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Nimisha Priya की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, 'अगर ऐसा हुआ तो यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण होगा'

Nimisha Priya: सुप्रीम कोर्ट में यमन में फांसी की सजा झेल रही निमिशा प्रिया के मामले की सुनवाई सोमवार को हुई। जस्टिस संदीप मेहता ने इस केस की सुनवाई करते हुए कहा कि अगर ऐसा होता है, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होगा। सु्प्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 18 जुलाई की रखी है। याचिकाकर्ता के वकील के अलावा इस मामले में भारत सरकार के एजीआई ने भी अपना पक्ष रखा है।

कोर्ट ने भारत सरकार और निमिशा के वकील दोनों ही पक्षों को अगली सुनवाई में पूरी तैयारी और दस्तावेजों के साथ आने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल (AGI) ने कहा कि यह बेहद उलझा हुआ केस है।

Nimisha Priya

Nimisha Priya मामले पर बोले AGI, 'उलझा हुआ केस है'

मामले की सुनवाई के दौरान भारत के अटॉर्नी जनरल (AGI) ने कहा कि यह एक अत्यंत जटिल मामला है। इस केस में भारत सरकार की हस्तक्षेप करने की क्षमता सीमित है। एजीआई ने कहा, 'हमारे लिए यह जानना असंभव है कि यमन में वास्तव में क्या हो रहा है।' इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि अगर निमिशा प्रिया की जान चली गई तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होगा। बता दें कि निमिशा को हूतियों की सर्वोच्च न्यायिक परिषद ने फांसी की सजा सुनाई है।

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ब्लड मनी के विकल्पों पर विचार कर रही है सरकार

मामले में निमिशा के वकील और AGI की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई 18 जुलाई के लिए तय की है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित पक्ष अगली तारीख को मामले से जुड़ी सभी नए अपडेट अदालत को बताएंगे। सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार यमन के अधिकारियों के साथ 'खून का पैसा' (ब्लड मनी) समझौते की संभावना तलाश रही है। यमन में शरिया कानून लागू है, जिसके तहत ब्लड मनी के जरिए जान बख्शी जा सकती है। इसके तहत पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद देकर माफी ली जा सकती है, लेकिन इसके लिए पीड़ित परिवार का राजी होना जरूरी है।

निमिशा पर अपने पार्टनर की हत्या का आरोप

निमिशा प्रिया के परिवार ने कथित तौर पर उसे बचाने की उम्मीद में पीड़ित परिवार को 10 लाख डॉलर (8.6 करोड़ रुपए) 'ब्लड मनी' के रूप में देने की पेशकश की है। केरल के पलक्कल की रहने वाली निमिशा साल 2011 से कतर में रह रही हैं। यमन में नियम है कि अगर कोई विदेशी मेडिकल प्रैक्टिशनर क्लिनिक खोलना चाहे तो उसे किसी यमन के नागरिक को पार्टनर बनाना होगा। निमिशा ने तलाल अब्दो महदी को अपना पार्टनर बनाया था। निमिशा के परिवार का कहना है कि महदी ने धोखे से शादी के दस्तावेज बनवा लिए और उसने निमिशा का पासपोर्ट भी अपने कब्जे में ले लिया था।

यमन से भारत लौटने के लिए निमिशा को पासपोर्ट चाहिए था। उसने महदी को स्लो प्वाइजन दिया था, ताकि वह बेहोश हो जाए और वह अपना पासपोर्ट उसके पास से लेकर भाग जाए। हालांकि, दवा की वजह से उसकी मौत हो गई। यमन की न्याय परिषद ने अपने फैसले में लिखा है कि निमिशा ने महदी की हत्या की और फिर उसके शव के कई टुकड़े कर ठिकाने लगा दिया था।

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