता में हैं तो उसका सबसे बड़ा कारण है, महिला मतदाताओं के बीच बीजेडी का जबर्दस्त जनाधार। भाजपा इस बार ओडिशा के लोकसभा और विधानसभा दोनों ही चुनावों में तख्तापलट करने के मंसूबे के साथ चुनाव मैदान में है।

ओडिशा में इस साल 1.69 करोड़ पुरुष और 1.64 करोड़ महिला मतदाता हैं। ओडिशा में चुनावों की शुरुआत चौथे चरण यानी 13 मई से हुई है। उस दिन 4 लोकसभा सीटों पर वोट पड़े थे। इन चारों सीटों पर चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक कुल 75.7% वोटिंग हुई। इसमें महिलाओं ने बाजी मारी। इस चरण में 76.1% महिलाओं ने वोट दिए, जबकि पुरुषों का मतदान प्रतिशत 75.3% रहा।

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ओडिशा में बीजेडी की ताकत 'मिशन शक्ति'
अब बीजेडी सरकार के बैकग्राउंड में चलते हैं। 2001 में सत्ता में आने के एक साल बाद नवीन पटनायक सरकार ने 'मिशन शक्ति योजना' लागू की थी। इस योजना के तहत राज्य सरकार महिला स्वयं-सहायता समूह (एसएचजी) की सदस्यों को आर्थिक गतिविधियों और जीवन-यापन के लिए बिना ब्याज के लोन देती है।

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70 लाख वोटरों का बना-बनाया जनाधार!
इस स्वयं-सहायता समूह से 70 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जिनके दम पर पटनायक छठी बार सरकार में आने का दम भर रहे हैं। ढाई दशकों से ये महिलाएं बीजू जनता दल की वफादार वोटर बनी हुई हैं। इस बार बीजेडी ने वादा किया है कि सत्ता में आने पर एसएचजी की 60 वर्ष से ऊपर की सद्सयों को वह पेंशन भी देगी।

बीजेडी को राज्य में महिलाओं का किस तरह से समर्थन मिलता है यह पार्टी की रैलियों और रोडशो में उनकी तादाद को देखकर समझा जा सकता है।

राज्य की 21 लोकसभा और 147 विधानसभा सीटों के लिए अबतक दो चरणों में लगभग आधी सीटों पर वोटिंग हो चुकी है। बाकी सीटों पर बाकी के दो चरणों में यानी 25 मई और 1 जून को मतदान होना है। बीजू जनता दल को पक्का यकीन है कि जब तक उसे महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्यों का आशीर्वाद है, उसे कुर्सी से कोई हिला भी नहीं सकता।

बीजेडी के वोट बैंक में सेंध लगा पाएगी बीजेपी?
एक बीजेडी नेता ने कहा, 'यहां बीजेपी तबतक अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकती, जबतक बीजेडी की महिला जनाधार में सेंध नहीं लगा सकेगी।' नवीन पटनायक की पार्टी खुलकर मानती है कि महिलाएं ही उनके दल की सबसे बड़ा जनाधार हैं।

सिर्फ मिशन शक्ति ही नहीं है। नवीन सरकार ने पंचायती राज और शहरी निकायों में महिलाओं को 50% आरक्षण भी सुनिश्चित किया है। बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना के तहत उन्हें 10 लाख रुपए तक की स्वास्थ्य देखभाल की भी व्यवस्था की जाती है। पार्टी ने इस चुनाव में पिछली बार के 19 के मुकाबले 35 महिलाओं को विधानसभा चुनावों में टिकट भी दिया है।

भाजपा ने महिला वोट बैंक के लिए चला है 'सुभद्रा योजना' कार्ड
बीजेडी के इस जनाधार में सेंध लगाने के लिए भाजपा 'सुभद्रा योजना' का वादा लेकर आई है। इसके तहत राज्य की महिलाओं को दो वर्षों में 50,000 रुपए दिए जाएंगे।

पार्टी इसे राज्य में सत्ता में आने के तुरंत बाद लॉन्च करने का वचन दे रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी हर सभा में इस योजना का जिक्र कर रहे हैं। भाजपा एक कार्ड बांटकर महिलाओं को इस योजना का लाभ उठाने के लिए अपना पूरा विवरण डालने को भी कह रही है।

25 लाख 'लखपति दीदी' बनाने का भी बीजेपी ने किया वादा
इसके अलावा पार्टी 2027 तक प्रत्येक 500 स्वयं-सहायता समूह के लिए एक इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित करने का भी वादा कर रही है, जिससे 25 लाख 'लखपति दीदी' बनाने में सहायता मिलेगी। इस मोर्चे पर भाजपा के लिए एक सफलता ये है कि चुनाव आयोग ने ओडिशा के सीएम के सबसे खास और पूर्व आईएएस वीके पांडियन की पत्नी को मिशन शक्ति विभाग से भी ट्रांसफर कर दिया है।

हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक हालिया इंटरव्यू में पांडियन ने भाजपा पर तंज कसते हुए दावा किया है कि कोई भी रेवड़ी 'उस बंधन को नहीं तोड़ सकता है', जो महिलाओं का नवीन पटनायक के साथ है।

भाजपा आदिवासी वोटरों को बनाना चाहती है बड़ा हथियार
लेकिन, बीजेडी के इस जनाधार के काट के लिए बीजेपी के पास एक और बहुत बड़ा हथियार है, यह हैं आदिवासी और उनमें भी महिला। ओडिशा में आदिवासियों की जनसंख्या 22.85% है, जो कि देश में तीसरे नंबर पर है। 21 लोकसभा सीटों में से 5 और 147 विधानसभा क्षेत्रों में से 34 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है।

आदिवासी वोटरों के लिए बीजेपी के पास है राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कार्ड!
इनके लिए भाजपा की मास्टर कार्ड हैं देश की पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू। वह ओड़िया भी हैं, आदिवासी भी हैं और सबसे बड़ी बात कि वह महिला हैं। अबतक ओडिशा का आदिवासी बेल्ट सत्ताधारी दल का गढ़ रहा है। लेकिन, भाजपा की नजर अब इसपर पड़ चुकी है।

2022 के जुलाई में मुर्मू राष्ट्रपति बनीं और प्रधानमंत्री ने गुजरात में कहा कि उनकी सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि एक 'आदिवासी बेटी' देश की राष्ट्रपति बने। उसी साल दिसंबर में हुए गुजरात विधानसभा चुनावों में राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में भी भाजपा को जबर्दस्त सफलता मिली, जहां कांग्रेस का दबदबा उससे पहले तक कायम था।

नवंबर, 2023 में जब छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव हो रहे थे तो बड़े-बड़े चुनाव विश्लेषक टीवी चैनलों पर रट लगा रहे थे कि कांग्रेस सरकार की वापसी पहले से तय है। लेकिन, पीएम मोदी वहां मतदाताओं से अपील करते रहे कि कांग्रेस को सजा दें, क्योंकि उसने द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी का विरोध कर 'पूरे आदिवासी समाज का अपमान' किया है, भाजपा की पांच साल बाद ही धमाकेदार वापसी हो गई।

इसी महीने नबरंगपुर और बेरहामपुर की रैलियों में पीएम मोदी ने कहा, 'हमने इस देश को पहला आदिवासी राष्ट्रपति दिया है, जो ओडिशा की एक बेटी हैं। यह मेरा सौभाग्य है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी ओडिशा के विकास में मुझे बारीकी से सलाह देती हैं। मुझे विश्वास है कि मैं उनके मार्गदर्शन में यह कर सकता हूं।'

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